Category: Sarkari Yojana News

  • सीएम का बड़ा संकेत: भावांतर योजना में शामिल हो सकती हैं नई फसलें, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

    सीएम का बड़ा संकेत: भावांतर योजना में शामिल हो सकती हैं नई फसलें, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

    भावांतर भुगतान योजना से किसानों को बड़ी राहत, सीएम के संकेत से सरसों और मूंगफली किसानों को भी जगी उम्मीद

    सीएम का बड़ा संकेत: भावांतर योजना में शामिल हो सकती हैं नई फसलें, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत


    मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। भावांतर भुगतान योजना के तहत सोयाबीन किसानों को अंतिम किस्त जारी करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब सरसों और मूंगफली किसानों में भी नई उम्मीद जगी है।

    सिंगल क्लिक से 200 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ से भावांतर भुगतान योजना की अंतिम किस्त का वितरण किया। इस दौरान 1 लाख 17 हजार से अधिक सोयाबीन किसानों के बैंक खातों में करीब 200 करोड़ रुपये की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की गई। यह भुगतान योजना की अंतिम किस्त मानी जा रही है, जिससे हजारों किसानों को सीधी आर्थिक राहत मिली है।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है। बाजार में कीमतें चाहे जैसी हों, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसान को नुकसान न उठाना पड़े।

    भावांतर भुगतान योजना का उद्देश्य क्या है

    भावांतर भुगतान योजना का मकसद किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाना है। मुख्यमंत्री ने अन्नदाता सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए बताया कि इस योजना के तहत यदि बाजार भाव तय न्यूनतम मूल्य से नीचे चला जाता है, तो सरकार अंतर की राशि सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर करती है।

    उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचते समय घाटे का डर नहीं रहता। सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

    अब तक लाखों किसानों को मिल चुका है लाभ

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, भावांतर भुगतान योजना की शुरुआत से अब तक 7 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को लगभग 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। यह आंकड़ा इस योजना की सफलता को दर्शाता है।

    मंदसौर जिले की बात करें तो यहां के 27 हजार से ज्यादा किसानों को करीब 43 करोड़ रुपये का लाभ मिला है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जिले के पांच किसानों को प्रतीकात्मक रूप से भावांतर भुगतान के चेक भी सौंपे।

    उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने सरकारी व्यवस्था के तहत भावांतर भुगतान योजना को लागू किया। खासकर सोयाबीन उत्पादक किसानों को इससे बड़ा फायदा हुआ है और उन्हें अपनी उपज का पूरा मूल्य मिला है।

    सरसों और मूंगफली को योजना में शामिल करने के संकेत

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए एक और बड़ी घोषणा का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में सरसों और मूंगफली को भी भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत लाने पर विचार कर रही है।

    यदि ऐसा होता है, तो इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को भी बाजार जोखिम से राहत मिलेगी और उन्हें उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह कदम प्रदेश के तिलहन किसानों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

    65 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

    किसानों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने मल्हारगढ़ क्षेत्र को विकास की बड़ी सौगात भी दी। कार्यक्रम के दौरान 65 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया।

    इनमें मंदसौर-नीमच स्टेट हाईवे पर चार लेन फ्लाईओवर, पिपलिया मंडी में रेलवे अंडरब्रिज, मल्हारगढ़ रेलवे स्टेशन से नारायणगढ़ मार्ग पर नवनिर्मित अंडरपास शामिल हैं। इन परियोजनाओं से यातायात सुविधाएं बेहतर होंगी और किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने पिपलिया मंडी में नए फ्लाईओवर, भुवानी माता मंदिर के जीर्णोद्धार और काका गाडगिल सागर डेम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की।

    2026 को घोषित किया गया ‘किसान कल्याण वर्ष’

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत किसानों को कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपनी उपज का मूल्यवर्धन कर अधिक आय अर्जित कर सकें।

    उन्होंने यह भी बताया कि अगले पांच वर्षों में प्रदेश में ढाई लाख नई नौकरियां सृजित की जाएंगी। साथ ही लाडली बहना योजना के तहत महिलाओं को मिल रही 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

    किसानों के लिए सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता

    मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार किसानों और ग्रामीण समाज के हित में लगातार काम करती रहेगी। भावांतर भुगतान योजना, विकास परियोजनाएं और किसान कल्याण वर्ष जैसे फैसले इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार अन्नदाता की समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

  • PM किसान योजना में बड़ा बदलाव? बजट 2026 से पहले किसानों को मिल सकता है बड़ा फायदा

    PM किसान योजना में बड़ा बदलाव? बजट 2026 से पहले किसानों को मिल सकता है बड़ा फायदा

     महंगाई की मार के बीच किसानों की बड़ी मांग, बजट 2026 में बढ़ सकती है पीएम किसान योजना की राशि?


    देश में लगातार बढ़ती महंगाई दर और खेती की लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में जब केंद्र सरकार 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश करने जा रही है, तब करोड़ों किसान एक बार फिर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों की प्रमुख मांग है कि मौजूदा 6000 रुपये सालाना सहायता राशि को बढ़ाकर 9000 या 10,000 रुपये किया जाए, ताकि खेती के बढ़ते खर्चों का कुछ बोझ कम हो सके।

    महंगाई बढ़ी, लेकिन पीएम किसान योजना की राशि वही

    जब पीएम किसान योजना की शुरुआत हुई थी, तब खेती की लागत आज की तुलना में काफी कम थी। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी के दाम बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। इसके बावजूद योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यही वजह है कि अब किसान संगठन और कृषि विशेषज्ञ सरकार से पीएम किसान योजना की राशि बढ़ाने की मांग तेज़ी से उठा रहे हैं।


    पीएम किसान सम्मान निधि योजना में अभी कितनी मिलती है सहायता

    वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को साल में तीन किस्तों में कुल 6000 रुपये दिए जाते हैं।

    • हर चार महीने में
    • 2000 रुपये प्रति किस्त
    • राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए बैंक खाते में

    यह मदद छोटे और सीमांत किसानों को खेती से जुड़ी दैनिक जरूरतों में सहयोग देती है, लेकिन बढ़ती लागत के सामने यह राशि अब अपर्याप्त मानी जा रही है।

    बजट 2026 से किसानों की मुख्य मांगें

    किसानों की नजरें इस बार केंद्रीय बजट 2026 पर टिकी हैं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

    • पीएम किसान योजना की राशि 6000 से बढ़ाकर 9000 या 10,000 रुपये करना
    • हर किस्त को 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करना
    • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा
    • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट बढ़ाना
    • सस्ते और आसान कृषि ऋण की व्यवस्था

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार राशि बढ़ाती है, तो इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा।


    क्यों जरूरी हो गई है पीएम किसान योजना में बढ़ोतरी

    पीएम किसान योजना की शुरुआत 2019 में हुई थी। उस समय महंगाई दर काफी नियंत्रित थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

    • खाद और उर्वरक महंगे
    • डीजल की कीमतों में इजाफा
    • मजदूरी दर में बढ़ोतरी
    • सिंचाई और मशीनरी खर्च बढ़ा

    किसानों का कहना है कि 6000 रुपये की सहायता अब केवल औपचारिक मदद बनकर रह गई है, जबकि वास्तविक जरूरतें कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में योजना की राशि बढ़ाना समय की मांग बन गई है।

    कब शुरू हुई थी पीएम किसान सम्मान निधि योजना

    पीएम किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा 1 फरवरी 2019 को अंतरिम बजट में की गई थी।

    • लाभ 1 दिसंबर 2018 से लागू माने गए
    • 24 फरवरी 2019 को इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया
    • उद्देश्य: छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा देना

    आज यह योजना देश की सबसे बड़ी डायरेक्ट इनकम सपोर्ट स्कीम मानी जाती है।


    क्या बजट 2026 में सरकार ले सकती है बड़ा फैसला?

    बजट से पहले जिस तरह से किसान संगठनों की आवाज़ तेज़ हुई है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस बार किसानों के लिए कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। यदि पीएम किसान योजना की राशि 9000 रुपये सालाना की जाती है, तो हर किस्त 3000 रुपये की हो सकती है। इससे किसानों को खेती के शुरुआती खर्च में सीधी मदद मिलेगी।

    हालांकि, सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बजट 2026 किसान-केंद्रित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त कब आएगी

    पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त दिसंबर में जारी की जा चुकी है। अब किसानों को 22वीं किस्त का इंतजार है।
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:

    • 22वीं किस्त फरवरी के अंतिम सप्ताह में आ सकती है
    • बजट के बाद जारी होने की संभावना
    • किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार किस्त की राशि बढ़ाई जा सकती है


    बजट 2026 पर टिकी हैं किसानों की निगाहें

    देश के करोड़ों किसान इस समय महंगाई और लागत के दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में पीएम किसान सम्मान निधि योजना में बढ़ोतरी उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि बजट 2026 में सरकार किसानों की इस लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करती है या नहीं।

    फिलहाल, किसान समुदाय की निगाहें बजट पर टिकी हैं और उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज़ को गंभीरता से सुना जाएगा।

  • बड़ी राहत! 450 रुपये में LPG सिलेंडर, खाते में आए 75.68 करोड़ रुपये

    बड़ी राहत! 450 रुपये में LPG सिलेंडर, खाते में आए 75.68 करोड़ रुपये

    राजस्थान में महिलाओं को बड़ी राहत: 75.68 करोड़ की सब्सिडी ट्रांसफर, 450 रुपए में मिल रहा एलपीजी गैस सिलेंडर

    गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों में बड़ी राहत! 450 रुपये में LPG कैसे मिल रहा है, सब्सिडी आई या नहीं—यहां चेक करें।


    महंगाई के इस दौर में राजस्थान सरकार ने आम परिवारों और खासकर महिलाओं को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के तहत राज्य सरकार ने एक बार फिर भारी भरकम राशि लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की है। करीब 30 लाख से ज्यादा गैस सिलेंडरों पर 75.68 करोड़ रुपए की सब्सिडी सीधे DBT के जरिए भेजी गई है, जिससे पात्र महिलाओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर मात्र 450 रुपए में उपलब्ध हो रहा है।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लागू यह योजना न सिर्फ आर्थिक राहत दे रही है, बल्कि महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है।


    क्या है मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना का उद्देश्य गरीब, मध्यम वर्ग और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती दर पर रसोई गैस उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत महिलाओं के नाम पर पंजीकृत एलपीजी कनेक्शन पर सब्सिडी दी जाती है।

    योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली अपनाई गई है। यानी पहले लाभार्थी महिला बाजार दर पर सिलेंडर रिफिल कराती है और बाद में सरकार द्वारा तय सब्सिडी राशि सीधे उसके बैंक खाते में भेज दी जाती है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं रहती।


    450 रुपए में गैस सिलेंडर कैसे मिलता है

    फिलहाल घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत जिले और डिलीवरी चार्ज के हिसाब से 900 से 950 रुपए या उससे अधिक हो सकती है। मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के तहत सरकार सिलेंडर की वास्तविक कीमत और 450 रुपए के बीच का अंतर सब्सिडी के रूप में देती है।

    उदाहरण के तौर पर:

    • अगर सिलेंडर की कीमत 950 रुपए है
    • लाभार्थी महिला 450 रुपए का भार उठाती है
    • शेष करीब 500 रुपए की राशि सरकार सब्सिडी के रूप में बैंक खाते में ट्रांसफर कर देती है

    इस तरह अंततः महिला को सिलेंडर सिर्फ 450 रुपए में ही पड़ता है।


    सिलेंडर रिफिल की राशि कैसे एडजस्ट होती है

    लाभार्थी को पहले सिलेंडर रिफिल के समय पूरी या आंशिक राशि चुकानी होती है। रिफिल की कीमत इंडियन ऑयल (Indane), भारत गैस (Bharat Gas) या एचपी गैस (HP Gas) के अनुसार तय होती है। इसके बाद कुछ ही दिनों में सरकार की ओर से तय सब्सिडी राशि खाते में वापस आ जाती है।

    यानी शुरुआत में खर्च भले ज्यादा दिखे, लेकिन DBT आने के बाद वास्तविक खर्च 450 रुपए तक सीमित रह जाता है।


    कैसे चेक करें गैस सब्सिडी आपके खाते में आई या नहीं

    अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके खाते में एलपीजी गैस सब्सिडी आई है या नहीं, तो इसके लिए कई आसान तरीके मौजूद हैं:

    • बैंक पासबुक में DBT एंट्री चेक करें
    • मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिए ट्रांजैक्शन देखें
    • अपनी गैस कंपनी (Indane, Bharat Gas, HP Gas) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सब्सिडी स्टेटस जांचें
    • आधार से लिंक बैंक खाते पर आने वाले SMS अलर्ट देखें
    • नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर जानकारी प्राप्त करें

    आमतौर पर सिलेंडर रिफिल के कुछ दिनों के भीतर सब्सिडी राशि खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।


    गैस सब्सिडी से महिलाओं और परिवारों को क्या फायदे

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना से महिलाओं और परिवारों को कई स्तर पर लाभ मिल रहा है:

    • रसोई का खर्च कम हो रहा है
    • महंगे गैस सिलेंडर का बोझ परिवार पर नहीं पड़ता
    • महिलाओं को लकड़ी, उपले या अन्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता
    • धुएं से होने वाली बीमारियों से राहत मिलती है, जिससे स्वास्थ्य बेहतर होता है
    • स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है

    यह योजना आर्थिक राहत के साथ-साथ सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़े फायदों को भी सुनिश्चित करती है।


    कौन ले सकता है इस योजना का लाभ

    इस योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो राज्य सरकार द्वारा तय पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं। आमतौर पर इसमें शामिल हैं:

    • उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन रखने वाली महिलाएं
    • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) से जुड़े परिवार
    • खाद्य सुरक्षा या अन्य पात्र श्रेणियों में शामिल लाभार्थी

    जरूरी है कि गैस कनेक्शन महिला के नाम पर हो और बैंक खाता आधार से लिंक हो।


    सरकार का उद्देश्य क्या है

    राज्य सरकार के अनुसार, यह योजना केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, हर घर तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना और जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

    30 लाख से ज्यादा सिलेंडरों पर सब्सिडी ट्रांसफर होना इस बात का प्रमाण है कि योजना का लाभ बड़े पैमाने पर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रहा है।

    कुल मिलाकर मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना राजस्थान की महिलाओं के लिए राहत, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बनती जा रही है। 450 रुपए में गैस सिलेंडर मिलने से न सिर्फ रसोई का खर्च घटा है, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक सशक्तिकरण को भी मजबूती मिली है। आने वाले समय में इस योजना से और ज्यादा परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।

  • मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना: 450 रुपये में सिलेंडर, 75.68 करोड़ DBT ट्रांसफर

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना: 450 रुपये में सिलेंडर, 75.68 करोड़ DBT ट्रांसफर

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना: 75.68 करोड़ की DBT, महिलाओं को 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना: 450 रुपये में सिलेंडर, 75.68 करोड़ DBT ट्रांसफर


    महंगाई के लगातार बढ़ते दबाव के बीच राजस्थान सरकार ने राज्य की महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के तहत सरकार ने एक बार फिर करोड़ों रुपये की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की है। इस ताजा भुगतान में करीब 30.10 लाख गैस सिलेंडरों पर 75.68 करोड़ रुपये की राशि DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई है।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चलाई जा रही इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पात्र महिलाओं को एलपीजी गैस सिलेंडर मात्र 450 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग दोगुनी है।


    क्या है मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना

    राजस्थान सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना गरीब, मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। योजना का फोकस खासतौर पर महिलाओं पर है, ताकि रसोई से जुड़ा खर्च कम हो और उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।

    इस योजना के तहत लाभार्थी महिला को पहले बाजार दर पर एलपीजी सिलेंडर रिफिल कराना होता है। इसके बाद सरकार द्वारा तय की गई सब्सिडी राशि सीधे महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती।


    450 रुपये में गैस सिलेंडर कैसे मिलता है

    वर्तमान समय में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 900 से 950 रुपये के बीच है। यह कीमत जिले, गैस एजेंसी और डिलीवरी चार्ज के अनुसार थोड़ी कम-ज्यादा हो सकती है।

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के तहत सरकार सिलेंडर की वास्तविक कीमत और 450 रुपये के बीच का अंतर सब्सिडी के रूप में देती है।
    उदाहरण के तौर पर:

    • यदि सिलेंडर की कीमत 950 रुपये है
    • लाभार्थी महिला 450 रुपये का भुगतान करती है
    • शेष लगभग 500 रुपये सरकार सब्सिडी के रूप में खाते में भेज देती है

    इस तरह अंत में सिलेंडर की प्रभावी लागत केवल 450 रुपये रह जाती है।


    सिलेंडर रिफिल की पूरी प्रक्रिया क्या है

    लाभार्थी महिला को इंडेन, भारत गैस या एचपी गैस एजेंसी से सिलेंडर रिफिल कराना होता है।
    रिफिल की कुल राशि आमतौर पर 900 रुपये से अधिक होती है। रिफिल के कुछ दिनों के भीतर सरकार द्वारा तय सब्सिडी राशि DBT के जरिए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।

    सरकार का प्रयास है कि सब्सिडी समय पर पहुंचे ताकि महिलाओं को आर्थिक परेशानी न हो।


    गैस सब्सिडी स्टेटस कैसे चेक करें

    अगर आप जानना चाहते हैं कि रसोई गैस सब्सिडी आपके खाते में आई या नहीं, तो इसके लिए कई आसान तरीके उपलब्ध हैं:

    • बैंक पासबुक या मोबाइल बैंकिंग ऐप में DBT एंट्री देखें
    • एलपीजी कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट (Indane, Bharat Gas, HP Gas) पर जाकर सब्सिडी स्टेटस चेक करें
    • आधार से लिंक बैंक खाते में आए SMS अलर्ट देखें
    • नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर जानकारी प्राप्त करें

    आमतौर पर सिलेंडर रिफिल के कुछ ही दिनों के भीतर सब्सिडी ट्रांसफर कर दी जाती है।


    इस योजना से महिलाओं को क्या फायदे मिल रहे हैं

    मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना से महिलाओं और परिवारों को कई स्तरों पर लाभ हो रहा है:

    • रसोई का मासिक खर्च कम हो रहा है
    • महंगे सिलेंडर का बोझ परिवारों पर नहीं पड़ता
    • महिलाओं को लकड़ी या कंडे जैसे पारंपरिक ईंधन से राहत मिलती है
    • स्वच्छ ईंधन से स्वास्थ्य में सुधार होता है
    • धुएं से होने वाली बीमारियों का खतरा कम होता है
    • पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है

    कौन ले सकता है योजना का लाभ

    इस योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है:

    • जिनके नाम से उज्ज्वला योजना का एलपीजी कनेक्शन है
    • या जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आती हैं
    • जिनका बैंक खाता आधार से लिंक है
    • जो राज्य सरकार की तय पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं

    सरकार समय-समय पर पात्रता सूची को अपडेट करती रहती है ताकि सही लाभार्थियों तक योजना पहुंचे।


    सरकार का उद्देश्य क्या है

    राज्य सरकार का कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, हर घर तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना और जीवन स्तर को बेहतर करना है।

    30 लाख से अधिक सिलेंडरों पर सब्सिडी ट्रांसफर होना इस बात का संकेत है कि योजना का लाभ बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंच रहा है। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना राजस्थान की महिलाओं के लिए राहत, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।

  • PM Awas Yojana Urban 2.0: यूपी के 2 लाख से ज्यादा लोगों को पहली किस्त, 2094 करोड़ जारी

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    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत राज्य के 2 लाख 9 हजार से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में 2094 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी गई है। यह राशि योजना की पहली किस्त के रूप में जारी की गई है, जिससे लाखों परिवारों के अपने पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में एक और कदम बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया राशि अंतरण

    लखनऊ में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत पहली किस्त जारी की। कार्यक्रम में उन्होंने न सिर्फ बटन दबाकर राशि ट्रांसफर की, बल्कि प्रदेशभर के लाभार्थियों से वर्चुअल संवाद भी किया। इस अवसर पर कई जिलों के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और योजना के प्रति आभार जताया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य केवल घर उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि शहरी गरीबों को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी आवास देना है, ताकि वे आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

    10 लाभार्थियों को मिले स्वीकृति पत्र

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत 10 लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र भी सौंपे। इसके साथ ही वाराणसी, अयोध्या, अलीगढ़, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट सहित कई जिलों के लाभार्थियों से संवाद कर यह जाना कि आवास मिलने से उनके जीवन में क्या बदलाव आए हैं।

    इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की और लाभार्थियों को शुभकामनाएं दीं।

    इन जिलों में सबसे ज्यादा लाभार्थियों को मिली पहली किस्त

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत प्रदेश के लगभग सभी जिलों के लाभार्थी शामिल हैं। गाजियाबाद, बरेली, लखनऊ, गोरखपुर, प्रतापगढ़, कुशीनगर, अयोध्या और बिजनौर जैसे जिलों में बड़ी संख्या में परिवारों को पहली किस्त का लाभ मिला है।

    विशेष रूप से गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरी जिलों में हजारों लाभार्थियों के खातों में एक साथ राशि पहुंचने से निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

    अगली किस्त कब और कितनी मिलेगी?

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना की किस्तों की पूरी जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि:

    • पहली किस्त: 1 लाख रुपए (जारी)
    • दूसरी किस्त: निर्माण कार्य के 75 प्रतिशत पूरा होने पर 1 लाख रुपए
    • अंतिम किस्त: आवास निर्माण पूर्ण होने पर 50 हजार रुपए

    इस प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत प्रत्येक लाभार्थी को कुल 2.50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

    2017 से अब तक लाखों को मिला पक्का घर

    मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2017 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश में 17.66 लाख शहरी परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। पहली किस्त जारी होने के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 19.75 लाख तक पहुंच गई है।

    यदि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर देखा जाए, तो प्रदेश में अब तक 60 लाख से अधिक परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है, जो अब बढ़कर 62 लाख से ज्यादा हो गया है।

    आवास के साथ मिल रहीं ये जरूरी सुविधाएं

    प्रधानमंत्री आवास योजना सिर्फ घर तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि हर लाभार्थी परिवार को:

    • शौचालय सुविधा
    • बिजली कनेक्शन
    • उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन
    • आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य कार्ड

    जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मिलें, ताकि परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

    प्रेरणादायक कहानियां: आवास से बदली जिंदगी

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किए। अयोध्या के एक अनुसूचित जाति परिवार ने आवास मिलने के बाद अपनी बचत से ई-रिक्शा खरीदा और अब नियमित आय अर्जित कर रहा है। वहीं सोनभद्र के एक परिवार ने योजना का लाभ मिलने के बाद भैंस खरीदकर दूध व्यवसाय शुरू किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

    फर्रुखाबाद में 3236 लाभार्थियों को मिला लाभ

    फर्रुखाबाद जिले के कलेक्ट्रेट सभागार फतेहगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में 3236 लाभार्थियों को पहली किस्त के प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसमें फर्रुखाबाद, कायमगंज, कमालगंज, नवाबगंज और शमशाबाद क्षेत्र के लाभार्थी शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि जिले में पहले चरण में ही 11,514 परिवारों को पक्का आवास मिल चुका है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 उत्तर प्रदेश के शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की नींव साबित हो रही है। पहली किस्त जारी होने के साथ ही लाखों परिवारों के सपनों को नई उड़ान मिली है और आने वाले समय में यह योजना राज्य में आवासीय विकास की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएगी।

    मैंने दिए गए कंटेंट को आधार बनाकर पूरी तरह नया, कॉपीराइट-सेफ और हाई-क्वालिटी हिंदी न्यूज़ आर्टिकल (~800 शब्द) कैनवास में तैयार कर दिया है।

  • महाराष्ट्र किसानों को बड़ी राहत: 17.29 लाख किसानों के कर्ज में बदलाव, 266 अरब रुपये का लोन रिस्ट्रक्चर

    महाराष्ट्र किसानों को बड़ी राहत: 17.29 लाख किसानों के कर्ज में बदलाव, 266 अरब रुपये का लोन रिस्ट्रक्चर

     महाराष्ट्र के किसानों के लिए केंद्र सरकार की बड़ी राहत: 17.29 लाख लोन खातों में बदलाव को हरी झंडी

    महाराष्ट्र किसानों को बड़ी राहत: 17.29 लाख किसानों के कर्ज में बदलाव, 266 अरब रुपये का लोन रिस्ट्रक्चर


    महाराष्ट्र में बीते महीनों के दौरान हुई भारी बारिश, बाढ़ और बेमौसम वर्षा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलें पूरी तरह नष्ट होने से लाखों किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने एक अहम और राहत भरा फैसला लेते हुए महाराष्ट्र के 17.29 लाख किसानों के फसल ऋण खातों में बदलाव (Loan Restructuring) को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत लगभग 266.58 अरब रुपये के कृषि ऋण को पुनर्गठित किया जाएगा, जिससे प्रभावित किसानों को तत्काल और दीर्घकालिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    किसानों के लिए क्यों जरूरी था यह फैसला

    महाराष्ट्र के कई जिलों में लगातार प्राकृतिक आपदाओं ने खेती को नुकसान पहुंचाया है। कहीं बाढ़ ने फसलें बहा दीं तो कहीं बेमौसम बारिश ने तैयार खड़ी फसल बर्बाद कर दी। ऐसी स्थिति में किसान न तो समय पर कर्ज चुका पाने की हालत में थे और न ही अगली फसल के लिए पूंजी जुटा पा रहे थे। लोन अकाउंट में बदलाव का यह फैसला किसानों को डिफॉल्ट होने से बचाने और उन्हें दोबारा खेती के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    किसानों के लोन अकाउंट में क्या होगा बदलाव

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जिन किसानों की फसलें प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुई हैं और जिनके लोन खातों का सत्यापन पूरा हो चुका है, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। सदस्य बैंकों ने ऐसे सभी पात्र किसानों की सूची महाराष्ट्र राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) को सौंप दी है। अब जल्द ही बैंकों द्वारा कर्ज पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें लोन चुकाने की अवधि बढ़ाई जा सकती है या किश्तों में राहत दी जा सकती है।

    किन किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ

    इस राहत पैकेज का लाभ केवल उन्हीं किसानों को दिया जाएगा:

    • जिनकी फसलें भारी बारिश, बाढ़ या बेमौसम बारिश से प्रभावित हुई हैं
    • जिनके लोन खाते आपदा प्रभावित के रूप में सत्यापित हो चुके हैं
    • जिनकी जानकारी बैंकों द्वारा SLBC को भेजी जा चुकी है

    सरकार ने साफ किया है कि केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही इस योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि राहत सही हाथों तक पहुंचे।

    ब्याज सब्सिडी से मिलेगी शुरुआती राहत

    केंद्र सरकार ने लोन पुनर्गठन के साथ-साथ संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत भी राहत देने का फैसला किया है। इसके अनुसार:

    • लोन में बदलाव कराने वाले किसानों को पहले वर्ष रियायती ब्याज दर का लाभ मिलेगा
    • पहले साल ब्याज का बोझ कम रहने से किसान अपनी आर्थिक स्थिति संभाल सकेंगे
    • दूसरे वर्ष से संबंधित बैंक की सामान्य ब्याज दर लागू होगी

    सरकार का मानना है कि शुरुआती साल की यह राहत किसानों को दोबारा खेती शुरू करने और आय के स्रोत मजबूत करने में मदद करेगी।

    लोन रिकवरी पर अस्थायी रोक

    प्राकृतिक आपदाओं के चलते मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को और राहत देते हुए केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि लोन पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावित किसानों से कर्ज वसूली का दबाव न बनाया जाए
    इस अस्थायी रोक से किसानों को सांस लेने का मौका मिलेगा और वे बिना तनाव के आगे की खेती की योजना बना सकेंगे।

    सांसदों के हस्तक्षेप के बाद आया फैसला

    सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के कई सांसदों ने किसानों की बदहाल स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। सांसदों ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान पूरी तरह टूट चुके हैं और उन पर कर्ज का अतिरिक्त बोझ डालना न्यायसंगत नहीं होगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने हालात की गंभीरता को समझते हुए यह बड़ा फैसला लिया।

    प्राकृतिक आपदा की घोषणा का सीधा असर

    महाराष्ट्र सरकार ने 26 नवंबर 2025 को राज्य में प्राकृतिक आपदा की आधिकारिक घोषणा की थी। इसी आधार पर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) ने सभी बैंकों को RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार कदम उठाने के निर्देश दिए।
    इन निर्देशों में शामिल हैं:

    • आपदा प्रभावित किसानों के फसल ऋण में बदलाव
    • लोन रिकवरी को अस्थायी रूप से टालना
    • किसानों को बैंकिंग प्रक्रियाओं में सहयोग देना

    कृषि क्षेत्र को मिलेगा संजीवनी

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। कर्ज का दबाव कम होने से किसान:

    • अगली फसल के लिए निवेश कर पाएंगे
    • बीज, खाद और कृषि उपकरण खरीद सकेंगे
    • उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे सकेंगे

    इसका सकारात्मक असर आने वाले सीजन में राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर किसानों के लिए बड़ी सौगात

    केंद्र सरकार का यह कदम लाखों किसानों के लिए राहत की सांस साबित हो सकता है। कर्ज में बदलाव, ब्याज सब्सिडी और लोन रिकवरी पर रोक जैसे फैसले यह दिखाते हैं कि सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को उबरने का पूरा मौका देना चाहती है।
    यदि यह योजना समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो यह न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारेगी, बल्कि खेती को फिर से पटरी पर लाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

  • बिहार के किसानों को बड़ी राहत: भूमि रिकॉर्ड सुधार के आदेश, 75 लाख को मिलेगी फार्मर आईडी

    बिहार के किसानों को बड़ी राहत: भूमि रिकॉर्ड सुधार के आदेश, 75 लाख को मिलेगी फार्मर आईडी

    बिहार में फार्मर आईडी को लेकर बड़ी पहल: भूमि रिकॉर्ड सुधारने के निर्देश, 75 लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ


    बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है, ताकि किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना, एग्री स्टैक और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के मिल सके। इसी कड़ी में अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि रिकॉर्ड में आ रही गड़बड़ियों को तत्काल सुधारने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।


    क्या है फार्मर आईडी और क्यों है जरूरी?

    फार्मर आईडी एक यूनिक डिजिटल किसान पहचान है, जिसके जरिए किसान की जमीन, नाम, पता और अन्य जरूरी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती हैं। यह आईडी एग्री स्टैक अभियान का अहम हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य है कि भविष्य में किसानों को मिलने वाली सभी योजनाओं और सब्सिडी का भुगतान सीधे फार्मर आईडी से लिंक होकर किया जाए।

    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में पीएम किसान योजना की ₹6,000 सालाना सहायता, फसल बीमा, कृषि सब्सिडी और अन्य लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनकी फार्मर आईडी और भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह सही होंगे।


    75 लाख किसानों को फार्मर आईडी देने का लक्ष्य

    राज्य सरकार ने अगले एक महीने में 75 लाख किसानों को फार्मर आईडी जारी करने का लक्ष्य तय किया है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 20 लाख किसानों को फार्मर आईडी मिल चुकी है, जबकि 4.5 लाख से ज्यादा किसान ई-केवाईसी प्रक्रिया में कवर किए जा चुके हैं।

    हालांकि इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई है भूमि रिकॉर्ड की गलतियां


    भूमि रिकॉर्ड में क्या-क्या समस्याएं आ रही हैं?

    फार्मर आईडी बनवाते समय हजारों किसानों के आवेदन केवल इस वजह से अटक गए क्योंकि उनके डिजिटाइज्ड जमाबंदी और अन्य दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं। आमतौर पर सामने आने वाली समस्याएं इस प्रकार हैं:

    • जमीन के रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग अलग होना
    • पिता के नाम में अंतर
    • रकबे (भूमि क्षेत्रफल) की गलत एंट्री
    • खसरा या प्लॉट नंबर का मिसमैच
    • पुरानी जमाबंदी का सही तरीके से डिजिटल न होना

    इन कारणों से परिमार्जन प्लस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए किए गए कई आवेदन रिजेक्ट हो रहे थे।


    राजस्व विभाग का सख्त निर्देश

    इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि:

    “कृषि विभाग और राजस्व विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। सभी जिलों में सर्कल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परिमार्जन प्लस के माध्यम से आए भूमि सुधार संबंधी आवेदनों का तत्काल निपटारा किया जाए।”

    सरकार का मानना है कि जब तक जमीन का रिकॉर्ड पूरी तरह सही नहीं होगा, तब तक फार्मर आईडी और एग्री स्टैक के तहत रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं हो सकता।


    क्यों जरूरी है भूमि रिकॉर्ड का सही होना?

    फार्मर आईडी को सीधे कृषि विभाग के डेटाबेस और भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। यदि दोनों में जरा भी अंतर हुआ, तो:

    • फार्मर आईडी जनरेट नहीं होगी
    • पीएम किसान का भुगतान रुक सकता है
    • भविष्य की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा

    इसी वजह से सरकार ने भूमि रिकॉर्ड सुधार को प्राथमिकता सूची में शामिल किया है।


    किसानों के लिए क्या है सरकार की रणनीति?

    कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों में किसानों को:

    • फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन
    • ई-केवाईसी प्रक्रिया
    • भूमि रिकॉर्ड सुधार की जानकारी
    • ऑनलाइन आवेदन में मदद

    जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों को तकनीकी समस्या आ रही है, वे अपने नजदीकी अंचल कार्यालय या कृषि कैंप में संपर्क करें।


    भविष्य में अनिवार्य होगी फार्मर आईडी

    सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में पीएम किसान योजना समेत सभी प्रमुख योजनाओं का भुगतान केवल फार्मर आईडी के जरिए किया जाएगा। ऐसे में जिन किसानों ने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, उनके लिए यह अंतिम अवसर जैसा है।


    निष्कर्ष

    बिहार सरकार की यह पहल किसानों के लिए डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। भूमि रिकॉर्ड सुधार और फार्मर आईडी के जरिए न केवल योजनाओं का लाभ पारदर्शी होगा, बल्कि किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि आप भी बिहार के किसान हैं, तो समय रहते फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन और भूमि रिकॉर्ड सुधार जरूर कराएं, ताकि भविष्य में किसी भी योजना का लाभ रुक न जाए।

  • खुशखबरी: लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त आई, महिलाओं के खाते में सीधे ₹1500 ट्रांसफर

    खुशखबरी: लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त आई, महिलाओं के खाते में सीधे ₹1500 ट्रांसफर

    लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त जारी: 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में ₹1500 ट्रांसफर, जानें पूरी जानकारी


    मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2026 की शुरुआत महिलाओं के लिए बड़ी सौगात के साथ की है। राज्य की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत 32वीं किस्त जारी कर दी गई है। इस किस्त के अंतर्गत प्रदेश की 1.26 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में ₹1500 की राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई है। यह राशि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार का एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदापुरम जिले के माखन नगर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान सिंगल क्लिक के जरिए यह राशि ट्रांसफर की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की हर महिला को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।


    32वीं किस्त में कितनी राशि मिली?

    लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त में इस बार प्रत्येक लाभार्थी महिला को
    👉 ₹1500 प्रति माह
    की सहायता राशि दी गई है। यह पैसा सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजा गया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसी प्रकार की बिचौलिया व्यवस्था नहीं होती।


    खाते में पैसा आने में कितना समय लग सकता है?

    सरकार के अनुसार, किस्त जारी होने के बाद 2 से 3 कार्य दिवस के भीतर राशि बैंक खाते में दिखाई दे सकती है।
    हालांकि, बैंक सर्वर या तकनीकी कारणों से कुछ महिलाओं के खातों में पैसा आने में थोड़ा अधिक समय भी लग सकता है। ऐसे में लाभार्थियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।


    कैसे चेक करें लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त का स्टेटस?

    यदि आप यह जानना चाहती हैं कि आपके खाते में 32वीं किस्त का पैसा आया है या नहीं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:

    1. सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
    2. होम पेज पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” विकल्प पर क्लिक करें
    3. अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी दर्ज करें
    4. कैप्चा कोड भरकर ओटीपी प्राप्त करें
    5. ओटीपी को वेरिफाई करें
    6. सर्च बटन पर क्लिक करें
    7. स्क्रीन पर आपकी भुगतान स्थिति दिखाई दे जाएगी

    यहां से आप आसानी से जांच सकती हैं कि ₹1500 की 32वीं किस्त आपके खाते में ट्रांसफर हुई है या नहीं।


    इन महिलाओं को 32वीं किस्त का लाभ नहीं मिला

    सरकारी जानकारी के अनुसार, सभी लाभार्थियों को इस बार योजना का पैसा नहीं मिल पाया है। इसके पीछे कई कारण सामने आए हैं:

    • आधार और बैंक खाते की ई-केवाईसी पूरी नहीं होना
    • बैंक खाता आधार से लिंक न होना
    • डीबीटी से जुड़ी तकनीकी समस्या
    • बैंक खाता बंद या निष्क्रिय होना
    • योजना की पात्रता शर्तों के अनुसार अपात्र घोषित होना
    • 60 वर्ष से अधिक आयु पूरी होने पर नाम सूची से हटाया जाना

    ऐसी महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपनी ई-केवाईसी पूरी करें और बैंक से जुड़ी त्रुटियों को ठीक करवाएं, ताकि अगली किस्तों का लाभ मिल सके।


    लाड़ली बहना योजना में नए नाम कब जुड़ेंगे?

    फिलहाल लाड़ली बहना योजना में नए आवेदनों की प्रक्रिया बंद है।
    राज्य सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि भविष्य में नए आवेदन शुरू किए जा सकते हैं, लेकिन इसकी कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    जब भी नया आवेदन चरण शुरू होगा, तब महिलाओं को निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

    • आधार कार्ड
    • बैंक खाता
    • समग्र आईडी

    आवेदन के बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी और पात्र महिलाओं को आगामी किस्तों का लाभ मिलेगा।


    32वीं किस्त नहीं आई तो कहां करें शिकायत?

    यदि सभी दस्तावेज सही होने के बावजूद आपके खाते में 32वीं किस्त की राशि नहीं आई है, तो आप नीचे दिए गए माध्यमों से शिकायत दर्ज करा सकती हैं:

    📞 लाड़ली बहना योजना हेल्पलाइन नंबर:
    0755-2700800

    📝 सीएम हेल्पलाइन पोर्टल (राज्य सरकार की जनसुनवाई सेवा)

    📧 ई-मेल:

    शिकायत करते समय आवेदन नंबर, समग्र आईडी और बैंक विवरण अपने पास जरूर रखें।


    लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य

    लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को:

    • नियमित मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करना
    • घरेलू खर्चों में सहयोग देना
    • महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना
    • समाज में महिलाओं की स्थिति मजबूत करना

    निष्कर्ष

    लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त से एक बार फिर यह साबित होता है कि मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। यदि आपने अभी तक अपने खाते की स्थिति नहीं जांची है, तो तुरंत स्टेटस चेक करें और किसी भी समस्या की स्थिति में समय रहते शिकायत दर्ज कराएं।

  • 52 हजार किसानों को मिलेगा सोलर पंप, 90% सब्सिडी के साथ बिजली बिल से छुटकारा | कुसुम योजना 2026

    52 हजार किसानों को मिलेगा सोलर पंप, 90% सब्सिडी के साथ बिजली बिल से छुटकारा | कुसुम योजना 2026

     52 हजार किसानों को मिलेगा सोलर पंप का तोहफा, 90% तक सब्सिडी से बदलेगी खेती की तस्वीर


    मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा से होगी सिंचाई, बिजली बिल से मिलेगी स्थायी राहतमध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 52 हजार किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत किसानों को 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी, जिससे सिंचाई की लागत बेहद कम हो जाएगी और बिजली पर निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी।

    यह योजना प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के तहत लागू की जा रही है, जिसे मध्यप्रदेश में “प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना” नाम दिया गया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता बनाना है।


    क्या है सोलर पंप योजना और क्यों है यह खास?

    सोलर पंप योजना के तहत किसानों को 1 HP से लेकर 7.5 HP तक के सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। ये पंप पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होंगे, जिससे:

    • बिजली कटौती का झंझट खत्म होगा
    • डीजल और बिजली बिल पर खर्च शून्य होगा
    • सिंचाई 24×7 संभव हो सकेगी

    सबसे बड़ी बात यह है कि किसान अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकेंगे।


    योजना की वर्तमान प्रगति: तेजी से आगे बढ़ रहा काम

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह योजना तेज़ी से ज़मीन पर उतर रही है। अब तक:

    • 34,600 से अधिक लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) जारी किए जा चुके हैं
    • लगभग 33,000 किसानों को कार्यादेश दिए जा चुके हैं
    • हजारों खेतों में इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

    सरकार का लक्ष्य है कि तय समयसीमा में सभी चयनित किसानों के खेतों में सोलर पंप स्थापित कर दिए जाएं।


    सोलर पंप पर खर्च कितना और सब्सिडी कैसे मिलेगी?

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सब्सिडी संरचना, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है।

    सब्सिडी का पूरा गणित

    • 10% राशि किसान द्वारा वहन की जाएगी
    • 60% राशि कृषक ऋण के रूप में ली जाएगी, जिसका ब्याज राज्य सरकार भरेगी
    • 30% अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा

    👉 यानी किसान को कुल लागत का बहुत ही छोटा हिस्सा देना होगा।


    अलग-अलग HP के सोलर पंप पर किसान अंशदान (लगभग)

    • 1 HP सोलर पंप: ₹12,000 से ₹14,000
    • 3 HP सोलर पंप: ₹20,000 से ₹43,000
    • 5 HP सोलर पंप: ₹30,000 से ₹57,000
    • 7.5 HP सोलर पंप: ₹41,000 से ₹78,000

    (राशि पंप के प्रकार और कंट्रोलर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है)


    कौन-कौन किसान ले सकता है योजना का लाभ? (पात्रता)

    इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी:

    • किसान मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी हो
    • न्यूनतम 3 हेक्टेयर कृषि भूमि हो
    • पंप क्षमता 3, 5 या 7.5 HP हो
    • किसान के पास अस्थायी बिजली कनेक्शन हो
    • खेत में पहले से कोई चालू विद्युत पंप न हो

    गलत जानकारी देने पर किसान को योजना से बाहर किया जा सकता है।


    आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

    सोलर पंप योजना में आवेदन करते समय निम्न दस्तावेज अनिवार्य हैं:

    • अस्थायी विद्युत कनेक्शन की रसीद
    • आधार कार्ड
    • जमीन के स्वामित्व से जुड़े कागजात
    • बैंक पासबुक
    • मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो

    सोलर पंप के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

    जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया

    1. आधिकारिक वेबसाइट cmsolarpump.mp.gov.in पर जाएं
    2. किसान विवरण और दस्तावेज अपलोड करें
    3. आवेदन जमा करने के बाद विभाग द्वारा खेत का निरीक्षण किया जाएगा
    4. स्वीकृति मिलने पर सोलर पंप लगाया जाएगा
    5. सब्सिडी की राशि DBT के माध्यम से सीधे खाते में भेजी जाएगी

    सोलर पंप योजना के बड़े फायदे

    ✔ बिजली बिल पूरी तरह खत्म
    ✔ डीजल खर्च से मुक्ति
    ✔ सिंचाई में आत्मनिर्भरता
    ✔ अतिरिक्त बिजली से कमाई का मौका
    5 साल तक मुफ्त रखरखाव
    ✔ पर्यावरण के अनुकूल खेती

    यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा मिशन को भी मजबूती देगी।


    अधिक जानकारी कहां से लें?

    किसान योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए:

    • मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की वेबसाइट देखें
    • या अपने नजदीकी बिजली विभाग / कृषि कार्यालय से संपर्क करें

    निष्कर्ष

    प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के तहत लागू की गई यह सोलर पंप योजना मध्यप्रदेश के किसानों के लिए खेती में क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। कम लागत, स्थायी ऊर्जा और अतिरिक्त आय का यह मॉडल आने वाले वर्षों में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा।

  • 10 लाख दीदियों को Mahila Rojgar Yojana की राशि क्यों अटकी

    10 लाख दीदियों को Mahila Rojgar Yojana की राशि क्यों अटकी

    Bihar: एक वजह से 10 लाख जीविका दीदियों के खाते में नहीं पहुंच पाई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की राशि, अब करना होगा यह जरूरी काम


    बिहार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ भले ही करोड़ों महिलाओं तक पहुंच चुका हो, लेकिन करीब 10 लाख जीविका दीदियां अब भी इस मदद से वंचित हैं। वजह सीधी है—बैंक खातों की KYC अधूरी, जिसके कारण उनके खाते फ्रीज हो गए हैं और सरकार द्वारा भेजी गई राशि उन तक नहीं पहुंच पा रही है।

    राज्य सरकार अब तक पांच चरणों में कुल 15,600 करोड़ रुपये की राशि अंतरण कर चुकी है, जिसमें 1 करोड़ 55 लाख 84 हजार 882 जीविका दीदियों के खाते शामिल हैं। लेकिन तकनीकी कारणों और KYC अपडेट न होने से करीब 10 लाख महिलाएं अभी भी लाभ से दूर हैं। विभाग का कहना है कि जैसे ही KYC पूरी होगी, राशि तुरंत खाते में भेज दी जाएगी

    सरकार ने पांचवें चरण में ही 28 नवंबर को 10 लाख लाभुकों के लिए 1,000 करोड़ रुपये का अंतरण किया, लेकिन KYC समस्या ने राशि के प्रवाह को रोक दिया। जनधन खाते सबसे अधिक प्रभावित हैं, क्योंकि इनमें KYC अपडेट न होने या आधार लिंक न होने जैसी दिक्कतें सामने आई हैं।

    राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, जिन जीविका दीदियों के खाते फ्रीज हैं, उन्हें अपने बैंक जाकर KYC अपडेट, आधार लिंकिंग और आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। बैंक खाते फ्रीज होने के पीछे कई कारण होते हैं—जैसे कि आईडी प्रूफ अपडेट न होना, ओवरड्राफ्ट की स्थिति, डाटा मिसमैच या बैंक व ग्राहक के बीच अनसुलझा मामला।

    कई महिलाओं ने इस योजना से अपना रोजगार शुरू भी कर लिया है, और आगे सरकार उन महिलाओं को दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने की तैयारी में है जो अपने व्यवसाय को मजबूती से आगे बढ़ाएंगी। इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा और महिलाओं को स्थायी रोजगार का मार्ग मिलेगा।

    Highlight: सरकार का लक्ष्य है कि अगले महीने तक सभी वंचित जीविका दीदियों के खाते में सहायता राशि भेज दी जाए, ताकि कोई भी परिवार इस योजना के लाभ से चूक न जाए।

    पिछले चरणों में कितनी जीविका दीदियों के खाते में राशि नहीं पहुंच पाई, इसका विवरण सरकार ने साझा किया है—

    • 26 सितंबर 2025: 75 लाख लाभुकों में से 3,23,902 के खाते में राशि नहीं पहुंची
    • 03 अक्टूबर 2025: 25 लाख में से 2,06,264 खाते बाधित
    • 06 अक्टूबर 2025: 21 लाख में से 1,58,086 महिलाएं वंचित
    • 24 अक्टूबर 2025: 24,84,882 में से 2,39,307 के खाते में पैसा नहीं गया
    • 28 नवंबर 2025: 10 लाख लाभुक—संख्या अपडेट होनी बाकी

    स्पष्ट है कि महिला रोजगार योजना करोड़ों महिलाओं को आर्थिक शक्ति देने का बड़ा माध्यम बन चुकी है, लेकिन KYC की छोटी सी कमी ने लाखों महिलाओं को लाभ लेने से रोक दिया है। सरकार और बैंक लगातार अपील कर रहे हैं कि सभी महिलाएं जल्द से जल्द अपनी KYC पूरी कराएं, ताकि सहायता राशि बिना रुकावट उनके खाते तक पहुंच सके।

    यह योजना राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान दे रही है, और KYC अपडेट के बाद सभी जीविका दीदियां इस लाभ से जुड़ सकेंगी।