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  • एस्कॉर्ट्स कुबोटा ट्रैक्टर बिक्री में रिकॉर्ड उछाल, दिसंबर 2025 में 38.5% ग्रोथ दर्ज

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा ट्रैक्टर बिक्री में रिकॉर्ड उछाल, दिसंबर 2025 में 38.5% ग्रोथ दर्ज

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा ट्रैक्टर की बिक्री में जबरदस्त उछाल, दिसंबर 2025 में 38.5% की रिकॉर्ड ग्रोथ


    भारत के ट्रैक्टर उद्योग में दिसंबर 2025 का महीना एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के लिए बेहद शानदार साबित हुआ है। कंपनी ने इस दौरान ट्रैक्टर बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाते हुए 38.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की है। यह आंकड़े न केवल कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में मांग लगातार मजबूत हो रही है।

    दिसंबर 2025 में कुल ट्रैक्टर बिक्री का पूरा ब्योरा

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने दिसंबर 2025 में कुल 7,577 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 5,472 यूनिट था। यानी एक साल में कंपनी की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। Escorts Kubota Tractor Sales December 2025 अब ऑटो और कृषि मशीनरी सेक्टर की बड़ी सुर्खियों में शामिल हो चुका है।

    घरेलू बाजार में ट्रैक्टरों की मजबूत मांग

    अगर घरेलू बाजार की बात करें तो कंपनी ने दिसंबर 2025 में 6,828 ट्रैक्टरों की घरेलू बिक्री दर्ज की। पिछले वर्ष इसी महीने यह संख्या 5,016 यूनिट थी। इस तरह घरेलू बिक्री में 36.1% की ग्रोथ दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी सब्सिडी योजनाएं, कम GST दरें, राज्य सरकारों की सहायता नीतियां और किसानों को मिल रहा सीधा लाभ इस ग्रोथ के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा बेहतर खरीफ उत्पादन, रबी फसलों की बुवाई में तेजी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल ने भी ट्रैक्टर डिमांड को मजबूती दी है।


    निर्यात में भी एस्कॉर्ट्स कुबोटा का दमदार प्रदर्शन

    घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। दिसंबर 2025 में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने 749 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 456 यूनिट था। इस तरह निर्यात में 64.3 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    कंपनी के Farmtrac, Powertrac और Kubota Tractor ब्रांड्स की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है। अफ्रीका, एशिया और कुछ यूरोपीय देशों में भारतीय ट्रैक्टरों की विश्वसनीयता और किफायती कीमतें इन्हें लोकप्रिय बना रही हैं।

    Q3 FY26 में भी बनी रही ग्रोथ की रफ्तार

    वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस अवधि में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने कुल 36,955 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही से 13.5% अधिक है।

    • घरेलू बिक्री: 35,373 यूनिट (12% की वृद्धि)
    • निर्यात बिक्री: 1,582 यूनिट (62.9% की तेज बढ़ोतरी)

    यह आंकड़े साफ बताते हैं कि कंपनी की रणनीति और उत्पाद पोर्टफोलियो दोनों ही बाजार की जरूरतों पर खरे उतर रहे हैं।


    अप्रैल से दिसंबर FY26 तक लगातार ग्रोथ

    वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर) में भी एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ग्रोथ बनी रही। इस दौरान कंपनी ने कुल 1,01,413 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है।

    • घरेलू बिक्री: 96,550 यूनिट
    • निर्यात: 4,863 यूनिट
    • निर्यात ग्रोथ: 53.9%

    यह साफ संकेत है कि Escorts Kubota Tractor Market Share लगातार मजबूत हो रही है।

    क्यों बढ़ रही है एस्कॉर्ट्स कुबोटा की लोकप्रियता?

    विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनी की सफलता के पीछे कई अहम कारण हैं:

    • मजबूत डीलर नेटवर्क
    • भरोसेमंद और टिकाऊ ट्रैक्टर मॉडल
    • किसानों की जरूरतों के अनुसार तकनीक
    • बेहतर फाइनेंस और ट्रैक्टर लोन विकल्प
    • सरकारी योजनाओं से जुड़ाव

    इन सभी वजहों से एस्कॉर्ट्स कुबोटा किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है।

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के बारे में

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक है, जिसे 80 वर्षों से अधिक का अनुभव है। कंपनी कृषि मशीनरी और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर में मजबूत उपस्थिति रखती है। “Spreading Prosperity & Impacting Lives” के उद्देश्य के साथ कंपनी किसानों और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को आधुनिक समाधान प्रदान कर रही है।

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 में दर्ज की गई 38.5% ट्रैक्टर बिक्री ग्रोथ यह साबित करती है कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा न सिर्फ मौजूदा बाजार में मजबूत है, बल्कि भविष्य में भी ट्रैक्टर इंडस्ट्री का एक बड़ा खिलाड़ी बना रहेगा। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले महीनों में कंपनी नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती है।

  • महिंद्रा ट्रैक्टर बिक्री रिपोर्ट दिसंबर 2025: भारत में रिकॉर्ड मांग, निर्यात में बड़ी बढ़त

    महिंद्रा ट्रैक्टर बिक्री रिपोर्ट दिसंबर 2025: भारत में रिकॉर्ड मांग, निर्यात में बड़ी बढ़त

    महिंद्रा के ट्रैक्टर कारोबार ने दिसंबर 2025 में रचा नया रिकॉर्ड, घरेलू और निर्यात बिक्री में जबरदस्त उछाल


    महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस (FEB) ने दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महिंद्रा ग्रुप का यह प्रमुख व्यवसाय लंबे समय से कृषि यंत्रीकरण, किसानों की आय बढ़ाने, और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है। दिसंबर 2025 के बिक्री आंकड़े न केवल कंपनी की मजबूत रणनीति को दर्शाते हैं, बल्कि भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में आई मजबूती और ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी की भी स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

    कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में महिंद्रा ट्रैक्टर की घरेलू बिक्री 30,210 यूनिट्स रही। यह दिसंबर 2024 में हुई 22,019 यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले 37% सालाना वृद्धि को दर्शाती है। घरेलू बाजार में यह बढ़त ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर नकदी प्रवाह, अच्छी फसल पैदावार, और किसानों की मजबूत क्रय शक्ति का नतीजा मानी जा रही है। विशेष रूप से खरीफ फसल की सफल कटाई के बाद किसानों के पास उपलब्ध नकदी में सुधार हुआ, जिससे ट्रैक्टर डिमांड को सीधा लाभ मिला।

    अगर कुल ट्रैक्टर बिक्री (घरेलू + निर्यात) की बात करें, तो दिसंबर 2025 में महिंद्रा ने कुल 31,859 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की। यह आंकड़ा पिछले साल इसी महीने में हुई 22,943 यूनिट्स की तुलना में 39% की प्रभावशाली ग्रोथ को दर्शाता है। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि महिंद्रा ट्रैक्टर मार्केट लीडर के रूप में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है।

    निर्यात बाजार में भी महिंद्रा का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा। दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी ने 1,649 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 924 यूनिट्स था। यानी 78% की जबरदस्त एक्सपोर्ट ग्रोथ दर्ज की गई। इस निर्यात में CKD (Completely Knocked Down) यूनिट्स भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह तेजी भारतीय ट्रैक्टरों की बढ़ती वैश्विक मांग, महिंद्रा के मजबूत डीलर नेटवर्क, और भरोसेमंद ब्रांड वैल्यू को दर्शाती है।

    वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से दिसंबर 2025 तक महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने निरंतर मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 3,91,890 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 3,24,327 यूनिट्स थी। यानी 21% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    इसी तरह, ट्रैक्टर निर्यात अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान 14,702 यूनिट्स रहा, जो पिछले वर्ष की 12,296 यूनिट्स की तुलना में 20% अधिक है। कुल मिलाकर, इस अवधि में महिंद्रा की कुल ट्रैक्टर बिक्री 4,06,592 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 3,36,623 यूनिट्स थी। यह आंकड़े साफ तौर पर महिंद्रा ट्रैक्टर ग्रोथ, कृषि मशीनरी की बढ़ती मांग, और कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति की सफलता को दर्शाते हैं।

    इस शानदार प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए वीजय नाकरा, प्रेसिडेंट – फार्म इक्विपमेंट बिजनेस, महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड, ने कहा कि दिसंबर 2025 में घरेलू बाजार में 30,210 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37% अधिक है। उन्होंने बताया कि खरीफ फसल की बेहतर पैदावार के चलते बाजार में नकदी की उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे ग्रामीण मांग को मजबूती मिली है।

    उन्होंने आगे कहा कि अनुकूल मौसम परिस्थितियां, स्वस्थ जलाशय स्तर, और रबी फसलों की बढ़ती बुवाई ने ट्रैक्टरों की मांग को और बल दिया है। आने वाले महीनों में भी यह सकारात्मक रुझान जारी रहने की उम्मीद है, जिससे ट्रैक्टर बिक्री में निरंतर वृद्धि देखने को मिल सकती है। निर्यात बाजार को लेकर उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में 1,649 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई, जो 78% की मजबूत वृद्धि को दर्शाती है।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाएं, ग्रामीण विकास पर बढ़ता फोकस, MSP सपोर्ट, बेहतर मानसून, और तकनीकी रूप से उन्नत ट्रैक्टरों की बढ़ती मांग आने वाले समय में भी ट्रैक्टर उद्योग को मजबूती प्रदान करेंगी। महिंद्रा, जो पहले से ही भारत की नंबर-1 ट्रैक्टर कंपनी मानी जाती है, इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, डिजिटल सर्विसेज, और कस्टमर सपोर्ट नेटवर्क को लगातार सशक्त बना रही है।

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 के बिक्री आंकड़े यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिजनेस मजबूत विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। घरेलू बाजार में किसानों का भरोसा, वैश्विक स्तर पर बढ़ता निर्यात, और कृषि क्षेत्र की सकारात्मक स्थिति के साथ महिंद्रा आने वाले समय में भी ट्रैक्टर इंडस्ट्री में अपनी लीडरशिप को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आती है।

  • इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सरकार का बड़ा फैसला: नए मानक लागू, किसानों को बड़ा फायदा

    इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सरकार का बड़ा फैसला: नए मानक लागू, किसानों को बड़ा फायदा

    सरकार का बड़ा फैसला: इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर के मानक तय, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत


    केंद्र सरकार ने भारतीय कृषि क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश में पहली बार इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए आधिकारिक भारतीय मानक लागू कर दिए गए हैं। इस फैसले से न सिर्फ किसानों को बेहतर और भरोसेमंद मशीनें मिलेंगी, बल्कि ग्रीन एग्रीकल्चर, कम लागत वाली खेती और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। लंबे समय से जिस तकनीक को लेकर किसानों और कंपनियों दोनों में असमंजस बना हुआ था, अब उस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो गए हैं।

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की पहल पर भारत में आईएस 19262:2025 नाम से पहला भारतीय मानक जारी किया गया है। यह मानक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रदर्शन और तकनीकी क्षमता को परखने का एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। अब बाजार में आने वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बिना जांच और प्रमाणन के नहीं बिक सकेंगे, जिससे किसानों को घटिया या अधूरी तकनीक से बचाया जा सकेगा।

    अब तक देश में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का बाजार तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन किसी एक समान मानक के अभाव में किसानों के मन में कई सवाल थे। किसान यह तय नहीं कर पा रहे थे कि कौन सा ट्रैक्टर वास्तव में खेतों के लिए उपयुक्त है और कौन सिर्फ नाम के लिए इलेक्ट्रिक है। नए मानकों के लागू होने से यह भ्रम पूरी तरह खत्म होगा। अब हर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को तय परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा।

    इस मानक के तहत ट्रैक्टर की पीटीओ पावर (PTO Power), ड्रॉबार पावर, बेल्ट, पुली और अन्य जरूरी तकनीकी हिस्सों की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही कंपन मापन, असेंबली निरीक्षण और तकनीकी विनिर्देशों का सत्यापन भी जरूरी किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि जो ट्रैक्टर बाजार में आएगा, वह ताकतवर, सुरक्षित और लंबे समय तक खेती के काम में भरोसेमंद साबित होगा। किसानों को अब यह चिंता नहीं रहेगी कि ट्रैक्टर कुछ महीनों में जवाब दे जाएगा या भारी काम में कमजोर पड़ जाएगा।

    भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तैयार किए गए इन नियमों का मकसद सिर्फ तकनीकी जांच नहीं है, बल्कि किसानों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना है। खेतों में लंबे समय तक काम करने वाले किसानों के लिए मशीन का संतुलन, कंपन का स्तर और संचालन की सहजता बेहद अहम होती है। नए मानकों में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और काम करना ज्यादा आरामदायक बनेगा।

    किसानों के लिए यह फैसला कई मायनों में फायदेमंद साबित होगा। सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदते समय क्वालिटी को लेकर संदेह नहीं रहेगा। तय मानकों के चलते कंपनियां मनमानी नहीं कर सकेंगी और हर मॉडल को एक तय स्तर पर खरा उतरना होगा। इससे किसानों का पैसा सुरक्षित रहेगा और उन्हें सही कीमत पर बेहतर उत्पाद मिलेगा।

    इसके अलावा इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में कम खर्चीले होते हैं। इनमें ईंधन की लागत बेहद कम होती है और रखरखाव पर भी कम पैसा खर्च होता है। डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह किसानों के लिए बड़ी राहत है। लंबे समय में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती की कुल लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी यह बदलाव बेहद अहम है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों से न तो धुआं निकलता है और न ही तेज शोर होता है। इससे खेतों में काम करने वाले किसानों को ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण से राहत मिलेगी। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक सुरक्षित और आरामदायक विकल्प बन सकता है। साथ ही गांवों और कृषि क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर कम होगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

    सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर स्वच्छ और टिकाऊ खेती की दिशा में एक मजबूत कदम हैं। डीजल पर निर्भरता कम होने से न सिर्फ आयात पर दबाव घटेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह पहल डिजिटल और ग्रीन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कृषि उपकरणों को लेकर सब्सिडी, प्रोत्साहन योजनाएं और नई नीतियां भी लाई जा सकती हैं, जिससे किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।

    इस मानक को तैयार करने में सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों की भी अहम भूमिका रही है। सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल कर यह सुनिश्चित किया गया है कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी किसानों के काम आएं। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे एक व्यावहारिक और किसान हितैषी कदम मान रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आईएस 19262:2025 के लागू होने से भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अपनाने की रफ्तार तेज होगी। जब किसानों का भरोसा नई तकनीक पर मजबूत होगा, तो मांग भी बढ़ेगी। इससे कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को बेहतर तकनीक और किफायती दाम के रूप में मिलेगा। भविष्य में यह कदम भारतीय कृषि यंत्रीकरण को वैश्विक स्तर पर भी मजबूत पहचान दिला सकता है।

    कुल मिलाकर, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए भारतीय मानक तय किया जाना किसानों के हित में एक निर्णायक और दूरदर्शी फैसला माना जा रहा है। इससे न केवल खेती की लागत घटेगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और आधुनिक कृषि व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इस कदम से साफ है कि आने वाले वर्षों में भारतीय खेती तेजी से तकनीक आधारित, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनने की ओर बढ़ रही है।

  • Mini Tractor Subsidy 2025: किसानों को मिलेगा 2.25 लाख तक अनुदान, ऐसे करें आवेदन

    Mini Tractor Subsidy 2025: किसानों को मिलेगा 2.25 लाख तक अनुदान, ऐसे करें आवेदन

    मिनी ट्रैक्टर पर बंपर सब्सिडी: छोटे किसानों के लिए खेती होगी आसान, मिलेंगे 2.25 लाख रुपये तक का लाभ


    अगर आप किसान हैं और खेती के काम को आसान बनाने के लिए ट्रैक्टर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत देते हुए मिनी ट्रैक्टर सब्सिडी योजना के तहत अनुदान राशि में बड़ा इजाफा किया है। अब पात्र किसानों को मिनी ट्रैक्टर खरीदने पर 2.25 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस कदम का सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जिनके पास कम जमीन है और जो अब तक ट्रैक्टर की ऊंची कीमतों के कारण आधुनिक खेती से दूर थे।

    आज के दौर में खेती को उन्नत और लाभकारी बनाने में ट्रैक्टर की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, थ्रेसिंग और ढुलाई जैसे तमाम काम ट्रैक्टर की मदद से कम समय और कम मेहनत में पूरे हो जाते हैं। ट्रैक्टर के कारण किसान समय पर खेत की तैयारी कर पाते हैं, जिससे फसल की बुवाई में देरी नहीं होती और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। यही वजह है कि ट्रैक्टर को आधुनिक कृषि की रीढ़ कहा जाता है।

    हालांकि, महंगाई के इस दौर में ट्रैक्टर खरीदना हर किसान के लिए आसान नहीं रह गया है। खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए, जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है, उनके लिए ट्रैक्टर खरीदना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे किसान अक्सर बड़े किसानों या किराये के ट्रैक्टर पर निर्भर रहते हैं। इससे न केवल खेती की लागत बढ़ जाती है, बल्कि समय पर काम न हो पाने से फसल पर भी असर पड़ता है। कई बार बुवाई या जुताई में देरी होने से उत्पादन कम हो जाता है और किसान की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है।

    इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मिनी ट्रैक्टर सब्सिडी योजना को और प्रभावी बनाने का फैसला लिया है। पहले इस योजना के तहत किसानों को 1 लाख रुपये तक का अनुदान मिलता था, लेकिन अब बढ़ती महंगाई और ट्रैक्टर की कीमतों को देखते हुए सरकार ने इसे बढ़ाकर अधिकतम 2.25 लाख रुपये कर दिया है। यह फैसला खास तौर पर छोटे किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से इस तरह की मदद का इंतजार कर रहे थे।

    यह योजना हॉर्टिकल्चर (उद्यानिकी) विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को विभाग के आधिकारिक पोर्टल MPFST पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद किसान योजना में शामिल 10 से 12 मान्यता प्राप्त ट्रैक्टर कंपनियों में से किसी एक कंपनी का चयन कर सकते हैं। इससे किसानों को गुणवत्ता वाले ट्रैक्टर खरीदने का अवसर मिलता है और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

    इस योजना के तहत किसानों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है। यानी सभी आवेदकों में से पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों का चयन किया जाता है। अगर किसी किसान का नाम लॉटरी में आ जाता है, तो उसे पहले ट्रैक्टर की कुल कीमत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा स्वयं भुगतान करना होता है। इसके बाद ट्रैक्टर खरीद की प्रक्रिया पूरी की जाती है। शेष सब्सिडी राशि सरकार द्वारा डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है।

    सरकार ने इस योजना में खासतौर पर 20 हॉर्स पावर (HP) तक के मिनी ट्रैक्टर पर फोकस किया है। वर्तमान समय में 20 HP का मिनी ट्रैक्टर बाजार में लगभग 4.5 लाख रुपये की कीमत में उपलब्ध है। ट्रैक्टर की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे को देखते हुए सरकार ने सब्सिडी राशि बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ कम हो सके और वे आसानी से ट्रैक्टर खरीद सकें।

    भूमि के आधार पर सब्सिडी की राशि भी तय की गई है। जिन किसानों के पास 5 एकड़ से अधिक भूमि है, उन्हें ट्रैक्टर पर लगभग 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। वहीं, 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों को मिनी ट्रैक्टर पर अधिकतम 2.25 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है।

    इस योजना के तहत पात्रता से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी रखी गई हैं। कोई भी किसान इस योजना का लाभ ले सकता है, लेकिन शर्त यह है कि उसने पिछले 7 वर्षों में ट्रैक्टर या पावर टिलर खरीदने पर किसी भी सरकारी योजना के तहत सब्सिडी का लाभ न लिया हो। इसके अलावा किसान केवल ट्रैक्टर या पावर टिलर में से किसी एक पर ही अनुदान प्राप्त कर सकता है। यानी अगर किसी किसान ने पहले पावर टिलर पर सब्सिडी ली है, तो वह इस योजना के तहत ट्रैक्टर पर अनुदान का लाभ नहीं ले सकेगा।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक के पहले पृष्ठ की कॉपी, बी-1 की प्रति, और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र शामिल है। सिंचाई उपकरणों से जुड़े मामलों में बिजली कनेक्शन का प्रमाण भी मांगा जा सकता है। आवेदन के बाद जिला अधिकारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है और पात्र पाए जाने पर क्रय स्वीकृति आदेश जारी किया जाता है।

    इस योजना से किसानों को कई स्तरों पर फायदा मिलने वाला है। एक ओर जहां किराये के ट्रैक्टर पर निर्भरता कम होगी, वहीं दूसरी ओर किसान समय पर खेती के सभी काम खुद कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी सुधार होगा। साथ ही, आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और खेती को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा सकेंगे।

    कुल मिलाकर, मिनी ट्रैक्टर पर 2.25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देने का सरकार का यह फैसला छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है। अगर आप भी इस श्रेणी में आते हैं और ट्रैक्टर खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह योजना आपके लिए सुनहरा मौका है। सही जानकारी, समय पर आवेदन और पात्रता शर्तों को पूरा करके आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं और अपनी खेती को नई दिशा दे सकते हैं।

  • Central Bank का बड़ा ऐलान: ACE के साथ MoU, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी पर मिलेगा आसान लोन

    Central Bank का बड़ा ऐलान: ACE के साथ MoU, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी पर मिलेगा आसान लोन

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ACE लिमिटेड की बड़ी पहल, ट्रैक्टर व कृषि मशीनरी के लिए आसान लोन से किसानों को मिलेगी नई ताकत

    Central Bank का बड़ा ऐलान: ACE के साथ MoU, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी पर मिलेगा आसान लोन



    नई दिल्ली से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है। देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और अग्रणी कृषि व निर्माण उपकरण निर्माता एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) लिमिटेड के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उद्देश्य किसानों, कृषि उद्यमियों और ग्रामीण ग्राहकों को ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी के लिए संगठित, सस्ता और आसान वित्त उपलब्ध कराना है।

    यह साझेदारी ऐसे समय पर हुई है जब देश में कृषि यंत्रीकरण (Farm Mechanisation) की जरूरत तेजी से बढ़ रही है और छोटे व सीमांत किसान आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। इस करार के जरिए दोनों संस्थान मिलकर ग्रामीण भारत में क्रेडिट पहुंच, उत्पादकता और आय में बढ़ोतरी को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।

    इस MoU पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से डी. एस. राठौर, जनरल मैनेजर (ASBD) और ACE लिमिटेड की ओर से रविंद्र सिंह खनेजा, चीफ जनरल मैनेजर – एग्री डिवीजन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बैंक के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें एम. वी. मुरलीकृष्ण, कार्यकारी निदेशक, ई. रतन कुमार, कार्यकारी निदेशक, मुकुल डांडीगे, चीफ जनरल मैनेजर, वस्ती वेंकटेश, चीफ जनरल मैनेजर और पॉपी शर्मा, चीफ जनरल मैनेजर शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति से यह स्पष्ट है कि यह करार बैंक और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    इस समझौते का मूल फोकस किसानों को ट्रैक्टर लोन, फार्म इक्विपमेंट लोन, और अन्य आधुनिक कृषि मशीनों के लिए आसान शर्तों पर फाइनेंस उपलब्ध कराना है। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण इलाकों में किसानों को असंगठित स्रोतों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है। इस नई साझेदारी के तहत संगठित बैंकिंग प्रणाली के जरिए किसानों को भरोसेमंद और पारदर्शी वित्त मिलेगा, जिससे वे आधुनिक उपकरणों में निवेश कर सकेंगे।

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी न केवल खेती की लागत को नियंत्रित करती है बल्कि समय की भी बचत करती है। इससे बुआई, कटाई और सिंचाई जैसे कार्य अधिक कुशलता से पूरे होते हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ACE लिमिटेड का यह कदम खेती की उत्पादकता बढ़ाने, उपज में सुधार और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में भी मददगार साबित हो सकता है।

    इस साझेदारी से छोटे और सीमांत किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो अब तक पूंजी की कमी के कारण आधुनिक मशीनें नहीं खरीद पाते थे। इसके अलावा एग्री-एंटरप्रेन्योर, कस्टम हायरिंग सेंटर चलाने वाले किसान और ग्रामीण युवा भी इस योजना से लाभ उठा सकते हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कृषि से जुड़े सहायक व्यवसायों को भी मजबूती मिलेगी।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव दूरगामी माना जा रहा है। जब किसानों को सही समय पर सस्ता कृषि ऋण मिलेगा, तो वे उत्पादन बढ़ा पाएंगे, जिससे बाजार में आपूर्ति सुधरेगी और आय में स्थिरता आएगी। इससे सस्टेनेबल फार्मिंग, बेहतर फसल प्रबंधन और पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बात करें तो इसकी स्थापना वर्ष 1911 में हुई थी और यह देश के सबसे पुराने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है। बैंक की शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी है। खास तौर पर कृषि और ग्रामीण वित्त में बैंक की भूमिका हमेशा अहम रही है। यह बैंक किसानों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को कई प्रकार की वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।

    वहीं ACE लिमिटेड भारत की जानी-मानी कंपनी है, जो ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और निर्माण मशीनरी के क्षेत्र में मजबूत पहचान रखती है। कंपनी के उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों में किसानों और ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। बैंक और ACE का यह गठजोड़ वित्त और तकनीक को एक मंच पर लाकर किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश है।

    इस पहल के साथ-साथ देश में डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म भी तेजी से उभर रहे हैं, जो किसानों को तेज और सरल प्रक्रिया के जरिए ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट लोन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कृषि ऋण प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तेज और किसान हितैषी बनने वाली है।

    कुल मिलाकर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ACE लिमिटेड के बीच हुआ यह MoU भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। इससे न केवल किसानों को आधुनिक साधनों तक पहुंच मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और कृषि विकास को भी नई गति मिलेगी। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में खेती को अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • Kisan Agri Show 2025: Solis-Yanmar ने लॉन्च की नई पीढ़ी की दमदार ट्रैक्टर रेंज

    Kisan Agri Show 2025: Solis-Yanmar ने लॉन्च की नई पीढ़ी की दमदार ट्रैक्टर रेंज

    किसान एग्री शो 2025 में सोलिस–यांमार ने पेश की दमदार मल्टी-स्पीड ट्रैक्टर रेंज, महाराष्ट्र के किसानों के लिए नई तकनीक का तोहफा

    Kisan Agri Show 2025: Solis-Yanmar ने लॉन्च की नई पीढ़ी की दमदार ट्रैक्टर रेंज


    पुणे में आयोजित किसान एग्री शो 2025 में सोलिस (इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड का प्रमुख ब्रांड) ने अपनी नई पीढ़ी की शक्तिशाली और उन्नत तकनीक से लैस ट्रैक्टर रेंज का भव्य प्रदर्शन किया। यह प्रतिष्ठित कृषि प्रदर्शनी 10 से 14 दिसंबर 2025 तक पुणे इंटरनेशनल एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (PIECC), मोशी, भोसरी के पास आयोजित की जा रही है, जहां देश-भर के कृषि ब्रांड, उद्योग विशेषज्ञ, डीलर, किसान और एग्री-एंथूजियास्ट एक मंच पर एकत्र हुए हैं।

    इस अवसर पर यानमार के डायरेक्टर इवामो-सान, डिवीजन हेड महेश इठापे, महाराष्ट्र के डीलर पार्टनर्स और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। सोलिस ने यहां अपनी सबसे शक्तिशाली और मल्टी-स्पीड ट्रैक्टर लाइन-अप को प्रदर्शित किया, जिसमें हाल ही में लॉन्च किया गया Solis JP 975 (2WD/4WD), Orchard Expert Solis 2716 SN, Farming Expert Yanmar YM 235 के साथ-साथ Solis 5724 4WD और Yanmar YM 348R भी शामिल हैं।

    कार्यक्रम में बोलते हुए सोलिस यांमार के प्रेसिडेंट श्री मुदित गुप्ता ने कहा कि महाराष्ट्र के किसानों की समृद्धि के लिए यह नई रेंज एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि Solis JP 975 पूरी तरह से नई जनरेशन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें JP Tech 4-सिलेंडर इंजन, अपने सेगमेंट में भारत की पहली 15F + 5R एपिसाइक्लिक ट्रांसमिशन, साइड-शिफ्ट गियर और कम से कम 5 ऑप्टिमल वर्किंग स्पीड दी गई हैं, जिससे खेती अधिक उत्पादक और आरामदायक बनती है।

    Orchard Expert Solis 2716 SN को बागवानी किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें हाई परफॉर्मेंस इंजन, उच्च PTO पावर, साइड-शिफ्ट गियर, 3-फीट ऑप्शन, और 12F + 4R ट्रांसमिशन दिया गया है, जो संकरी जगहों और विशेष फसलों के लिए इसे बेहद उपयोगी बनाता है। वहीं Farming Expert Yanmar YM 235 में यानमार का एडवांस और पावरफुल इंजन, प्रोजेक्टर हेडलैम्प, स्टैंडर्ड ROPS, पावर शटल के साथ 16-स्पीड ऑप्शन, बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस, कम टर्निंग रेडियस और शानदार कंट्रोल मिलता है, जिससे यह हर तरह के कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त है।

    इसके अलावा, सोलिस ने Yanmar YM 348R को भी अपने स्टॉल OD 03 पर प्रदर्शित किया है, जिसमें 14.9×28 के बड़े रियर टायर दिए गए हैं, जो बेहतर ग्रिप और फील्ड परफॉर्मेंस सुनिश्चित करते हैं। कंपनी का कहना है कि इन ट्रैक्टरों को खास तौर पर विकसित किसान (Viksit Kisan) की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि कम लागत में ज्यादा उत्पादन, बेहतर आराम और उच्च आय संभव हो सके।

    कुल मिलाकर, किसान एग्री शो 2025 में सोलिस–यांमार की मौजूदगी यह दर्शाती है कि कंपनी नई तकनीक, इनोवेशन और किसान-केंद्रित समाधानों के जरिए भारतीय कृषि को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नई ट्रैक्टर रेंज न केवल महाराष्ट्र के किसानों बल्कि देश के अन्य हिस्सों के किसानों के लिए भी आधुनिक खेती की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।

  • Mahindra Tractor ने मारी बाजी! November 2025 Tractor Market Share में जोरदार उछाल

    Mahindra Tractor ने मारी बाजी! November 2025 Tractor Market Share में जोरदार उछाल

    Tractor OEM Nov’25 Market Share: नवंबर में ट्रैक्टर इंडस्ट्री में मजबूत उछाल, महिंद्रा फिर नंबर 1

    भारत के ट्रैक्टर बाजार में नवंबर 2025 काफी सक्रिय रहा। इस दौरान लगभग सभी कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में बेहतर बिक्री दर्ज की। रबी सीजन की अच्छी शुरुआत, मिट्टी में नमी और MSP संकेत बेहतर रहने से किसानों की खरीदी में इजाफा हुआ है। यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिति सुधारने से ट्रैक्टर की मांग बढ़ती दिखी।

    सबसे ज्यादा बिक्री Mahindra & Mahindra (ट्रैक्टर डिविजन) ने की। नवंबर 2025 में कंपनी ने 31,938 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की और 25.34% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर रही। पिछले साल यह आंकड़ा 19,521 यूनिट था। महिंद्रा की ग्रामीण पकड़, हाई-HP ट्रैक्टर और मजबूत डीलर नेटवर्क ने इसे फिर से शीर्ष पर बनाए रखा।

    महिंद्रा का Swaraj Division भी बाजार में दमदार प्रदर्शन कर रहा है। नवंबर में 23,220 यूनिट बिक्री के साथ स्वराज का मार्केट शेयर 18.42% रहा, जो पिछले साल 14,703 यूनिट था। किसानों के बीच स्वराज की विश्वसनीयता और बेहतर परफॉर्मेंस इसे लगातार आगे रख रही है।

    International Tractors Limited (Sonalika) ने नवंबर में 15,742 यूनिट की बिक्री की और 12.49% मार्केट शेयर हासिल किया। हालांकि मार्केट शेयर पिछले साल 13.48% था, लेकिन बिक्री संख्या मजबूत है। सोनालिका की इंटरनेशनल मौजूदगी और नई तकनीक इसकी मजबूती दर्शाती है।

    Escorts Kubota ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नवंबर में 14,521 यूनिट बेचे, जबकि पिछले साल यह संख्या मात्र 7,399 यूनिट थी। कंपनी का मार्केट शेयर 11.52% रहा। Escorts की नई फाइनेंस स्कीम, मॉडल अपडेट और फोकस्ड मार्केटिंग स्ट्रेटेजी ग्रामीण बाजार में अच्छी पकड़ बना रही है।

    TAFE Limited ने नवंबर में 13,559 यूनिट बेचे और 10.76% मार्केट शेयर हासिल किया। पिछले साल यह आंकड़ा 9,387 यूनिट था। मैसी फर्ग्यूसन ब्रांड की लोकप्रियता और मजबूत वितरण नेटवर्क इसका सबसे बड़ा आधार है।

    John Deere India की बिक्री 9,584 यूनिट रही और मार्केट शेयर 7.60% दर्ज हुआ। पिछले साल कंपनी ने 5,959 यूनिट बेचे थे। जॉन डियर के हाई-HP मॉडल खेती के अलावा औद्योगिक कार्यों में भी तेजी से उपयोग हो रहे हैं, जिससे कंपनी को लगातार बढ़त मिल रही है।

    Eicher Tractors ने इस महीने 7,027 यूनिट बेचे और मार्केट शेयर 5.58% रहा। पिछले साल बिक्री 5,560 यूनिट थी। बिक्री में वृद्धि होने के बावजूद मार्केट शेयर में थोड़ी कमी है, जो प्रतिस्पर्धा के बढ़ने का संकेत देता है।

    CNH Industrial ने नवंबर 2025 में 5,784 यूनिट बेचे और 4.59% मार्केट शेयर दर्ज किया। पिछले साल कंपनी की बिक्री 3,104 यूनिट थी। नए मॉडल और तकनीकी सुधार ने कंपनी की स्थिति को काफी मजबूत किया है।

    अन्य कंपनियों ने कुल 4,658 यूनिट बेचे, जबकि पिछले साल बिक्री 4,018 यूनिट थी।

    नवंबर 2025 में कुल ट्रैक्टर उद्योग का वॉल्यूम 1,26,033 यूनिट रहा, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 80,507 यूनिट था। इससे पता चलता है कि ग्रामीण बाज़ार लगातार रिकवर कर रहा है और किसान मशीनरी पर निवेश बढ़ा रहे हैं।

    इस शानदार बिक्री वृद्धि के पीछे कई वजहें हैं—रबी सीजन में 39.3 मिलियन हेक्टेयर से अधिक बोवाई, मिट्टी में बेहतर नमी, बीज उपलब्धता और MSP संकेत। गेहूं, दलहन और तेलबीज की खेती में बढ़त किसानों के लिए अच्छा संकेत है। मौसम विभाग की ठंडी सर्दी की भविष्यवाणी भी लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेगमेंट की मांग बढ़ा सकती है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में FMCG, ट्रैक्टर और दोपहिया बिक्री में वृद्धि दिख रही है। साथ ही GST 2.0, OEM–डीलर स्कीम और वर्षांत ऑफर्स ने भी मांग को बढ़ावा दिया है। डीलर्स का कहना है कि दिसंबर में भी बिक्री बनी रह सकती है क्योंकि पूछताछ पाइपलाइन मजबूत है, स्टॉक उपलब्ध है और विवाह सीजन चल रहा है।

    मार्केट में अभी उत्साह और सावधानी दोनों मौजूद हैं, जिसे उद्योग में cautious optimism कहा जा रहा है। कंपनियों की नई योजनाएँ, वित्तीय ऑफर और प्राइस अपडेट का प्रभाव भी मांग पर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, नवंबर 2025 को ट्रैक्टर उद्योग के लिए एक रिकवरी मोमेंट कहा जा सकता है। आने वाले महीनों में भी रबी सीजन और MSP सपोर्ट की वजह से बाजार में स्थिरता और वृद्धि की उम्मीद है।

  • Sonalika Tractors ने तोड़ा रिकॉर्ड: 2025 में 1,26,162 YTD बिक्री पूरी

    Sonalika Tractors ने तोड़ा रिकॉर्ड: 2025 में 1,26,162 YTD बिक्री पूरी

    Sonalika Tractors ने रचा नया इतिहास: अप्रैल–नवंबर 2025 में दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी YTD बिक्री, 1,26,162 ट्रैक्टर हुए सेल


    भारत में खेती का चेहरा तेजी से बदल रहा है, और इसी बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है Sonalika Tractors की अभूतपूर्व सफलता। कंपनी ने अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच 1,26,162 ट्रैक्टरों की Year-To-Date (YTD) बिक्री दर्ज करते हुए ट्रैक्टर उद्योग में एक नया इतिहास रच दिया है। यह न सिर्फ Sonalika के लिए बल्कि पूरे भारतीय कृषि तंत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बढ़ती मांग बताती है कि किसान अब अधिक शक्तिशाली, टिकाऊ और उन्नत तकनीक से लैस ट्रैक्टरों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

    Sonalika की इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग उपलब्धि पर International Tractors Limited (Sonalika & Solis) के Joint Managing Director रमन मित्तल ने गर्व जताते हुए कहा कि यह केवल बिक्री का आंकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय किसानों का भरोसा है जो कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान अब आधुनिक मशीनों और तकनीक का महत्व समझ रहे हैं, जिससे खेती तेजी, दक्षता और उत्पादकता के साथ आगे बढ़ रही है।

    भारत में कृषि मशीनीकरण का दायरा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए किए गए कई कदमों—जैसे MSP में बढ़ोतरी, GST राहत, किफायती कृषि ऋण, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश—ने किसानों को मशीनरी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके चलते आधुनिक ट्रैक्टरों, 4WD मॉडल्स, हाई-परफॉर्मेंस इंजन और स्मार्ट फीचर्स की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

    किसान अब सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं। वे Precision Farming जैसी उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने लगे हैं, जिसमें मशीनें कम समय, कम लागत और अधिक उत्पादकता के साथ खेती में मदद करती हैं। चाहे वह आधुनिक रोटावेटर हो, सीड ड्रिल, प्लाऊ या उन्नत ट्रैक्टर—हर उपकरण खेती को आसान और अधिक लाभदायक बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी तकनीक-आधारित सोच ने Sonalika की बिक्री में बड़ा योगदान दिया है।

    Sonalika Tractors अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, मजबूत परफॉर्मेंस और किसानों के अनुकूल डिजाइनों के लिए जाना जाता है। कंपनी 20 HP से लेकर 120 HP तक के ट्रैक्टर बनाती है, जो विभिन्न फसलों, इलाकों और जरूरतों के हिसाब से बिल्कुल उपयुक्त हैं। भारत की 3rd largest ट्रैक्टर कंपनी और #1 ट्रैक्टर एक्सपोर्ट ब्रांड होने के नाते Sonalika की पकड़ केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके ट्रैक्टर 150+ देशों में उपयोग किए जाते हैं। पंजाब के होशियारपुर में मौजूद उनका प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्माण प्लांट माना जाता है, जहां उच्च तकनीक से लैस ट्रैक्टर और 70 से अधिक कृषि उपकरण तैयार किए जाते हैं।

    कंपनी की 2025 की YTD बिक्री यह साबित करती है कि भारतीय किसान तकनीकी रूप से तेजी से विकसित हो रहे हैं और आधुनिक कृषि उपकरणों को अपना रहे हैं। यह रिकॉर्ड न केवल Sonalika की क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब कृषि शक्ति बनने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

    कुल मिलाकर, Sonalika Tractors की यह उपलब्धि किसानों के बढ़ते विश्वास, सरकारी नीतियों और तकनीकी नवाचार का संयुक्त परिणाम है, जो भारतीय कृषि के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करता है।

  • VST Sales November 2025: पावर टिलर बिक्री में 145% की धमाकेदार बढ़त

    VST Sales November 2025: पावर टिलर बिक्री में 145% की धमाकेदार बढ़त

    नवंबर 2025 में VST की बिक्री में ऐतिहासिक उछाल, पावर टिलर की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

    VST Sales November 2025: पावर टिलर बिक्री में 145% की धमाकेदार बढ़त


    नवंबर 2025 वीएसटी टिलर्स एंड ट्रैक्टर्स (VST Tillers & Tractors Ltd) के लिए किसी तेजी से धड़कते इंजन की तरह साबित हुआ। कंपनी ने अपनी मासिक बिक्री रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि कुल 5,166 यूनिट की बिक्री दर्ज की गई। यह पिछले साल नवंबर 2024 में बेची गई 2,251 यूनिट की तुलना में 129.5% की धमाकेदार वृद्धि को दर्शाता है। कृषि मशीनरी बाजार में इस समय जिस ब्रांड की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह है VST, और इस रिपोर्ट ने इसे और मजबूत कर दिया है।

    इस महीने की सबसे चमकदार उपलब्धि रही पावर टिलर सेगमेंट में दर्ज की गई ऐतिहासिक बढ़त। नवंबर 2025 में वीएसटी ने 4,676 पावर टिलर बेचे, जबकि एक साल पहले नवंबर 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 1,904 यूनिट था। इसका मतलब है कि पावर टिलर सेगमेंट में VST ने 145.6% की रिकॉर्डतोड़ ग्रोथ हासिल की—एक ऐसा आंकड़ा जो स्पष्ट तौर पर किसानों की बढ़ती जरूरतों और ब्रांड में भरोसे को दर्शाता है। ग्रामीण बाजारों में पावर टिलर की बढ़ती मांग, छोटे किसानों की बढ़ती मैकेनाइजेशन जरूरतों और फसल प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की ओर कदम बढ़ाने का संकेत भी देती है।

    पावर टिलर के मुकाबले ट्रैक्टर सेगमेंट में थोड़ी धीमी लेकिन स्थिर प्रगति देखने को मिली। नवंबर 2025 में VST ने 490 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले वर्ष नवंबर में यह संख्या 347 यूनिट थी। यानी 41.2% की वृद्धि—यह संकेत देता है कि कंपनी के मिनी और कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। ट्रैक्टर बाजार में बड़ी कंपनियों के मुकाबले VST के उत्पाद छोटे किसानों और विशेष खेती प्रथाओं में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।

    कुल मिलाकर नवंबर 2025 कंपनी के लिए बेहद सफल महीना रहा, जहां दोनों प्रमुख सेगमेंट—पावर टिलर और ट्रैक्टर—ने कंपनी की विकास यात्रा को नई ऊर्जा दी।


    YTD अवधि (अप्रैल–नवंबर 2025) ने भी दिखाई मजबूत पकड़

    केवल नवंबर माह ही नहीं, बल्कि पूरे साल की अब तक की अवधि भी वीएसटी के लिए उम्मीदों से कहीं अधिक बेहतर रही है। अप्रैल से नवंबर 2025 तक कंपनी की कुल YTD (Year-to-Date) बिक्री 37,235 यूनिट रही। यह पिछले वर्ष इसी अवधि में बेची गई 24,638 यूनिट की तुलना में 51.1% की मजबूत वृद्धि दर्ज करता है। यह साफ दिखाता है कि 2025 का वर्ष VST के लिए लगातार सकारात्मक मोड़ लेकर आया है।

    इस YTD वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान फिर से पावर टिलर सेगमेंट का रहा है। अप्रैल–नवंबर 2025 में 33,582 पावर टिलर बेचे गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा था 21,012 यूनिट। यानी 59.8% की बेहतरीन वृद्धि—यह बताता है कि किसान पावर टिलर को खेती का “स्मार्ट साथी” मानते हुए इसे अपनाने में और तेजी दिखा रहे हैं।

    वहीं दूसरी ओर, ट्रैक्टर सेगमेंट में भले ही आक्रामक वृद्धि नहीं दिखी, लेकिन बाजार में कंपनी की मौजूदगी स्थिर बनी रही। अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान 3,653 ट्रैक्टर बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 3,626 यूनिट थी। इस आधार पर 0.7% की मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत है कि छोटे ट्रैक्टर सेगमेंट में भी मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।


    क्यों बढ़ रही है VST की बाजार पकड़?

    कृषि मशीनरी की दुनिया में इस साल जिस नाम ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं, वह है VST Tillers & Tractors। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:

    • विश्वसनीय और किफायती मशीनें: VST की मशीनें छोटे और मध्यम किसानों के लिए बजट-अनुकूल विकल्प बनती जा रही हैं।
    • उच्च दक्षता वाले पावर टिलर: इस सेगमेंट में VST पहले से ही भारतीय बाजार में अग्रणी रहा है और 2025 में इसकी पकड़ और मजबूत हुई है।
    • बदलता ग्रामीण बाजार: खेती में आधुनिक उपकरणों की मांग बढ़ रही है, जिससे पावर टिलर जैसी मशीनों की बिक्री में तेज उछाल आया है।
    • ब्रांड पर भरोसा: कंपनी की लंबी विरासत और सर्विस नेटवर्क भी बिक्री बढ़ने का प्रमुख कारण है।

    2025 VST के लिए साबित हुआ शानदार साल

    नवंबर के प्रदर्शन और YTD आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो यह साफ है कि 2025 VST के लिए सुनहरा अध्याय लिख रहा है। 145.6% की पावर टिलर ग्रोथ, 41.2% की ट्रैक्टर ग्रोथ, और 51.1% की YTD वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी भविष्य के लिए मजबूत तैयारी कर चुकी है।
    किसानों में बढ़ रहा विश्वास और कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ती मैकेनाइजेशन की लहर आने वाले महीनों में भी VST की बिक्री को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।

    यह रिपोर्ट न केवल कंपनी की सफलता की कहानी बताती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारतीय कृषि आज तकनीक को तेजी से अपना रही है—और VST इस बदलाव के केंद्र में खड़ा है। 

  • एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% ग्रोथ

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% ग्रोथ

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में जबरदस्त उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% की ग्रोथ

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में उछाल, नवंबर 2025 में 17.9% ग्रोथ



    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने नवंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री के क्षेत्र में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया है जिसने पूरे कृषि मशीनरी उद्योग में उत्साह भर दिया है। कंपनी के एग्री मशीनरी बिजनेस ने इस महीने कुल 10,580 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज कर अपनी बाजार पकड़ को और मजबूत किया है। पिछले वर्ष नवंबर 2024 में 8,974 यूनिट्स की तुलना में यह 17.9% की प्रभावशाली बढ़त है। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय ट्रैक्टर बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों का भरोसा आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर तेजी से झुक रहा है।

    इस महीने घरेलू बिक्री का प्रदर्शन भी उतना ही मजबूत रहा। कंपनी ने भारतीय बाजार में 10,122 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो नवंबर 2024 के 8,730 यूनिट्स से बढ़कर 15.9% हो गई। किसानों के बीच कृषि मशीनीकरण को लेकर बढ़ती जागरूकता और सरकार द्वारा मशीनरी पर GST में कटौती, सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों ने ट्रैक्टर खरीद को और भी सुलभ बनाया है। इससे रिटेल बिक्री में उल्लेखनीय तेजी आई है, जो कंपनी के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    नवंबर 2025 का महीना एस्कॉर्ट्स कुबोटा के लिए रिटेल स्तर पर भी बेहद सफल रहा। खरीफ सीजन की कटाई के समाप्त होते ही रबी फसल की बुवाई की शुरुआत ने कृषि गतिविधियों में तेजी लाई। खेतों में बढ़ती जरूरतों ने ट्रैक्टर मांग को मजबूत बनाए रखा। इसके अलावा, पिछले वर्ष के बेहतर जलाशय स्तरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित की, जिससे किसान फसल चक्र को आसानी से आगे बढ़ा सके और इस सुचारू स्थिति ने बिक्री को अतिरिक्त बल दिया। कंपनी का मानना है कि वित्त वर्ष के आगामी महीनों में भी यह रुझान कायम रहने की पूरी संभावना है।

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा का निर्यात प्रदर्शन इस वर्ष विशेष ध्यान आकर्षित करता है। कंपनी ने नवंबर 2025 में 458 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 244 थी। यानी 87.7% की ऐतिहासिक छलांग। यह न सिर्फ कंपनी की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय ट्रैक्टर टेक्नोलॉजी दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। उच्च गुणवत्ता, टिकाऊपन और तकनीकी नवाचारों की वजह से कंपनी के उत्पाद कई देशों में महत्वपूर्ण पसंद बनते जा रहे हैं।

    अप्रैल से नवंबर 2025 (FY26) तक की कुल बिक्री रिपोर्ट पर नजर डालें तो कंपनी का प्रदर्शन और अधिक मजबूती से उभरकर आता है। इन आठ महीनों के दौरान एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने मिलाकर 93,836 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष FY25 की इसी अवधि के 83,449 ट्रैक्टरों की तुलना में 12.4% अधिक है। घरेलू बिक्री में कंपनी ने 89,722 यूनिट्स बेचे, जबकि पिछला आंकड़ा 80,746 था, यानी 11.1% की वृद्धि। वहीं निर्यात क्षेत्र में कंपनी ने 4,114 ट्रैक्टर भेजे, जो 2,703 की तुलना में 52.2% ज्यादा है। ये आँकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि कंपनी घरेलू और वैश्विक दोनों ही मोर्चों पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड को इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में आठ दशकों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। कंपनी कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट तकनीक वाली मशीनों के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रही है। उसके दो प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र—एग्री मशीनरी बिजनेस और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट बिजनेस—तेजी से विकसित हो रहे भारतीय कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों को नई दिशा दे रहे हैं। कंपनी की प्रतिबद्धता उच्च गुणवत्ता, लागत-प्रभावशीलता, नवाचार और बाजार की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने पर केंद्रित है।

    आज के प्रतिस्पर्धी कृषि बाजार में किसानों की जरूरतें और प्राथमिकताएँ लगातार बदल रही हैं। ईंधन-कुशल, तकनीकी रूप से उन्नत और टिकाऊ ट्रैक्टरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा अपने विस्तृत उत्पाद पोर्टफोलियो के माध्यम से किसानों को ऐसे ट्रैक्टर उपलब्ध करा रही है, जो न केवल उनकी कृषि उत्पादकता बढ़ाते हैं, बल्कि कम लागत में बेहतर संचालन का भी भरोसा देते हैं। यही कारण है कि कंपनी की ब्रांड वैल्यू ग्रामीण बाजारों में दिन-ब-दिन बढ़ रही है।

    नवंबर 2025 की बिक्री रिपोर्ट कंपनी के लिए न सिर्फ उपलब्धि है, बल्कि आने वाले समय की संभावनाओं का संकेत भी है। भारतीय ट्रैक्टर उद्योग, आधुनिक कृषि तकनीकों के बढ़ते उपयोग, ग्रामीण आय में वृद्धि, सरकारी प्रोत्साहन और उभरते निर्यात बाजारों की वजह से लगातार विस्तार कर रहा है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा इस वृद्धि लहर का लाभ उठाते हुए उद्योग में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी यह उम्मीद जता रही है कि आने वाले महीनों में भी मांग स्थिर बनी रहेगी और बिक्री में निरंतर वृद्धि दर्ज की जाएगी।