Category: Sarkari Yojana News

  • केंद्रीय गृह मंत्री व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रोहतक में ₹350 करोड़ का साबर डेयरी प्लांट उद्घाटन किया

    केंद्रीय गृह मंत्री व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रोहतक में ₹350 करोड़ का साबर डेयरी प्लांट उद्घाटन किया

    गृहमंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने हरियाणा के रोहतक में ₹350 करोड़ की लागत से बने साबर डेयरी प्लांट का उद्घाटन किया

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता आंदोलन को मिल रही नई गति, वर्ष 2029 तक देश के हर पंचायत में होगी एक सहकारी समिति

    केंद्रीय गृह मंत्री व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रोहतक में ₹350 करोड़ का साबर डेयरी प्लांट उद्घाटन किया


    रोहतक (हरियाणा), अक्टूबर 2025:

    केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक साबर डेयरी प्लांट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्यमंत्री (सहकारिता) श्री कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय मंत्री श्री राव इंदरजीत सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह प्लांट देश के डेयरी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

    सहकारिता मंत्रालय ने किसानों की दशकों पुरानी मांग को किया पूरा

    अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के किसानों की दशकों पुरानी मांग को पूरा करते हुए एक अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की, जो किसानों, दुग्ध उत्पादकों और सहकारी संस्थाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश में सहकारी ढांचे की नींव को मजबूत किया है। श्री शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2029 तक भारत के हर पंचायत में एक सहकारी समिति स्थापित होगी, जिससे गांव-गांव में आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मार्ग खुलेगा।


    350 करोड़ की लागत से बना देश का सबसे बड़ा डेयरी प्लांट

    श्री शाह ने बताया कि साबर डेयरी ने 350 करोड़ रुपये की लागत से देश का सबसे बड़ा दही, योगर्ट, छाछ और मिठाई उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है। यह प्लांट प्रतिदिन 150 मीट्रिक टन दही, 10 मीट्रिक टन योगर्ट, 3 लाख लीटर छाछ और 10,000 किलोग्राम मिठाइयों का उत्पादन करेगा। उन्होंने कहा कि यह संयंत्र न केवल हरियाणा बल्कि दिल्ली–एनसीआर क्षेत्र की डेयरी उत्पादों की मांग को भी पूरा करेगा।

    साबर डेयरी की स्थापना गुजरात के साबरकांठा जिले में हुई थी और आज यह सहकारी मॉडल देशभर में सफल उदाहरण बन चुका है। वर्तमान में साबर डेयरी 9 राज्यों के लाखों दूध उत्पादक किसानों को जोड़ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। गुजरात के त्रिभुवन भाई, भूरा भाई और गल्बा भाई जैसे किसानों ने सहकारिता की इस नींव को रखा था। आज गुजरात में 35 लाख महिलाएँ डेयरी सहकारिता के माध्यम से ₹85,000 करोड़ का वार्षिक व्यवसाय कर रही हैं।


    डेयरी क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीक और नवाचार की जरूरत

    केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अमूल और साबर डेयरी ने मिलकर गुजरात में डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे एम्ब्रियो ट्रांसफर और सेक्स डिटरमिनेशन पर उल्लेखनीय वैज्ञानिक कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा सरकार से आग्रह किया कि इन आधुनिक तकनीकों को राज्य के पशुपालकों तक पहुँचाया जाए, ताकि दूध उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही श्री शाह ने कहा कि हरियाणा में मधुमक्खी पालन, जैविक खेती और बायोगैस उत्पादन जैसे नवाचारों को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि गुजरात में बायोगैस के कई सफल प्रयोग किए गए हैं, जिन्हें हरियाणा में भी अपनाया जा सकता है।


    डेयरी क्षेत्र में 70% की वृद्धि, भारत बना विश्व का अग्रणी दूध उत्पादक

    श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में भारत का डेयरी क्षेत्र 70 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जिससे यह विश्व का सबसे तेजी से विकसित होने वाला डेयरी सेक्टर बन गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में भारत में दुग्ध उत्पादक पशुओं की संख्या 8.6 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 11.2 करोड़ हो गई है। दूध उत्पादन 146 मिलियन टन से बढ़कर 239 मिलियन टन तक पहुंच गया है। देशी नस्लों से दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है—यह अब 29 मिलियन टन से बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुँच गया है।


    8 करोड़ किसान जुड़े डेयरी क्षेत्र से

    श्री शाह ने बताया कि आज भारत में 8 करोड़ किसान डेयरी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, जो न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण भारत की रीढ़ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप देश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 124 ग्राम से बढ़कर 471 ग्राम प्रतिदिन हो गई है।


    हरियाणा बना डेयरी उत्पादन में अग्रणी राज्य

    श्री अमित शाह ने हरियाणा की सराहना करते हुए कहा कि दूध उत्पादन में यह राज्य हमेशा देश में पहले तीन स्थानों में रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के परिणामस्वरूप भारत आज गर्व के साथ विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश के रूप में खड़ा है।


    श्वेत क्रांति 2.0 से जुड़े 75,000 नई डेयरी समितियाँ

    श्री शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत देशभर में 75,000 नई डेयरी समितियाँ स्थापित की जाएंगी, जबकि 46,000 मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों को सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान दूध प्रसंस्करण क्षमता 66 मिलियन लीटर प्रतिदिन है, जिसे वर्ष 2028–29 तक बढ़ाकर 100 मिलियन लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य पूरा होने पर किसानों, विशेषकर माताओं और बहनों की आय में कई गुना वृद्धि होगी


    पशुपालन क्षेत्र में नई सहकारी समितियाँ और योजनाएँ

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मोदी सरकार ने हाल ही में तीन राष्ट्रीय सहकारी समितियों की स्थापना की है—एक पशु आहार उत्पादन के लिए, दूसरी जैविक खाद प्रबंधन के लिए और तीसरी मृत पशुओं के अवशेषों के उपयोग के लिए। इसके अलावा राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, पशुधन अवसंरचना विकास निधि और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम जैसे मिशन देश के हर हिस्से में तेजी से चल रहे हैं।


    आत्मनिर्भर डेयरी क्षेत्र की ओर भारत का सफर

    श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब डेयरी प्लांट निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने डेयरी प्लांट निर्माण और अनुसंधान एवं विकास की गति को तीन गुना बढ़ा दिया है, ताकि भारत निकट भविष्य में डेयरी उद्योग में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।

    उन्होंने विश्वास जताया कि रोहतक का यह आधुनिक साबर डेयरी प्लांट न केवल हरियाणा बल्कि पूरे उत्तर भारत के दूध उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनेगा। यह संयंत्र प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “समृद्ध किसान, समृद्ध भारत” के संकल्प को साकार करेगा।


    मुख्य विशेषताएँ:

    • ₹350 करोड़ की लागत से तैयार देश का सबसे बड़ा डेयरी प्लांट
    • प्रतिदिन 150 MT दही, 10 MT योगर्ट, 3 लाख लीटर छाछ और 10,000 किलो मिठाइयों का उत्पादन
    • 9 राज्यों के लाखों किसान जुड़े साबर डेयरी से
    • 8 करोड़ किसान डेयरी क्षेत्र में सक्रिय
    • 70% वृद्धि दर के साथ भारत विश्व का अग्रणी डेयरी उत्पादक देश
    • 2029 तक हर पंचायत में एक सहकारी समिति
    • 75,000 नई डेयरी समितियाँ और 46,000 समितियों को सशक्त करने की योजना
    • दूध प्रोसेसिंग क्षमता 100 मिलियन लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य

    अस्वीकरण: यह जानकारी द्वितीयक शोध के माध्यम से एकत्र की गई है और landlevellers इसमें किसी भी त्रुटि के लिए जिम्मेदार नहीं है।

  • PM Modi ने 62,000 करोड़ की योजना से युवाओं को दी नई उड़ान | PM-SETU Launch

    PM Modi ने 62,000 करोड़ की योजना से युवाओं को दी नई उड़ान | PM-SETU Launch

     प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की युवा-केंद्रित पहलों का शुभारंभ करते हुए कौशल दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

    भारत ज्ञान और कौशल का देश है, यह बौद्धिक शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है : प्रधानमंत्री मोदी

    आईटीआई आत्मनिर्भर भारत की कार्यशालाएं हैं, पीएम-सेतु योजना युवाओं को वैश्विक कौशल मांगों से जोड़ेगी

    PM Modi ने 62,000 करोड़ की योजना से युवाओं को दी नई उड़ान | PM-SETU Launch


    नई दिल्ली, 4 अक्टूबर 2025 — प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कौशल दीक्षांत समारोह के अवसर पर 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न युवा-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की शुरुआत की, जो भारत के युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

    कार्यक्रम में देश भर के आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों) के लाखों छात्रों और बिहार के युवाओं एवं शिक्षकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रूप से भाग लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समारोह भारत द्वारा कौशल विकास को दी जाने वाली प्राथमिकता का प्रतीक है और युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने वाला है।


    पीएम-सेतु योजना: कौशल और रोजगार परिवर्तन की नई राह

    प्रधानमंत्री ने 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से शुरू की गई प्रधानमंत्री कौशल एवं रोजगार परिवर्तन (PM-SETU) योजना का शुभारंभ किया। यह योजना देश भर में 1,000 सरकारी आईटीआई संस्थानों को हब एंड स्पोक मॉडल में अपग्रेड करने का लक्ष्य रखती है। इसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे, जो आधुनिक ट्रेडों, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, इनक्यूबेशन सुविधाओं और उन्नत प्रशिक्षण साधनों से लैस होंगे।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि “पीएम-सेतु योजना भारतीय युवाओं को वैश्विक कौशल मांगों से भी जोड़ेगी” और यह सुनिश्चित करेगी कि आईटीआई नेटवर्क न केवल वर्तमान उद्योग आवश्यकताओं को पूरा करे बल्कि अगले दस वर्षों में भविष्य की मांगों का भी अनुमान लगा सके।

    योजना के प्रथम चरण में पटना और दरभंगा के आईटीआई को विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। हब आईटीआई में नवाचार केंद्र, प्रशिक्षक प्रशिक्षण सुविधाएं, उत्पादन इकाइयां और प्लेसमेंट सेवाएं भी होंगी, जिससे युवाओं को उद्योग से सीधा लाभ मिलेगा।


    1,200 कौशल प्रयोगशालाओं का उद्घाटन

    प्रधानमंत्री ने देश भर में स्थापित 1,200 व्यावसायिक कौशल प्रयोगशालाओं का भी उद्घाटन किया। ये प्रयोगशालाएँ 400 नवोदय विद्यालयों और 200 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित की गई हैं।

    इन प्रयोगशालाओं का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को आईटी, ऑटोमोटिव, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे 12 उच्च मांग वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस परियोजना में 1,200 व्यावसायिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि छात्रों को उद्योग-प्रासंगिक शिक्षा प्राप्त हो सके।


    बिहार के लिए विशेष विकास पहलें

    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने बिहार के युवाओं के लिए कई परिवर्तनकारी योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि “बिहार के युवाओं की ताकत राष्ट्र की मजबूती है” और राज्य में हो रहे बदलाव पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।

    प्रधानमंत्री ने बिहार की पुनर्निर्मित मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत हर वर्ष लगभग 5 लाख स्नातक युवाओं को दो वर्ष के लिए ₹1,000 मासिक भत्ता और निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    उन्होंने पुनः डिज़ाइन की गई बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का भी शुभारंभ किया, जिसके तहत छात्रों को 4 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण मिलेंगे। अब तक 3.92 लाख छात्रों को इस योजना से ₹7,880 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण प्रदान किए जा चुके हैं।

    युवाओं के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने बिहार युवा आयोग का भी उद्घाटन किया, जो 18 से 45 वर्ष के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए नीतिगत दिशा प्रदान करेगा।

    इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बिहार में जन नायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया, जो उद्योग उन्मुख पाठ्यक्रमों और व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय “कर्पूरी ठाकुर जी के समाज सेवा और शिक्षा समर्पण के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।”


    उच्च शिक्षा और तकनीकी अवसंरचना को नई उड़ान

    प्रधानमंत्री ने पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के अंतर्गत बिहार के चार विश्वविद्यालयों — पटना विश्वविद्यालय, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (मधेपुरा), जय प्रकाश विश्वविद्यालय (छपरा) और नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय (पटना) — में नई शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाओं की आधारशिला रखी।

    ₹160 करोड़ की लागत से विकसित हो रही ये परियोजनाएँ 27,000 से अधिक छात्रों को लाभान्वित करेंगी। इन विश्वविद्यालयों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, छात्रावास, और बहुविषयक शिक्षण अवसंरचना विकसित की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने एनआईटी पटना के बिहटा परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया। 6,500 छात्रों की क्षमता वाले इस आधुनिक परिसर में 5G उपयोग केस लैब, इसरो के सहयोग से क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षणिक केंद्र, और नवाचार एवं इनक्यूबेशन केंद्र जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जो पहले ही 9 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान कर चुका है।


    रोजगार और छात्रवृत्ति वितरण

    प्रधानमंत्री ने बिहार सरकार के 4,000 से अधिक नवनियुक्त उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री बालक/बालिका छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत कक्षा 9 और 10 के 25 लाख विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से ₹450 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री विकासशील भारत रोजगार योजना (₹1 लाख करोड़) जैसी पहलों से युवाओं के लिए रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों का विस्तार किया है, जिससे लगभग 3.5 करोड़ युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।


    प्रधानमंत्री का संदेश: “कौशल, नवाचार और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं”

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का युवा आज अवसरों से भरे दौर में है, और देश की प्रगति का असली इंजन यही युवा शक्ति है। उन्होंने कहा कि “कौशल और ज्ञान जब राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जुड़ते हैं, तो उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।”

    उन्होंने गर्व से कहा कि देश के आईटीआई संस्थान न केवल औद्योगिक शिक्षा के केंद्र हैं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की कार्यशालाएं हैं। वर्ष 2014 तक देश में जहाँ 10,000 आईटीआई थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 15,000 से अधिक हो चुकी है। पिछले 11 वर्षों में 1.5 करोड़ से अधिक युवाओं ने आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और संकल्प ही “विकसित भारत” की नींव हैं और हर युवा को इस दिशा में योगदान देना चाहिए।


    कार्यक्रम में शामिल प्रमुख हस्तियाँ

    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम, श्री राजीव रंजन सिंह, श्री सुकांत मजूमदार और अन्य गणमान्य व्यक्ति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।


    निष्कर्ष

    प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई ये युवा-केंद्रित पहलें देश में शिक्षा, कौशल विकास, उच्चतर शिक्षा, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन को एकीकृत करती हैं। बिहार पर विशेष ध्यान के साथ, ये योजनाएँ राज्य को कुशल जनशक्ति के केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

    अस्वीकरण: यह जानकारी द्वितीयक शोध के माध्यम से एकत्र की गई है और landlevellers इसमें किसी भी त्रुटि के लिए जिम्मेदार नहीं है।

  • किसानों को बड़ी राहत, सरकार ने 653 करोड़ मुआवजा दिया

    किसानों को बड़ी राहत, सरकार ने 653 करोड़ मुआवजा दिया

    अन्नदाता के चेहरों की मुस्कान लाना ही हमारी असली दीपावली है : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव । मध्यप्रदेश राज्य के 13 जिलों  8.84 लाख किसानों को 653.34 करोड़ रुपये की मदद राशि सिंगल क्लिक से खातों में अंतरित

    किसानों को बड़ी राहत, सरकार ने 653 करोड़ मुआवजा दिया

    किसानों को पीला मोजेक से हुए नुकसान का पहली बार मिला सोयाबीन में मुआवजा।भोपाल, 4 अक्टूबर 2025।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “किसानों की सेवा ही सच्ची सेवा है, किसानों के  चेहरे की मुस्कान ही हमारी असली दीपावली है।” उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर दुख की घड़ी में किसानों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी है। कोई भी प्राकृतिक आपदा, कीट प्रकोप या बाढ़ हो — राज्य सरकार किसानों का साथ कभी नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रहे थे।


    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के 13 जिलों के 8 लाख 84 हजार 772 किसानों को कुल 653.34 करोड़ रुपये की राहत राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे बैंक खातों में अंतरित की। इस राशि में अतिवृष्टि/बाढ़ से प्रभावित 3,90,167 किसानों को 331.34 करोड़ रुपये तथा पीला मोजेक/कीट व्याधि से प्रभावित 4,94,605 किसानों को 322 करोड़ रुपये की सहायता राशि शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राहत सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि किसानों की आशा और आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करने का प्रतीक है।

    🌾 किसानों के लिए बड़ी राहत — पहली बार पीला मोजेक मुआवजा


    प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने सोयाबीन में पीले मोजेक रोग से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया है। इस निर्णय से किसानों में नई उम्मीद और भरोसा जगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत और जज्बा प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

    उन्होंने कहा — “किसानों पर जब कोई संकट आता है, तो सरकार का धर्म है कि वह उनके साथ खड़ी हो। जब तक आखिरी किसान को सहायता नहीं मिल जाती, हमारी सरकार चैन से नहीं बैठेगी।”


    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और कीट प्रकोप से प्रभावित किसानों के लिए राहत राशि का वितरण पूरी पारदर्शिता से किया जा रहा है। किसानों के चेहरे पर खुशी लौटाना हमारी पहली प्राथमिकता है।

    🌱 खोई मुस्कान लौटाना हमारी प्राथमिकता


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते कुछ माहों में अतिवृष्टि और कीट प्रकोप ने प्रदेश के कई जिलों में किसानों को गहरी चोट पहुंचाई। उनकी मेहनत से उगी फसलें नष्ट हो गईं। लेकिन आज उन्हें राहत की यह राशि देकर सरकार ने यह साबित किया है कि किसान अकेला नहीं है।

    उन्होंने कहा — “किसानों के माथे का पसीना कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। आपकी मेहनत ही प्रदेश को हरियाली और समृद्धि से भर देगी।”


    मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों के लिए भी 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 6.69 लाख किसानों के खाते में 337 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की गई है। इसके अलावा, सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना भी शुरू की गई है ताकि एमएसपी से कम मूल्य मिलने पर नुकसान की भरपाई की जा सके।

    💧 भावांतर योजना से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आज से ही सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना में पंजीयन प्रारंभ हो गया है।

    अब यदि किसान अपनी सोयाबीन एमएसपी से कम मूल्य पर बेचते हैं, तो विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर की राशि अगले 15 दिनों में सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार की स्थिति को देखते हुए इस बार सोयाबीन का अच्छा भाव मिलने की संभावना है।

    इस वर्ष सोयाबीन की एमएसपी 5328 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो पिछले वर्ष से 500 रुपये अधिक है।

    🌿 3.90 लाख किसानों को 371 करोड़ की राहत, पीला मोजेक से प्रभावित किसानों को 282 करोड़ की सहायता

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित 3.90 लाख किसानों को 371 करोड़ रुपये की राहत राशि दी गई है, जबकि पीला मोजेक रोग से प्रभावित किसानों को 282 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।

    इस सहायता राशि से किसानों के लिए खाद-बीज की खरीद आसान हो गई है और वे आगामी रबी सीजन की तैयारी कर सकेंगे।

    🪔 “आपने दीपावली से पहले ही हमारी दीपावली मना दी” – किसानों ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों से संवाद भी किया। किसानों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा —

    “मुख्यमंत्री जी, आपने दीपावली से पहले ही हमारी दीपावली मना दी। पहली बार हमें पीला मोजेक से हुए नुकसान की भरपाई मिली है। यह किसान हितैषी सरकार का प्रमाण है।”


    मुख्यमंत्री ने किसानों को बधाई देते हुए कहा कि यह राहत राशि सिर्फ सहायता नहीं बल्कि प्रदेश के कृषि तंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा — “राज्य सरकार किसानों के सुख-दुख में सदैव सहभागी रहेगी। किसानों की खुशी ही प्रदेश की खुशी है।”

    📍 जिलावार राहत राशि का विवरण

    राज्य के विभिन्न जिलों में राहत राशि का वितरण इस प्रकार किया गया —


    रतलाम जिला: 213.04 करोड़ रुपये राहत राशि, जिससे हजारों किसानों को राहत मिली।


    नीमच जिला: 119.06 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि।


    मंदसौर जिला: 267.30 करोड़ रुपये की सहायता राशि, जिससे सोयाबीन उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ हुआ।


    उज्जैन जिला: 44 लाख रुपये की राशि — किसानों ने कहा कि फसल कटने से पहले ही सरकार ने मदद की।


    विदिशा जिला: 62 लाख रुपये राहत राशि, जिससे बारिश से प्रभावित किसानों को राहत मिली।


    बुरहानपुर जिला: केला उत्पादक किसानों को 3.39 करोड़ रुपये मुआवजा, प्रति हेक्टेयर लगभग 2 लाख रुपये की राहत।


    शहडोल जिला: 8935 सोयाबीन उत्पादक किसानों को 6.36 करोड़ रुपये की सहायता।


    खंडवा जिला: अतिवृष्टि और पीला मोजेक से प्रभावित किसानों को 55 लाख रुपये की राहत।


    बड़वानी जिला: 662 किसानों को 37 लाख रुपये मुआवजा राशि।


    दमोह जिला: मक्का उत्पादक किसानों को 56 लाख रुपये की राहत राशि।


    अलीराजपुर जिला: 49,000 किसानों को 41.55 करोड़ रुपये का मुआवजा।


    मंडला जिला: धान और मक्का उत्पादक किसानों को 53 हजार रुपये की सहायता।


    सिवनी जिला: मकान ढहने से प्रभावित किसान को 92 हजार रुपये की राहत राशि।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष जिलों में सर्वेक्षण कार्य तेजी से जारी है और सर्वे पूरा होते ही सभी पात्र किसानों को सहायता राशि दी जाएगी।

    🌼 मुख्यमंत्री ने जताई संवेदना और कहा – सरकार हमेशा आपके साथ है


    मुख्यमंत्री ने राहत राशि वितरण के दौरान खंडवा जिले में हुए हादसे पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में अब तक राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को कुल 229.45 करोड़ रुपये की सहायता राशि विभिन्न मदों में दी जा चुकी है।


    डॉ. यादव ने कहा कि “यह सरकार किसानों की सरकार है। हम किसानों का कोई भी नुकसान नहीं होने देंगे। आपकी फसल, आपकी मेहनत और आपका सम्मान – सबकी रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

    🌾 किसान ही प्रदेश की समृद्धि की नींव


    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास का असली आधार किसान हैं। उनकी मेहनत से ही खेतों में हरियाली और प्रदेश में समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव कदम किसानों की भलाई और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठा रही है।

    उन्होंने कहा — “हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश का हर किसान आत्मनिर्भर, समृद्ध और खुशहाल बने। किसानों की मुस्कान लौटाना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि और सच्ची दीवाली है।”

  • PM Ujjwala Yojana: 25 लाख नए फ्री कनेक्शन, अब 10.60 करोड़ परिवार

    PM Ujjwala Yojana: 25 लाख नए फ्री कनेक्शन, अब 10.60 करोड़ परिवार

    उज्ज्वला परिवार का विस्तार – नारी शक्ति को मिला बड़ा उपहार

    PM Ujjwala Yojana: 25 लाख नए फ्री कनेक्शन, अब 10.60 करोड़ परिवार


    भारत सरकार ने नवरात्रि के पावन अवसर पर माताओं और बहनों के सम्मान एवं सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देशभर की महिलाओं को नवरात्रि का विशेष उपहार देते हुए निःशुल्क 25 लाख नए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala) कनेक्शन प्रदान करने की घोषणा की है। इस घोषणा के साथ ही उज्ज्वला परिवार का विस्तार अब 10 करोड़ 60 लाख (10.60 करोड़) लाभार्थी परिवारों तक पहुँच जाएगा। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह देश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में आई एक ऐतिहासिक परिवर्तन और सामाजिक क्रांति का प्रतीक है।


    योजना का उद्देश्य और सामाजिक महत्व

    भारतीय संस्कृति में नारी को ‘शक्ति’ का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है, जो स्त्री शक्ति और उसके विभिन्न आयामों का प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी का यह निर्णय भी इसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है। उज्ज्वला योजना ने ग्रामीण भारत की माताओं-बहनों को धुएँ से आज़ादी दिलाकर न केवल उनके स्वास्थ्य की रक्षा की है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी बढ़ाया है।

    आज से कुछ वर्ष पहले तक देश के लाखों परिवार पारंपरिक चूल्हों पर खाना पकाने को मजबूर थे। लकड़ी, उपले और कोयले के धुएँ से महिलाओं की आँखों में जलन, फेफड़ों में बीमारी और समय की बर्बादी होती थी। उज्ज्वला योजना ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। अब रसोई में धुआँ नहीं, बल्कि मुस्कान है। अब आँखों में जलन नहीं, बल्कि खुशियों की चमक है। हाथों के छालों की जगह प्यार भरा स्वाद और सेहतमंद जीवन है।


    सरकार का निवेश और लाभ

    भारत सरकार प्रत्येक नए कनेक्शन पर लगभग ₹2,050 का खर्च कर रही है। इस राशि में लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, गैस चूल्हा और रेगुलेटर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही पहले से लागू ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी भी जारी रहेगी।

    आज उज्ज्वला परिवारों के लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमत केवल ₹553 में रिफिल हो जाती है, जो दुनियाभर के अधिकांश एलपीजी उत्पादक देशों की तुलना में भी कम है। यह कदम मोदी सरकार की संवेदनशीलता और महिलाओं की चिंता का प्रमाण है।


    आँकड़े जो बदलाव की कहानी कहते हैं

    • 10.60 करोड़ उज्ज्वला परिवार अब इस योजना के दायरे में होंगे।
    • 25 लाख नए कनेक्शन पूरी तरह निःशुल्क दिए जाएंगे।
    • हर कनेक्शन पर ₹2,050 का निवेश किया जाएगा।
    • उज्ज्वला परिवारों को सरकार की ₹300 की सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
    • एक उज्ज्वला परिवार केवल ₹553 में एलपीजी सिलेंडर रिफिल करा सकेगा।
    • अब तक देशभर के 10.33 करोड़ से अधिक परिवार इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।

    नवरात्रि से जुड़ा विशेष संदेश

    नवरात्रि के शुभारंभ पर यह घोषणा अपने आप में अत्यंत प्रतीकात्मक है। जिस प्रकार माँ दुर्गा नौ रूपों में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, उसी प्रकार उज्ज्वला योजना महिलाओं को हर रूप में शक्ति और सम्मान देती है।

    • यह उन्हें स्वास्थ्य की शक्ति देती है – क्योंकि धुएँ से होने वाली बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
    • यह उन्हें आर्थिक शक्ति देती है – क्योंकि अब समय बचता है, और महिलाएँ अन्य कार्यों में योगदान दे सकती हैं।
    • यह उन्हें सामाजिक सम्मान देती है – क्योंकि अब महिलाएँ गैस सिलेंडर के साथ स्वच्छ और आधुनिक रसोई की पहचान बन चुकी हैं।
    • यह उन्हें पारिवारिक शक्ति देती है – क्योंकि स्वच्छ रसोई पूरे परिवार की खुशहाली की नींव है।

    उज्ज्वला – सिर्फ रसोई नहीं, जीवन में उजाला

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना केवल एक रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज के जीवन को बदलने वाली पहल है।

    • स्वास्थ्य सुधार: धुएँ से होने वाली आँख, फेफड़े और हृदय संबंधी बीमारियों में भारी कमी आई है।
    • समय की बचत: लकड़ी और कोयले की तलाश में घंटों बर्बाद नहीं होते, जिससे महिलाएँ शिक्षा और रोजगार में अधिक समय दे पा रही हैं।
    • पर्यावरण संरक्षण: जंगलों से लकड़ी काटने की आवश्यकता कम हुई है, जिससे पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हो रही है।
    • महिला सशक्तिकरण: उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मसम्मान से जीने का अवसर दिया है।

    मोदी सरकार की नीयत – महिला सशक्तिकरण

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमेशा कहा है कि “नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है।” उज्ज्वला योजना उसी विचार का विस्तार है। आज जब पूरी दुनिया महिला सशक्तिकरण पर चर्चा कर रही है, तब भारत ने इस दिशा में एक ठोस उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    उज्ज्वला योजना ने साबित कर दिया है कि सरकार केवल योजनाएँ नहीं बना रही, बल्कि ग्रामीण भारत की महिलाओं के जीवन को वास्तविक रूप से बदल रही है।


    महिलाओं की भावनाओं से जुड़ा संदेश

    इस योजना से जुड़ी करोड़ों माताओं और बहनों की आवाज़ यही कहती है –

    • अब आँखों में जलन नहीं, बल्कि खुशियों की मुस्कुराहट है।
    • अब सांसों में धुंआ नहीं, बल्कि सेहत की खिलखिलाहट है।
    • अब हाथों में छाले नहीं, बल्कि प्यार भरा स्वाद है।

    यह भावनाएँ किसी आँकड़े से भी अधिक प्रभावी और सशक्त संदेश देती हैं।


    उज्ज्वला – सामाजिक क्रांति की मशाल

    उज्ज्वला योजना आज भारत की सबसे प्रभावशाली सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक बन चुकी है। यह केवल एलपीजी वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक ऐसी सामाजिक क्रांति की मशाल है जिसने ग्रामीण और शहरी, दोनों भारत में महिलाओं के जीवन को बदल दिया है।

    देश के कोने-कोने और सुदूर गाँवों तक इसकी पहुँच इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार का संकल्प केवल कागज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर इसे पूरी तरह उतारा गया है।

    अस्वीकरण: यह जानकारी द्वितीयक शोध के माध्यम से एकत्र की गई है और landlevellers इसमें किसी भी त्रुटि के लिए जिम्मेदार नहीं है।