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  • किसानों के लिए खुशखबरी: गांव में ही आधार कार्ड सेवा शुरू, 1000 ग्राम पंचायतों में मिलेगा फायदा

    किसानों के लिए खुशखबरी: गांव में ही आधार कार्ड सेवा शुरू, 1000 ग्राम पंचायतों में मिलेगा फायदा

     अब गांव में ही बनवाएं और अपडेट कराएं आधार कार्ड, किसानों को बड़ी राहत


    उत्तर प्रदेश के किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब आधार कार्ड से जुड़ी सेवाओं के लिए न तो शहर जाना पड़ेगा और न ही ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर काटने होंगे। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गांव स्तर पर आधार सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है।

    इस पहल के तहत प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आधार सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह कदम न केवल किसानों के समय और पैसे की बचत करेगा, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से दिलाएगा।


    ग्राम पंचायतों में खुलेंगे आधार सेवा केंद्र

    राज्य सरकार की योजना के अनुसार चयनित ग्राम पंचायतों के ग्राम सचिवालय में ही आधार सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर नया आधार कार्ड बनवाने, आधार में नाम, पता, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि अपडेट कराने के साथ-साथ आधार प्रमाणीकरण (Authentication) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

    अब ग्रामीणों को आधार अपडेट कराने के लिए लंबी कतारों, तकनीकी दिक्कतों और दलालों से छुटकारा मिलेगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, जो खेती-किसानी के काम छोड़कर शहर नहीं जा पाते।


    पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है

    इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। आधार आज लगभग हर सरकारी योजना की कुंजी बन चुका है। चाहे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, खाद-बीज सब्सिडी या पेंशन योजना हो—हर जगह आधार अनिवार्य है।

    गांव में ही आधार सेवाएं मिलने से किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर और बिना रुकावट मिल सकेगा।


    UIDAI से मिली मंजूरी, व्यवस्था होगी पूरी तरह अधिकृत

    इस योजना को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने पंचायती राज विभाग को रजिस्ट्रार आईडी और इंपैनलमेंट एजेंसी (EA) आईडी जारी कर दी है।

    इसका मतलब यह है कि ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित होने वाले आधार सेवा केंद्र पूरी तरह अधिकृत होंगे। इससे आधार से जुड़ी सेवाओं में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की संभावना बेहद कम हो जाएगी और ग्रामीणों को भरोसेमंद सेवाएं मिलेंगी।


    स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

    इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह है कि इन आधार सेवा केंद्रों का संचालन ग्राम पंचायत सहायकों द्वारा किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और जिम्मेदारी मिलेगी।

    स्थानीय स्तर पर सेवा संचालन होने से काम की गति तेज होगी और लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह कदम ग्रामीण रोजगार और डिजिटल सशक्तिकरण दोनों को मजबूती देगा।


    किसानों को क्या-क्या होंगे फायदे

    इस नई व्यवस्था से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा:

    • गांव में ही आधार नामांकन और अपडेट
    • समय और पैसे की बड़ी बचत
    • सरकारी योजनाओं का लाभ बिना देरी
    • शहर जाने की मजबूरी खत्म
    • डिजिटल सेवाओं से सीधा जुड़ाव

    अब किसानों को आधार अपडेट के लिए पूरा दिन खराब करने या अतिरिक्त खर्च उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे वे खेती और पशुपालन जैसे कार्यों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।


    आधार से जुड़ी पुरानी परेशानियां होंगी खत्म

    अब तक ग्रामीण इलाकों में आधार सेवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार सर्वर डाउन, लंबा इंतजार और दस्तावेजों की समस्या के चलते काम अधूरा रह जाता था।

    ग्राम पंचायत स्तर पर आधार सेवा केंद्र खुलने से ये समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी। साथ ही ग्रामीणों का भरोसा सरकारी और डिजिटल सेवाओं पर और मजबूत होगा।


    पायलट सफल हुआ तो पूरे प्रदेश में होगा विस्तार

    अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यह योजना 1000 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जा रही है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लागू किया जाएगा।

    इससे हर गांव में आधार सेवाएं उपलब्ध होंगी और ग्रामीणों को शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


    ‘गांव-गांव विकास’ की सोच को मिलेगा बल

    यह पहल सरकार की “गांव-गांव विकास” और डिजिटल इंडिया की सोच को मजबूती देती है। ग्राम सचिवालय अब केवल प्रशासनिक कार्यालय नहीं रहेंगे, बल्कि बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगे।

    इससे शासन और जनता के बीच दूरी कम होगी और ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

    गांव स्तर पर आधार सेवा केंद्रों की स्थापना किसानों और ग्रामीणों के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। यह योजना न केवल आधार से जुड़ी समस्याओं का समाधान करेगी, बल्कि किसानों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में यह पहल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर बन सकती है।

  • लखपति दीदी बनेंगी बीसी सखी: महिलाओं को हर महीने 15–30 हजार कमाने का सुनहरा मौका

    लखपति दीदी बनेंगी बीसी सखी: महिलाओं को हर महीने 15–30 हजार कमाने का सुनहरा मौका

    लखपति दीदी अब बनेंगी बीसी सखी: ग्रामीण महिलाओं को हर महीने 15 से 30 हजार रुपये की नई कमाई का अवसर


    केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में नई दिल्ली में हुए दो अहम समझौता ज्ञापनों (MoU) के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब लखपति दीदी योजना को केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे स्थायी रोजगार और वित्तीय सेवाओं से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाया जाएगा।

    इन समझौतों का सीधा लाभ ग्रामीण महिलाओं, किसानों और स्वयं सहायता समूहों (SHG) को मिलेगा। खास बात यह है कि अब लखपति दीदियां बीसी सखी (Banking Correspondent Sakhi) बनकर हर महीने 15,000 से 30,000 रुपये तक की आय अर्जित कर सकेंगी।


    ग्रामीण भारत के लिए सरकार की दोहरी रणनीति

    सरकार की इस नई पहल के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं—

    1. किसानों को नकली और घटिया कृषि इनपुट से बचाना
    2. ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आय के साधन उपलब्ध कराना

    इसी रणनीति के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, डाक विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।


    पहला MoU: नकली बीज, खाद और कीटनाशकों पर लगेगी लगाम

    पहला समझौता कृषि मंत्रालय और डाक विभाग के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य है—
    👉 बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के सैंपलों की सुरक्षित जांच और पारदर्शी ढुलाई

    अब कृषि इनपुट के सैंपल टैंपर-प्रूफ पैकिंग, बारकोड और QR कोड के साथ प्रयोगशालाओं तक भेजे जाएंगे। इससे:

    • डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए हर सैंपल की निगरानी होगी
    • सैंपल से छेड़छाड़ की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी
    • लैब रिपोर्ट समय पर और भरोसेमंद तरीके से मिलेगी

    यह कदम सीधे तौर पर किसानों की फसल और आय की सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि घटिया बीज और नकली कीटनाशक किसानों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।


    किसानों को मिलेगा भरोसा, मिलावटखोरों पर होगी सख्ती

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट के तहत दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    डाक विभाग के मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क के कारण अब:

    • देश के किसी भी कोने से सैंपल समय पर पहुंचेंगे
    • दोषी कंपनियों और डीलरों की पहचान आसान होगी
    • किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट मिल सकेंगे

    इससे कृषि उत्पादन, फसल की गुणवत्ता और किसानों की आय—तीनों में सुधार की उम्मीद है।


    दूसरा MoU: लखपति दीदी से बीसी सखी तक का सफर

    दूसरा समझौता ग्रामीण विकास मंत्रालय, डाक विभाग और DAY-NRLM के बीच हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य है—

    👉 ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना

    इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लखपति दीदियों को बीसी सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। बीसी सखी बनने के बाद महिलाएं गांव-गांव जाकर:

    • बैंक खाते खोलने में मदद करेंगी
    • सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएंगी
    • कैश ट्रांसफर और भुगतान सेवाएं देंगी
    • बचत योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएंगी

    हर महीने 15 से 30 हजार रुपये की संभावित आय

    सरकारी अनुमान के अनुसार, इस मॉडल से जुड़ने वाली महिलाओं की आय में 15,000 से 30,000 रुपये प्रति माह तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
    यह आय पूरी तरह से:

    • किए गए लेन-देन
    • दी गई सेवाओं
    • और बैंकिंग गतिविधियों पर आधारित होगी

    इससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और उनके परिवार की स्थिति भी मजबूत होगी।


    इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की अहम भूमिका

    इस योजना को जमीन पर उतारने में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
    बीसी सखियों को:

    • प्रोफेशनल ट्रेनिंग
    • टैबलेट और POS मशीन
    • आवश्यक सर्टिफिकेशन

    प्रदान किया जाएगा, ताकि वे भरोसेमंद तरीके से सेवाएं दे सकें। साथ ही:

    • सुकन्या समृद्धि योजना
    • पोस्ट ऑफिस बचत योजनाएं
    • सरकारी नकद लाभ

    अब और तेजी से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच सकेंगे।


    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल

    इन दोनों समझौतों को सरकार ने “Whole of Government Approach” का उदाहरण बताया है।
    इसका मतलब है कि अलग-अलग मंत्रालय मिलकर:

    • किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे
    • महिलाओं को रोजगार देंगे
    • और ग्रामीण भारत की 70% आबादी को सशक्त बनाएंगे

    कुल मिलाकर, यह पहल कृषि सुधार, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने वाली है।
    जहां एक ओर किसानों को नकली कृषि उत्पादों से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लखपति दीदियां बीसी सखी बनकर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकेंगी।

    यह योजना न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि गरीबी-मुक्त और मजबूत ग्रामीण भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।

  • दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर रिटेल बिक्री में 15.8% की उछाल, ग्रामीण मांग बनी बड़ी वजह

    दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर रिटेल बिक्री में 15.8% की उछाल, ग्रामीण मांग बनी बड़ी वजह

    दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर रिटेल बिक्री में ज़बरदस्त उछाल, ग्रामीण मांग ने दी रफ्तार


    भारत के कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेत दिसंबर 2025 में काफी सकारात्मक नजर आए। इसका सीधा असर ट्रैक्टर बाजार पर देखने को मिला, जहां ट्रैक्टर रिटेल बिक्री में सालाना आधार पर 15.80% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

    फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में देशभर में 1,15,001 ट्रैक्टर यूनिट्स की खुदरा बिक्री हुई, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 99,306 यूनिट्स था।


    🔴 प्रमुख कारण: क्यों बढ़ी ट्रैक्टरों की मांग?

    इस तेज़ बढ़ोतरी के पीछे कई अहम कारण रहे, जिनमें शामिल हैं:

    • 🌾 कृषि गतिविधियों में तेजी
    • 🟢 ग्रामीण इलाकों में बेहतर नकदी प्रवाह
    • 💰 स्थिर और सुलभ फाइनेंसिंग विकल्प
    • 🌧️ खरीफ फसल के बाद रबी सीजन की तैयारी

    इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर ग्रामीण भारत में ट्रैक्टर खरीदारी का माहौल मजबूत किया।


    📊 ट्रैक्टर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सभी ब्रांड्स का प्रदर्शन एक जैसा नहीं

    जहां कई बड़े ट्रैक्टर OEMs (Original Equipment Manufacturers) ने शानदार ग्रोथ दर्ज की, वहीं कुछ कंपनियों को हल्की गिरावट का भी सामना करना पड़ा। इससे यह साफ है कि भारतीय ट्रैक्टर बाजार अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी और कंसॉलिडेशन की ओर बढ़ रहा है


    🟢 महिंद्रा एंड महिंद्रा ने फिर दिखाया दबदबा

    महिंद्रा एंड महिंद्रा (ट्रैक्टर डिवीजन) ने दिसंबर 2025 में 29,475 यूनिट्स की बिक्री के साथ बाजार में पहला स्थान बनाए रखा।

    • 📈 सालाना वृद्धि: 21% से अधिक
    • 🟩 बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 25.63%

    यह साफ दिखाता है कि महिंद्रा ट्रैक्टर किसानों की पहली पसंद बना हुआ है।


    🔵 स्वराज ट्रैक्टर्स ने भी पकड़ी रफ्तार

    महिंद्रा ग्रुप की ही स्वराज डिवीजन ने भी मजबूत प्रदर्शन किया।

    • बिक्री: 22,000+ यूनिट्स
    • 📊 बाजार हिस्सेदारी में करीब 1% की बढ़ोतरी

    स्वराज की पकड़ खासकर उत्तर भारत और कृषि प्रधान राज्यों में मजबूत होती जा रही है।


    🟡 सोनालिका: बिक्री बढ़ी, लेकिन हिस्सेदारी घटी

    इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (सोनालिका) ने बिक्री के मोर्चे पर बढ़त दिखाई, लेकिन बाजार हिस्सेदारी में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    • ✔️ यूनिट सेल्स में वृद्धि
    • ❌ मार्केट शेयर में कमी

    यह दर्शाता है कि प्रतिस्पर्धा के चलते सिर्फ बिक्री बढ़ना ही काफी नहीं, बल्कि हिस्सेदारी बनाए रखना भी चुनौती है।


    🔴 एस्कॉर्ट्स कुबोटा का शानदार कमबैक

    दिसंबर 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि एस्कॉर्ट्स कुबोटा के नाम रही।

    • 🚀 सालाना वृद्धि: 40% से ज्यादा
    • 📈 बाजार हिस्सेदारी में 2% से अधिक का उछाल

    यह प्रदर्शन दिखाता है कि कंपनी की नई टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट रेंज और ग्रामीण नेटवर्क ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।


    🟢 जॉन डियर की मजबूत वापसी

    जॉन डियर इंडिया ने भी शानदार ग्रोथ दर्ज की।

    • 📊 बिक्री में 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी
    • 🌱 मध्यम हॉर्सपावर सेगमेंट में मजबूत पकड़

    यह ब्रांड खासकर उन्नत कृषि उपकरण और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है।


    🔵 टैफे और आयशर को झटका

    जहां कुछ कंपनियां आगे बढ़ीं, वहीं TAFE और आयशर ट्रैक्टर्स को दिसंबर 2025 में हल्की गिरावट का सामना करना पड़ा।

    • 📉 बिक्री और बाजार हिस्सेदारी दोनों में कमी
    • 🔍 कारण: बढ़ती प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय दबाव

    🟠 छोटे ब्रांड्स की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट

    छोटे और क्षेत्रीय ट्रैक्टर ब्रांड्स के लिए यह महीना चुनौतीपूर्ण रहा।

    • 🚫 बिक्री में 20% से अधिक की गिरावट
    • 📉 संयुक्त बाजार हिस्सेदारी में तेज कमी

    यह संकेत देता है कि बाजार अब बड़े और मजबूत ब्रांड्स की ओर झुक रहा है


    🔮 आगे का बाजार आउटलुक

    विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले महीनों में ट्रैक्टर बाजार की दिशा इन कारकों पर निर्भर करेगी:

    • 🌾 रबी फसल की स्थिति
    • 💧 सिंचाई और मौसम
    • 💵 ग्रामीण नकदी प्रवाह
    • 🏦 फाइनेंस और ब्याज दरें

    अगर हालात अनुकूल रहे, तो FY 2026 की शुरुआत ट्रैक्टर इंडस्ट्री के लिए और भी सकारात्मक हो सकती है।

    दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर रिटेल बिक्री ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ रही है। बड़े ब्रांड्स की मजबूत पकड़ और छोटे खिलाड़ियों की चुनौती, आने वाले समय में बाजार को और रोचक बनाएगी।

  • दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री में 37% उछाल, महिंद्रा-जॉन डीयर की रिकॉर्ड ग्रोथ | Tractor Sales Report

    दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री में 37% उछाल, महिंद्रा-जॉन डीयर की रिकॉर्ड ग्रोथ | Tractor Sales Report

    दिसंबर 2025 में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में 37% उछाल, ग्रामीण भारत की मजबूत मांग बनी वजह


    भारत के घरेलू ट्रैक्टर उद्योग ने दिसंबर 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था देश की रीढ़ है। बीते महीने ट्रैक्टर बिक्री में 37% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो न केवल इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक संकेत है, बल्कि किसानों की बढ़ती क्रय शक्ति और सरकारी नीतियों की सफलता को भी दर्शाती है।

    आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में कुल 69,890 ट्रैक्टर यूनिट्स की घरेलू बिक्री हुई, जबकि दिसंबर 2024 में यह संख्या 50,986 यूनिट्स रही थी। यानी एक साल में ट्रैक्टर उद्योग ने 37.08% की मजबूत ग्रोथ हासिल की।


    ग्रामीण मांग और सरकारी नीतियों का असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में खेती से जुड़ी गतिविधियों में तेजी, अच्छी मानसून स्थिति, रबी फसल की बेहतर बुवाई और सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं ने ट्रैक्टरों की मांग को मजबूती दी।
    इसके साथ ही कृषि यंत्रीकरण, आसान ट्रैक्टर लोन, कम ब्याज दरें और सब्सिडी योजनाएं भी बिक्री बढ़ने के अहम कारण रहीं।

    👉 Domestic Tractor Sales December 2025, Tractor Industry Growth India, और Rural Demand for Tractors जैसे कीवर्ड इस ग्रोथ को साफ दर्शाते हैं।


    ब्रांड वाइज ट्रैक्टर बिक्री रिपोर्ट – दिसंबर 2025

    महिंद्रा एंड महिंद्रा: मार्केट लीडर की मजबूत पकड़

    देश की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने दिसंबर 2025 में भी अपना दबदबा बनाए रखा।
    कंपनी ने 30,210 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल के 22,019 यूनिट्स की तुलना में 37.20% की वृद्धि है।
    महिंद्रा का मार्केट शेयर 43.23% रहा, जो इसे स्पष्ट रूप से बाजार का नेता बनाता है।


    TAFE ग्रुप: बिक्री बढ़ी, लेकिन शेयर में हल्की गिरावट

    TAFE (टैफे) ग्रुप ने दिसंबर 2025 में 11,033 ट्रैक्टर बेचे। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 33.75% की ग्रोथ को दर्शाता है।
    हालांकि, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनी का मार्केट शेयर 15.79% पर आ गया।


    सोनालिका ट्रैक्टर्स: स्थिर प्रदर्शन

    सोनालिका ने दिसंबर 2025 में 9,378 यूनिट्स की बिक्री की, जो सालाना आधार पर 22.88% की बढ़त है।
    हालांकि बिक्री बढ़ी, लेकिन कंपनी का मार्केट शेयर घटकर 13.42% रह गया।


    एस्कॉर्ट्स कुबोटा: फार्मट्रैक और पावरट्रैक की मजबूती

    Escorts Kubota (Farmtrac और Powertrac ब्रांड) ने दिसंबर 2025 में 6,828 ट्रैक्टर बेचे।
    यह आंकड़ा 36.12% की वृद्धि को दिखाता है। कंपनी का मार्केट शेयर लगभग 9.77% रहा।


    जॉन डीयर: सबसे तेज ग्रोथ

    दिसंबर 2025 में John Deere Tractors ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया।
    कंपनी की बिक्री 5,192 यूनिट्स से बढ़कर 8,788 यूनिट्स हो गई, यानी 69.26% की जबरदस्त वृद्धि
    इसका मार्केट शेयर भी बढ़कर 12.57% हो गया, जो इंडस्ट्री में बढ़ते भरोसे को दिखाता है।


    न्यू हॉलैंड और VST का प्रदर्शन

    • New Holland ने 2,015 ट्रैक्टर बेचकर 28.59% ग्रोथ दर्ज की, हालांकि मार्केट शेयर में हल्की गिरावट रही।
    • VST Shakti ने छोटे सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 59.15% की वृद्धि दर्ज की और मार्केट शेयर बढ़ाया।

    अन्य ब्रांड्स: मिश्रित प्रदर्शन

    • Captain Tractors ने 46.88% की तेज बढ़ोतरी के साथ अपनी मौजूदगी मजबूत की।
    • Preet Tractors और Indo Farm ने सीमित लेकिन स्थिर वृद्धि दर्ज की।
    • SDF की बिक्री में हल्की बढ़ोतरी रही।
    • वहीं ACE Tractors दिसंबर 2025 में ऐसा एकमात्र ब्रांड रहा, जिसकी बिक्री में 18.26% की गिरावट दर्ज की गई।

    कुल मिलाकर घरेलू ट्रैक्टर उद्योग का हाल

    दिसंबर 2025 का प्रदर्शन साफ दिखाता है कि Indian Tractor Industry एक मजबूत रिकवरी और विस्तार के दौर में है।
    जहां महिंद्रा, जॉन डीयर, VST और कैप्टन ट्रैक्टर्स ने बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की, वहीं कुछ ब्रांड्स को बिक्री बढ़ने के बावजूद मार्केट शेयर प्रेशर का सामना करना पड़ा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकारी समर्थन, ग्रामीण आय में सुधार और कृषि क्षेत्र में निवेश इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले महीनों में ट्रैक्टर उद्योग और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

    👉 दिसंबर 2025 में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूती का आईना है।
    👉 37% की ग्रोथ यह संकेत देती है कि किसान भविष्य को लेकर आशावादी हैं।
    👉 आने वाले समय में ट्रैक्टर बिक्री 2026 में भी सकारात्मक रुझान बने रहने की उम्मीद है।

  • भारतीय ट्रैक्टर बाजार में सोनालिका का दबदबा, दिसंबर 2025 में रिकॉर्ड 12,392 ट्रैक्टर बिक्री

    भारतीय ट्रैक्टर बाजार में सोनालिका का दबदबा, दिसंबर 2025 में रिकॉर्ड 12,392 ट्रैक्टर बिक्री

    सोनालिका ट्रैक्टर ने रचा नया रिकॉर्ड: दिसंबर 2025 में अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री

    भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए साल 2025 का अंत बेहद सकारात्मक संकेत लेकर आया है। देश की प्रमुख ट्रैक्टर निर्माता कंपनी सोनालिका ट्रैक्टर ने दिसंबर 2025 में अपनी अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री दर्ज कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने इस महीने कुल 12,392 ट्रैक्टर यूनिट्स की बिक्री की, जो न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय ट्रैक्टर बाजार के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

    यह रिकॉर्ड बिक्री इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय किसानों के बीच सोनालिका ब्रांड पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। साल के आखिरी महीने में हासिल किया गया यह आंकड़ा कंपनी की रणनीति, उत्पाद गुणवत्ता और किसान-केंद्रित सोच को दर्शाता है।


    किसानों के भरोसे का मजबूत आधार बनी सोनालिका की सफलता

    सोनालिका ट्रैक्टर की इस उपलब्धि पर कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक रमण मित्तल ने कहा कि हर ट्रैक्टर की बिक्री किसानों के भरोसे की जीत है। उनके अनुसार,

    “हमारे लिए ट्रैक्टर केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि यह किसान के जीवन और उसकी आजीविका से जुड़ा हुआ साधन है।”

    उन्होंने बताया कि सोनालिका हमेशा किसानों की वास्तविक जरूरतों, फीडबैक और खेतों की परिस्थितियों को समझकर ट्रैक्टर डिजाइन करती है। इसी कारण कंपनी के ट्रैक्टर भरोसेमंद, टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले साबित होते हैं।

    कंपनी का उद्देश्य सिर्फ बिक्री के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को ऐसे दीर्घकालिक समाधान देना है, जो खेती को आसान, किफायती और अधिक उत्पादक बना सकें।


    2026 के लिए मजबूत रणनीति और सतत विकास पर फोकस

    रिकॉर्ड बिक्री के साथ सोनालिका ने साल 2026 के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है। कंपनी आने वाले समय में सतत विकास, तकनीकी नवाचार और विश्वसनीयता को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ेगी।

    सोनालिका का फोकस रहेगा:

    • नई टेक्नोलॉजी वाले ट्रैक्टर
    • बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी
    • मजबूत इंजन क्षमता
    • कम मेंटेनेंस और ज्यादा माइलेज

    नए साल के अवसर पर कंपनी ने देशभर के किसानों और स्टेकहोल्डर्स को “हैप्पी न्यू ईयर 2026” की शुभकामनाएं भी दीं।


    भारतीय ट्रैक्टर बाजार में सोनालिका की बढ़ती पकड़

    पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ट्रैक्टर इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा काफी तेज हुई है, लेकिन सोनालिका ने अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। कंपनी ने छोटे, मध्यम और बड़े किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न हॉर्स पावर रेंज में ट्रैक्टर पेश किए हैं।

    तकनीकी नवाचार, मजबूत बॉडी, उन्नत इंजन और कम ईंधन खपत जैसे फीचर्स ने सोनालिका को बाजार में मजबूत स्थिति दिलाई है। हर नया मॉडल किसानों की बदलती जरूरतों और आधुनिक खेती के अनुरूप तैयार किया जाता है।


    सोनालिका ट्रैक्टर से किसानों को मिलने वाले प्रमुख फायदे

    सोनालिका ट्रैक्टर आज भारतीय किसानों के लिए सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि खेती का भरोसेमंद साथी बन चुका है।
    कंपनी के ट्रैक्टर निम्नलिखित क्षेत्रों में किसानों को लाभ पहुंचाते हैं:

    • छोटे खेतों से लेकर बड़े कृषि कार्यों तक उपयुक्त
    • हल्की जुताई से लेकर भारी कृषि कार्यों में दमदार प्रदर्शन
    • बेहतर माइलेज से ईंधन की बचत
    • मजबूत इंजन से कम समय में ज्यादा काम
    • लंबे समय तक टिकाऊ और भरोसेमंद संचालन

    इन खूबियों के कारण किसान बेहतर उत्पादन, कम मेहनत और अधिक मुनाफा हासिल कर पा रहे हैं।


    दिसंबर 2025 की बिक्री: कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत

    साल 2025 के अंतिम महीने में दर्ज की गई यह रिकॉर्ड बिक्री सोनालिका ट्रैक्टर के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है। यह प्रदर्शन बताता है कि कंपनी की किसान-केंद्रित सोच, नवाचार और गुणवत्ता सही दिशा में काम कर रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय में सोनालिका भारतीय ट्रैक्टर बाजार में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत कर सकती है।


    सोनालिका ट्रैक्टर के बारे में

    सोनालिका ट्रैक्टर भारत की अग्रणी ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों में से एक है। यह ब्रांड अपनी उन्नत तकनीक, भरोसेमंद प्रदर्शन और मजबूत सर्विस नेटवर्क के लिए जाना जाता है।
    पूरे देश में फैला इसका डीलर और सर्विस नेटवर्क किसानों को समय पर सहायता प्रदान करता है।

    सोनालिका का लक्ष्य है:

    • खेती की कार्यक्षमता बढ़ाना
    • किसानों की लागत कम करना
    • टिकाऊ और भरोसेमंद ट्रैक्टर समाधान उपलब्ध कराना

    कंपनी चाहती है कि हर भारतीय किसान अपने खेत के लिए सही, किफायती और भरोसेमंद ट्रैक्टर चुन सके

  • एस्कॉर्ट्स कुबोटा ट्रैक्टर बिक्री में रिकॉर्ड उछाल, दिसंबर 2025 में 38.5% ग्रोथ दर्ज

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा ट्रैक्टर बिक्री में रिकॉर्ड उछाल, दिसंबर 2025 में 38.5% ग्रोथ दर्ज

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा ट्रैक्टर की बिक्री में जबरदस्त उछाल, दिसंबर 2025 में 38.5% की रिकॉर्ड ग्रोथ


    भारत के ट्रैक्टर उद्योग में दिसंबर 2025 का महीना एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के लिए बेहद शानदार साबित हुआ है। कंपनी ने इस दौरान ट्रैक्टर बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाते हुए 38.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की है। यह आंकड़े न केवल कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में मांग लगातार मजबूत हो रही है।

    दिसंबर 2025 में कुल ट्रैक्टर बिक्री का पूरा ब्योरा

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने दिसंबर 2025 में कुल 7,577 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 5,472 यूनिट था। यानी एक साल में कंपनी की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। Escorts Kubota Tractor Sales December 2025 अब ऑटो और कृषि मशीनरी सेक्टर की बड़ी सुर्खियों में शामिल हो चुका है।

    घरेलू बाजार में ट्रैक्टरों की मजबूत मांग

    अगर घरेलू बाजार की बात करें तो कंपनी ने दिसंबर 2025 में 6,828 ट्रैक्टरों की घरेलू बिक्री दर्ज की। पिछले वर्ष इसी महीने यह संख्या 5,016 यूनिट थी। इस तरह घरेलू बिक्री में 36.1% की ग्रोथ दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी सब्सिडी योजनाएं, कम GST दरें, राज्य सरकारों की सहायता नीतियां और किसानों को मिल रहा सीधा लाभ इस ग्रोथ के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा बेहतर खरीफ उत्पादन, रबी फसलों की बुवाई में तेजी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल ने भी ट्रैक्टर डिमांड को मजबूती दी है।


    निर्यात में भी एस्कॉर्ट्स कुबोटा का दमदार प्रदर्शन

    घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। दिसंबर 2025 में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने 749 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 456 यूनिट था। इस तरह निर्यात में 64.3 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    कंपनी के Farmtrac, Powertrac और Kubota Tractor ब्रांड्स की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है। अफ्रीका, एशिया और कुछ यूरोपीय देशों में भारतीय ट्रैक्टरों की विश्वसनीयता और किफायती कीमतें इन्हें लोकप्रिय बना रही हैं।

    Q3 FY26 में भी बनी रही ग्रोथ की रफ्तार

    वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस अवधि में एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने कुल 36,955 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही से 13.5% अधिक है।

    • घरेलू बिक्री: 35,373 यूनिट (12% की वृद्धि)
    • निर्यात बिक्री: 1,582 यूनिट (62.9% की तेज बढ़ोतरी)

    यह आंकड़े साफ बताते हैं कि कंपनी की रणनीति और उत्पाद पोर्टफोलियो दोनों ही बाजार की जरूरतों पर खरे उतर रहे हैं।


    अप्रैल से दिसंबर FY26 तक लगातार ग्रोथ

    वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर) में भी एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ग्रोथ बनी रही। इस दौरान कंपनी ने कुल 1,01,413 ट्रैक्टरों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है।

    • घरेलू बिक्री: 96,550 यूनिट
    • निर्यात: 4,863 यूनिट
    • निर्यात ग्रोथ: 53.9%

    यह साफ संकेत है कि Escorts Kubota Tractor Market Share लगातार मजबूत हो रही है।

    क्यों बढ़ रही है एस्कॉर्ट्स कुबोटा की लोकप्रियता?

    विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनी की सफलता के पीछे कई अहम कारण हैं:

    • मजबूत डीलर नेटवर्क
    • भरोसेमंद और टिकाऊ ट्रैक्टर मॉडल
    • किसानों की जरूरतों के अनुसार तकनीक
    • बेहतर फाइनेंस और ट्रैक्टर लोन विकल्प
    • सरकारी योजनाओं से जुड़ाव

    इन सभी वजहों से एस्कॉर्ट्स कुबोटा किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है।

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के बारे में

    एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक है, जिसे 80 वर्षों से अधिक का अनुभव है। कंपनी कृषि मशीनरी और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर में मजबूत उपस्थिति रखती है। “Spreading Prosperity & Impacting Lives” के उद्देश्य के साथ कंपनी किसानों और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को आधुनिक समाधान प्रदान कर रही है।

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 में दर्ज की गई 38.5% ट्रैक्टर बिक्री ग्रोथ यह साबित करती है कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा न सिर्फ मौजूदा बाजार में मजबूत है, बल्कि भविष्य में भी ट्रैक्टर इंडस्ट्री का एक बड़ा खिलाड़ी बना रहेगा। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले महीनों में कंपनी नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती है।

  • महिंद्रा ट्रैक्टर बिक्री रिपोर्ट दिसंबर 2025: भारत में रिकॉर्ड मांग, निर्यात में बड़ी बढ़त

    महिंद्रा ट्रैक्टर बिक्री रिपोर्ट दिसंबर 2025: भारत में रिकॉर्ड मांग, निर्यात में बड़ी बढ़त

    महिंद्रा के ट्रैक्टर कारोबार ने दिसंबर 2025 में रचा नया रिकॉर्ड, घरेलू और निर्यात बिक्री में जबरदस्त उछाल


    महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस (FEB) ने दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर बिक्री के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महिंद्रा ग्रुप का यह प्रमुख व्यवसाय लंबे समय से कृषि यंत्रीकरण, किसानों की आय बढ़ाने, और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है। दिसंबर 2025 के बिक्री आंकड़े न केवल कंपनी की मजबूत रणनीति को दर्शाते हैं, बल्कि भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में आई मजबूती और ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी की भी स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

    कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में महिंद्रा ट्रैक्टर की घरेलू बिक्री 30,210 यूनिट्स रही। यह दिसंबर 2024 में हुई 22,019 यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले 37% सालाना वृद्धि को दर्शाती है। घरेलू बाजार में यह बढ़त ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर नकदी प्रवाह, अच्छी फसल पैदावार, और किसानों की मजबूत क्रय शक्ति का नतीजा मानी जा रही है। विशेष रूप से खरीफ फसल की सफल कटाई के बाद किसानों के पास उपलब्ध नकदी में सुधार हुआ, जिससे ट्रैक्टर डिमांड को सीधा लाभ मिला।

    अगर कुल ट्रैक्टर बिक्री (घरेलू + निर्यात) की बात करें, तो दिसंबर 2025 में महिंद्रा ने कुल 31,859 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की। यह आंकड़ा पिछले साल इसी महीने में हुई 22,943 यूनिट्स की तुलना में 39% की प्रभावशाली ग्रोथ को दर्शाता है। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि महिंद्रा ट्रैक्टर मार्केट लीडर के रूप में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है।

    निर्यात बाजार में भी महिंद्रा का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा। दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी ने 1,649 ट्रैक्टरों का निर्यात किया, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 924 यूनिट्स था। यानी 78% की जबरदस्त एक्सपोर्ट ग्रोथ दर्ज की गई। इस निर्यात में CKD (Completely Knocked Down) यूनिट्स भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह तेजी भारतीय ट्रैक्टरों की बढ़ती वैश्विक मांग, महिंद्रा के मजबूत डीलर नेटवर्क, और भरोसेमंद ब्रांड वैल्यू को दर्शाती है।

    वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से दिसंबर 2025 तक महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने निरंतर मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में घरेलू ट्रैक्टर बिक्री 3,91,890 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 3,24,327 यूनिट्स थी। यानी 21% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    इसी तरह, ट्रैक्टर निर्यात अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान 14,702 यूनिट्स रहा, जो पिछले वर्ष की 12,296 यूनिट्स की तुलना में 20% अधिक है। कुल मिलाकर, इस अवधि में महिंद्रा की कुल ट्रैक्टर बिक्री 4,06,592 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 3,36,623 यूनिट्स थी। यह आंकड़े साफ तौर पर महिंद्रा ट्रैक्टर ग्रोथ, कृषि मशीनरी की बढ़ती मांग, और कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति की सफलता को दर्शाते हैं।

    इस शानदार प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए वीजय नाकरा, प्रेसिडेंट – फार्म इक्विपमेंट बिजनेस, महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड, ने कहा कि दिसंबर 2025 में घरेलू बाजार में 30,210 ट्रैक्टरों की बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37% अधिक है। उन्होंने बताया कि खरीफ फसल की बेहतर पैदावार के चलते बाजार में नकदी की उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे ग्रामीण मांग को मजबूती मिली है।

    उन्होंने आगे कहा कि अनुकूल मौसम परिस्थितियां, स्वस्थ जलाशय स्तर, और रबी फसलों की बढ़ती बुवाई ने ट्रैक्टरों की मांग को और बल दिया है। आने वाले महीनों में भी यह सकारात्मक रुझान जारी रहने की उम्मीद है, जिससे ट्रैक्टर बिक्री में निरंतर वृद्धि देखने को मिल सकती है। निर्यात बाजार को लेकर उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में 1,649 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई, जो 78% की मजबूत वृद्धि को दर्शाती है।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाएं, ग्रामीण विकास पर बढ़ता फोकस, MSP सपोर्ट, बेहतर मानसून, और तकनीकी रूप से उन्नत ट्रैक्टरों की बढ़ती मांग आने वाले समय में भी ट्रैक्टर उद्योग को मजबूती प्रदान करेंगी। महिंद्रा, जो पहले से ही भारत की नंबर-1 ट्रैक्टर कंपनी मानी जाती है, इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, डिजिटल सर्विसेज, और कस्टमर सपोर्ट नेटवर्क को लगातार सशक्त बना रही है।

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 के बिक्री आंकड़े यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिजनेस मजबूत विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। घरेलू बाजार में किसानों का भरोसा, वैश्विक स्तर पर बढ़ता निर्यात, और कृषि क्षेत्र की सकारात्मक स्थिति के साथ महिंद्रा आने वाले समय में भी ट्रैक्टर इंडस्ट्री में अपनी लीडरशिप को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आती है।

  • इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सरकार का बड़ा फैसला: नए मानक लागू, किसानों को बड़ा फायदा

    इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सरकार का बड़ा फैसला: नए मानक लागू, किसानों को बड़ा फायदा

    सरकार का बड़ा फैसला: इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर के मानक तय, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत


    केंद्र सरकार ने भारतीय कृषि क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश में पहली बार इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए आधिकारिक भारतीय मानक लागू कर दिए गए हैं। इस फैसले से न सिर्फ किसानों को बेहतर और भरोसेमंद मशीनें मिलेंगी, बल्कि ग्रीन एग्रीकल्चर, कम लागत वाली खेती और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। लंबे समय से जिस तकनीक को लेकर किसानों और कंपनियों दोनों में असमंजस बना हुआ था, अब उस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो गए हैं।

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की पहल पर भारत में आईएस 19262:2025 नाम से पहला भारतीय मानक जारी किया गया है। यह मानक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रदर्शन और तकनीकी क्षमता को परखने का एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। अब बाजार में आने वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बिना जांच और प्रमाणन के नहीं बिक सकेंगे, जिससे किसानों को घटिया या अधूरी तकनीक से बचाया जा सकेगा।

    अब तक देश में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का बाजार तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन किसी एक समान मानक के अभाव में किसानों के मन में कई सवाल थे। किसान यह तय नहीं कर पा रहे थे कि कौन सा ट्रैक्टर वास्तव में खेतों के लिए उपयुक्त है और कौन सिर्फ नाम के लिए इलेक्ट्रिक है। नए मानकों के लागू होने से यह भ्रम पूरी तरह खत्म होगा। अब हर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को तय परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा।

    इस मानक के तहत ट्रैक्टर की पीटीओ पावर (PTO Power), ड्रॉबार पावर, बेल्ट, पुली और अन्य जरूरी तकनीकी हिस्सों की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही कंपन मापन, असेंबली निरीक्षण और तकनीकी विनिर्देशों का सत्यापन भी जरूरी किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि जो ट्रैक्टर बाजार में आएगा, वह ताकतवर, सुरक्षित और लंबे समय तक खेती के काम में भरोसेमंद साबित होगा। किसानों को अब यह चिंता नहीं रहेगी कि ट्रैक्टर कुछ महीनों में जवाब दे जाएगा या भारी काम में कमजोर पड़ जाएगा।

    भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तैयार किए गए इन नियमों का मकसद सिर्फ तकनीकी जांच नहीं है, बल्कि किसानों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना है। खेतों में लंबे समय तक काम करने वाले किसानों के लिए मशीन का संतुलन, कंपन का स्तर और संचालन की सहजता बेहद अहम होती है। नए मानकों में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और काम करना ज्यादा आरामदायक बनेगा।

    किसानों के लिए यह फैसला कई मायनों में फायदेमंद साबित होगा। सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदते समय क्वालिटी को लेकर संदेह नहीं रहेगा। तय मानकों के चलते कंपनियां मनमानी नहीं कर सकेंगी और हर मॉडल को एक तय स्तर पर खरा उतरना होगा। इससे किसानों का पैसा सुरक्षित रहेगा और उन्हें सही कीमत पर बेहतर उत्पाद मिलेगा।

    इसके अलावा इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में कम खर्चीले होते हैं। इनमें ईंधन की लागत बेहद कम होती है और रखरखाव पर भी कम पैसा खर्च होता है। डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह किसानों के लिए बड़ी राहत है। लंबे समय में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती की कुल लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी यह बदलाव बेहद अहम है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों से न तो धुआं निकलता है और न ही तेज शोर होता है। इससे खेतों में काम करने वाले किसानों को ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण से राहत मिलेगी। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक सुरक्षित और आरामदायक विकल्प बन सकता है। साथ ही गांवों और कृषि क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर कम होगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

    सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर स्वच्छ और टिकाऊ खेती की दिशा में एक मजबूत कदम हैं। डीजल पर निर्भरता कम होने से न सिर्फ आयात पर दबाव घटेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह पहल डिजिटल और ग्रीन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कृषि उपकरणों को लेकर सब्सिडी, प्रोत्साहन योजनाएं और नई नीतियां भी लाई जा सकती हैं, जिससे किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।

    इस मानक को तैयार करने में सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों की भी अहम भूमिका रही है। सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल कर यह सुनिश्चित किया गया है कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी किसानों के काम आएं। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे एक व्यावहारिक और किसान हितैषी कदम मान रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आईएस 19262:2025 के लागू होने से भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अपनाने की रफ्तार तेज होगी। जब किसानों का भरोसा नई तकनीक पर मजबूत होगा, तो मांग भी बढ़ेगी। इससे कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को बेहतर तकनीक और किफायती दाम के रूप में मिलेगा। भविष्य में यह कदम भारतीय कृषि यंत्रीकरण को वैश्विक स्तर पर भी मजबूत पहचान दिला सकता है।

    कुल मिलाकर, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए भारतीय मानक तय किया जाना किसानों के हित में एक निर्णायक और दूरदर्शी फैसला माना जा रहा है। इससे न केवल खेती की लागत घटेगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और आधुनिक कृषि व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इस कदम से साफ है कि आने वाले वर्षों में भारतीय खेती तेजी से तकनीक आधारित, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनने की ओर बढ़ रही है।

  • लखपति दीदी योजना 2025: महिलाओं की आय होगी 1 लाख+

    लखपति दीदी योजना 2025: महिलाओं की आय होगी 1 लाख+

    लखपति दीदी योजना: यूपी में महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल, एक साल में 1 करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य



    उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए योगी सरकार ने लखपति दीदी योजना को मिशन मोड में लागू कर दिया है। यह योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि Women-led Development के विजन को साकार करने की ठोस पहल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अगले एक साल में 1 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य तय किया है, जबकि कुल 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि जब गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तभी प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक संरचना मजबूत होगी।

    लखपति दीदी योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक प्रगति की सक्रिय भागीदार बनाना है। इस योजना के तहत महिलाओं की सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपए या उससे अधिक तक पहुंचाने पर फोकस किया गया है। खास बात यह है कि यह पहल केंद्र सरकार की सोच से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर लागू की जा रही है, जहां हर जिले में इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) को सौंपी है। मिशन के तहत प्रशिक्षित टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर महिलाओं से संपर्क करेंगी। रणनीति यह सुनिश्चित करने की है कि कोई भी पात्र और इच्छुक महिला इस योजना से वंचित न रह जाए। महिलाओं को उनकी रुचि, कौशल और स्थानीय संसाधनों के आधार पर स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुसार आय सृजन कर सकें।

    लखपति दीदी योजना के अंतर्गत महिलाओं को कृषि और गैर-कृषि आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, सब्जी उत्पादन, बीज उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे कृषि आधारित कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, अगरबत्ती निर्माण, मसाला उद्योग और पापड़ निर्माण जैसे गैर-कृषि कार्यों पर भी विशेष जोर दिया गया है। इन गतिविधियों का चयन इस तरह किया गया है कि महिलाएं घर बैठे या स्थानीय स्तर पर रोजगार कर सकें और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो।

    सरकार का फोकस केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक पूरा सहयोग देने की रणनीति बनाई गई है। योजना के तहत महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, शुरुआती पूंजी सहायता और बैंक लिंकेज के माध्यम से आसान ऋण की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए मार्केट सपोर्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि उनके उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके।

    योगी सरकार का स्पष्ट विजन है कि महिलाएं सिर्फ स्वरोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि आगे चलकर उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाएं। इसीलिए योजना के अंतर्गत वित्त, तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन—इन चारों स्तंभों को मजबूत किया जा रहा है। कई जिलों में महिलाएं पहले से ही इस मॉडल के जरिए अच्छी आय अर्जित कर रही हैं, जिससे अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में गांवों की महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेंगी, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने वाली ग्रामीण उद्यमी बनेंगी।

    लखपति दीदी योजना का लाभ वही महिलाएं ले सकती हैं जो स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी हों और ग्रामीण या शहरी आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत हों। इसके अलावा, लाभार्थी महिला का किसी न किसी आय सृजन गतिविधि में सक्रिय होना आवश्यक है। योजना के तहत अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं है। महिलाओं का चयन ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय और आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के जरिए किया जाता है। योजना से जुड़ी जानकारी के लिए महिलाएं अपने SHG समूह, ग्राम पंचायत कार्यालय, ब्लॉक कार्यालय या NRLM/UPSRLM से जुड़े अधिकारियों से संपर्क कर सकती हैं।

    सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करेगी। जब महिलाओं की आय बढ़ेगी, तो परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। यही वजह है कि इस अभियान को युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि जब गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी प्रदेश सही मायनों में आत्मनिर्भर बनेगा।

    कुल मिलाकर, लखपति दीदी योजना उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, पहचान और नेतृत्व की नई भूमिका भी देगी। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—हर गांव में ऐसी महिलाएं तैयार करना जो आत्मविश्वास के साथ न सिर्फ अपना जीवन संवारें, बल्कि प्रदेश के विकास की कहानी भी लिखें।

  • PM Kisan Beneficiary List 2026: 22वीं किस्त से पहले देखें अपना नाम, पूरा प्रोसेस

    PM Kisan Beneficiary List 2026: 22वीं किस्त से पहले देखें अपना नाम, पूरा प्रोसेस

    पीएम किसान बेनिफिशियरी लिस्ट कैसे देखें, 22वीं किस्त से पहले जरूर जान लें ये जरूरी बातें


    देश के करोड़ों किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) आज भी सबसे भरोसेमंद और लाभकारी योजनाओं में गिनी जाती है। इस योजना के तहत हर साल पात्र किसानों को 6000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। हाल ही में 21वीं किस्त जारी होने के बाद अब किसानों की नजरें पीएम किसान 22वीं किस्त पर टिकी हुई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली किस्त कब आएगी, किन किसानों को पैसा मिलेगा और पीएम किसान बेनिफिशियरी लिस्ट में नाम कैसे चेक करें

    पीएम किसान योजना की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहयोग देना है। योजना के तहत हर चार महीने में 2000 रुपये की किस्त DBT यानी Direct Benefit Transfer के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाती है। अब तक सरकार इस योजना के अंतर्गत 21 किस्तें जारी कर चुकी है, जिनके माध्यम से देशभर के किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। नवंबर 2025 में आई 21वीं किस्त ने लाखों किसानों को राहत दी थी।

    अब बात करें पीएम किसान 22वीं किस्त की तारीख की, तो सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, अगर पिछले ट्रेंड को देखा जाए तो अनुमान लगाया जा रहा है कि 22वीं किस्त फरवरी या मार्च 2026 तक किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है। आमतौर पर केंद्र सरकार हर चार महीने के अंतराल पर किस्त जारी करती है, इसलिए उम्मीद है कि जल्द ही इसकी तारीख को लेकर बड़ा अपडेट सामने आएगा।

    कई बार ऐसा देखा गया है कि पात्र होने के बावजूद किसानों की किस्त अटक जाती है। अगर आपकी पिछली किस्त नहीं आई है या आपको डर है कि 22वीं किस्त अटक सकती है, तो इसके पीछे कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण है PM Kisan e-KYC पूरा न होना। इसके अलावा, बैंक अकाउंट का आधार से लिंक न होना, बैंक खाता नंबर या IFSC कोड में गलती, भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा न होना, या फिर नाम, आधार और बैंक डिटेल्स में गड़बड़ी भी भुगतान रुकने की बड़ी वजह बन सकती है। इन सभी कारणों को समय रहते ठीक करना बेहद जरूरी है।

    सरकार ने अब पीएम किसान e-KYC को अनिवार्य कर दिया है। बिना e-KYC के आगे की किस्त मिलना मुश्किल हो सकता है। किसान दो तरीकों से e-KYC पूरा कर सकते हैं। पहला तरीका है ऑनलाइन। इसके लिए किसान pmkisan.gov.in की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Farmers Corner में मौजूद e-KYC विकल्प पर क्लिक करें, आधार नंबर डालें और OTP के जरिए सत्यापन पूरा करें। दूसरा तरीका है CSC सेंटर। अगर ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, तो नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक e-KYC कराई जा सकती है।

    अब सबसे अहम सवाल, पीएम किसान बेनिफिशियरी लिस्ट कैसे देखें। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपका नाम लाभार्थियों की सूची में शामिल है या नहीं, तो इसकी प्रक्रिया बेहद आसान है। किसान सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां Farmers Corner सेक्शन में जाकर Beneficiary List पर क्लिक करें। इसके बाद राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव का चयन करें। जैसे ही आप Get Report पर क्लिक करेंगे, आपके सामने पूरी लिस्ट खुल जाएगी, जिसमें आप अपना नाम, पिता का नाम और भुगतान की स्थिति देख सकते हैं। यह तरीका उन किसानों के लिए बहुत उपयोगी है, जो यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे अगली किस्त के लिए पात्र हैं या नहीं।

    इसके अलावा किसान पीएम किसान किस्त स्टेटस चेक भी कर सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट पर Beneficiary Status विकल्प चुनें और आधार नंबर, मोबाइल नंबर या बैंक अकाउंट नंबर डालें। इससे यह पता चल जाएगा कि पिछली किस्त कब आई थी और अगली किस्त का स्टेटस क्या है।

    आज के समय में PM Kisan Yojana Latest Update, PM Kisan 22th Installment News, PM Kisan Beneficiary List 2026, और PM Kisan e-KYC Last Date जैसे कीवर्ड्स किसानों के बीच सबसे ज्यादा सर्च किए जा रहे हैं। इसकी वजह साफ है—यह योजना सीधे किसानों की आमदनी से जुड़ी हुई है। थोड़ी सी लापरवाही, जैसे e-KYC न कराना या बैंक डिटेल्स में गलती, किसानों को हजारों रुपये के नुकसान में डाल सकती है।

    अगर आप चाहते हैं कि पीएम किसान 22वीं किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में आए, तो अभी से अपनी जानकारी चेक कर लें। e-KYC पूरी करें, बैंक खाते को आधार से लिंक करवाएं और जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन सुनिश्चित करें। साथ ही समय-समय पर PM Kisan Official Website पर जाकर अपडेट देखते रहें, ताकि कोई जरूरी सूचना आपसे छूट न जाए।

    कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा बनी हुई है। सही जानकारी और समय पर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करके आप इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं। अगर आपने अभी तक पीएम किसान बेनिफिशियरी लिस्ट में अपना नाम नहीं चेक किया है, तो देर न करें, क्योंकि अगली किस्त से पहले यही एक छोटा सा कदम आपके खाते में सीधे 2000 रुपये पहुंचा सकता है।