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Milk Price in India: फ्लिपकार्ट द्वारा 1 रुपये में दूध बेचने के खिलाफ BAMUL ने CCI में दर्ज कराई शिकायत, PM मोदी को लिखा ईमेल, किसानों को ₹38-40 लीटर मिलता है, 1 रुपये में बेचना कैसे संभव, उठे सवाल?

Milk Price in India
Milk Price in India

Milk Price in India: बैंगलोर मिल्क यूनियन लिमिटेड यानी BAMUL के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका दावा है कि ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart केवल 1 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेच रही है। सुरेश ने इस मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ईमेल लिखकर जांच की मांग की है। BAMUL का कहना है कि इस ऑफर के कारण उनकी दूध बिक्री में 40,000 से 50,000 लीटर तक की गिरावट आ गई है। किसानों को अभी 38 से 40 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया जाता है ऐसे में 1 रुपये में दूध बेचना किसानों की आजीविका पर सीधा हमला है।

Milk Price in India: Flipkart का 1 रुपये दूध विवाद – मुख्य तथ्य एक नजर में

विवरणजानकारी
विवादित कंपनीFlipkart
विवादित कीमत1 रुपये प्रति लीटर दूध
शिकायतकर्ताडी.के. सुरेश, BAMUL अध्यक्ष
शिकायत कहांभारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI)
ईमेल किसेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
शिकायत की धाराCCI धारा 19(1)(a)
BAMUL की बिक्री में गिरावट40,000 से 50,000 लीटर
किसान को दूध का भाव₹38 से ₹40 प्रति लीटर
ऑफर पर अनुमानित खर्चकरीब ₹2,000 करोड़
BAMUL की मांगऑफर वापस लो, जांच हो

Milk Price in India: डी.के. सुरेश ने क्या कहा – पूरा बयान

BAMUL के अध्यक्ष और पूर्व सांसद डी.के. सुरेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। गौरतलब है कि डी.के. सुरेश कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के भाई हैं।

उनका साफ कहना है कि दूध कोई 1 रुपये की फ्लैश डील नहीं है। यह लाखों किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ विषय है। दूध के हर एक लीटर के पीछे किसानों की मेहनत और पसीना लगा होता है।

उन्होंने आगे कहा कि Flipkart निवेशकों के पैसे से चल रहे डिस्काउंट ऑफर के जरिए 1 रुपये में दूध बेच रहा है। इससे किसानों की गरिमा और कई सालों में खड़े हुए सहकारी डेयरी आंदोलन को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

Milk Price in India: Flipkart का जवाब, कंपनी ने दी सफाई

Flipkart ने इस विवाद पर सफाई देते हुए अपना पक्ष रखा।

Flipkart का तर्कविवरण
ऑफर का कारणसीमित समय का प्रमोशनल ऑफर
बैंकिंग पार्टनरकुछ ऑफर बैंक पार्टनर के साथ
कीमत तय करने का अधिकारविक्रेता खुद तय करते हैं
किसान भुगतानडेयरी पार्टनर को पूरी कीमत मिलती है
प्रतिबद्धताकिसान और सहकारी समितियों का साथ

कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार Flipkart के मंच पर किसी भी उत्पाद की कीमत विक्रेता खुद तय करते हैं। डेयरी से जुड़े सभी साझेदारों और विक्रेताओं को उनके उत्पाद की पूरी तय कीमत मिलती है इसलिए किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।

Milk Price in India: BAMUL की बिक्री पर पड़ा असर – चिंताजनक आंकड़े

BAMUL के अध्यक्ष के अनुसार इस ऑफर की वजह से उनकी दूध बिक्री में करीब 40,000 से 50,000 लीटर प्रतिदिन तक की गिरावट आ गई है। यह एक बहुत बड़ी मार है।

पहलूस्थिति
बिक्री में गिरावट40,000 से 50,000 लीटर
किसान को भुगतान₹38 से ₹40 प्रति लीटर
Flipkart की बिक्री कीमत1 रुपये प्रति लीटर
अंतर₹37 से ₹39 का घाटा प्रति लीटर
ऑफर का कुल खर्चकरीब ₹2,000 करोड़

जब किसानों को 38 से 40 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है तो 1 रुपये में दूध बेचने का मतलब है कि प्रत्येक लीटर पर 37 से 39 रुपये का घाटा उठाया जा रहा है। यह किसी भी व्यापारिक तर्क से समझ के बाहर है।

Milk Price in India: दूध की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

BAMUL के अध्यक्ष ने केवल कीमत नहीं बल्कि दूध की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि Flipkart दूध कहां से खरीद रही है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं दूध में पाउडर मिलाकर तो नहीं बेचा जा रहा। उन्होंने दूध के सैंपल प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने की बात भी कही है।

अगर सैंपल में मिलावट पाई जाती है तो यह खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत एक अलग कानूनी मामला बन सकता है।

Milk Price in India: BAMUL की सरकार से अपील

BAMUL ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

डी.के. सुरेश ने लोगों से भी अपील की कि वे स्थानीय सहकारी डेयरी ब्रांड नंदिनी को ही चुनें जो कर्नाटक मिल्क फेडरेशन का भरोसेमंद ब्रांड है।

Milk Price in India: ई-कॉमर्स और डेयरी सहकारी आंदोलन – बड़ा संघर्ष

यह विवाद एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है। देश में दशकों पुराना सहकारी डेयरी आंदोलन है जिसमें अमूल, नंदिनी, मदर डेयरी और सरस जैसे ब्रांड लाखों किसानों की आजीविका का आधार हैं। अगर बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां निवेशकों के पैसे से घाटे में दूध बेचने लगें तो ये सहकारी संस्थाएं बाजार में टिक नहीं पाएंगी। इसका सीधा नुकसान उन किसानों को होगा जो हर सुबह दूध निकालकर सहकारी समितियों में जमा करते हैं।

डेयरी क्षेत्र विशेषज्ञ और कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद का कहना है कि शिकारी मूल्य निर्धारण यानी प्रेडेटरी प्राइसिंग एक खतरनाक रणनीति है। कोई भी कंपनी घाटे में सामान तब बेचती है जब उसका लक्ष्य बाजार से प्रतिद्वंदियों को हटाकर एकाधिकार स्थापित करना हो। डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस पर सख्त नियमन जरूरी है।

FAQ – Flipkart 1 रुपये दूध विवाद से जुड़े सवाल (Milk Price in India)

सवाल: Flipkart 1 रुपये में दूध कैसे बेच रहा है? जवाब: Flipkart का कहना है कि यह एक सीमित समय का प्रमोशनल ऑफर है जिसे कभी-कभी बैंकिंग पार्टनर के साथ मिलकर दिया जाता है। BAMUL का आरोप है कि कंपनी निवेशकों के पैसे से करीब ₹2,000 करोड़ घाटा उठाकर यह ऑफर दे रही है।

सवाल: इससे किसानों को क्या नुकसान है? जवाब: BAMUL की दूध बिक्री में 40,000 से 50,000 लीटर की गिरावट आई है। जब बाजार में 1 रुपये में दूध मिलेगा तो लोग सहकारी डेयरी से 50 से 60 रुपये में दूध क्यों खरीदेंगे। इससे सहकारी संस्थाओं की आय घटेगी और किसानों को भी कम भुगतान होगा।

सवाल: BAMUL ने क्या कार्रवाई की है? जवाब: BAMUL के अध्यक्ष ने CCI धारा 19(1)(a) के तहत Flipkart के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है और PM मोदी को ईमेल लिखकर जांच की मांग की है।

सवाल: क्या दूध की गुणवत्ता की भी जांच होगी? जवाब: हां। BAMUL ने संदेह जताया है कि Flipkart का सस्ता दूध शुद्ध नहीं हो सकता। दूध में पाउडर मिलाने की आशंका पर सैंपल प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं।

Milk Price in India: निष्कर्ष

Flipkart का 1 रुपये में दूध बेचने का विवाद केवल एक ऑफर का मामला नहीं है बल्कि यह देश के करोड़ों डेयरी किसानों की आजीविका और दशकों पुराने सहकारी डेयरी आंदोलन पर एक बड़े खतरे का संकेत है। किसानों को 38 से 40 रुपये प्रति लीटर देकर 1 रुपये में बेचना एक ऐसी रणनीति है जो बाजार में एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश हो सकती है। CCI की जांच और PM को की गई अपील इस बात की गवाह है कि मामला कितना गंभीर है। सरकार को चाहिए कि किसानों और सहकारी संस्थाओं के हितों की रक्षा के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों की शिकारी मूल्य नीति पर सख्त नियम बनाए।

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