Potato Mandi Bhav 10 March 2026: देश की मंडियों में आलू उगाने वाले किसानों के लिए इस वक्त बेहद मुश्किल दौर चल रहा है। पिछले पांच महीनों से आलू की कीमतों में लगातार गिरावट (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) का सिलसिला जारी है और यह गिरावट अब राजनीतिक रंग भी ले चुकी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि नवंबर 2025 में जो आलू 1879 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था वह मार्च 2026 में गिरकर 1185 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया। यानी पांच महीनों में करीब 694 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट जो लगभग 37 फीसदी बैठती है।
इस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। किसान संगठन आलू पर MSP की मांग कर रहे हैं और विशेषज्ञ निर्यात बढ़ाने और कोल्ड स्टोरेज सुधारने की सलाह दे रहे हैं।
Potato Mandi Bhav 10 March 2026: पांच महीने की गिरावट – सरकारी आंकड़ों की कहानी
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना नेटवर्क एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़े यह स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं कि आलू की कीमतों में यह गिरावट किसी एक महीने की बात नहीं बल्कि लगातार पांच महीनों से जारी एक दर्दनाक सिलसिला है।
| महीना | औसत थोक भाव (रुपये/क्विंटल) | पिछले महीने से बदलाव |
|---|---|---|
| नवंबर 2025 | 1,879.67 | — |
| दिसंबर 2025 | 1,584.05 | -295.62 (-15.7%) |
| जनवरी 2026 | 1,421.30 | -162.75 (-10.3%) |
| फरवरी 2026 | 1,266.59 | -154.71 (-10.9%) |
| मार्च 2026 | 1,185.65 | -80.94 (-6.4%) |
| कुल गिरावट | -694.02 रुपये | -36.9% |
इस तालिका से साफ है कि दिसंबर में सबसे तेज गिरावट (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) आई। उसके बाद जनवरी और फरवरी में भी दोहरे अंकों में कमी रही। मार्च में गिरावट की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई लेकिन दाम और नीचे ही गए।
Potato Mandi Bhav 10 March 2026: राज्यवार आंकड़े – किस राज्य में कितना टूटा भाव
देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में कीमतों की स्थिति और भी चिंताजनक है। नीचे दी गई तालिका में नवंबर 2025 और मार्च 2026 के भाव (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) की तुलना दी गई है।
| राज्य | नवंबर 2025 भाव (रु/क्विंटल) | मार्च 2026 भाव (रु/क्विंटल) | गिरावट (रुपये) | गिरावट (%) |
|---|---|---|---|---|
| मध्य प्रदेश | 2,203 | 460 | -1,743 | -79.1% |
| उत्तर प्रदेश | 1,224 | 602 | -622 | -50.8% |
| बिहार | 1,612 | 956 | -656 | -40.7% |
| पंजाब | गिरावट दर्ज | गिरावट दर्ज | उल्लेखनीय | उल्लेखनीय |
| हरियाणा | गिरावट दर्ज | गिरावट दर्ज | उल्लेखनीय | उल्लेखनीय |
| गुजरात | गिरावट दर्ज | गिरावट दर्ज | उल्लेखनीय | उल्लेखनीय |
| पश्चिम बंगाल | गिरावट दर्ज | गिरावट दर्ज | उल्लेखनीय | उल्लेखनीय |
| केरल | — | 3,979 | अपेक्षाकृत ऊंचा | स्थानीय उत्पादन कम |
| तमिलनाडु | — | 3,066 | अपेक्षाकृत ऊंचा | स्थानीय उत्पादन कम |
इस तालिका से सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मध्य प्रदेश का है जहां आलू का भाव नवंबर 2025 में 2203 रुपये से गिरकर मार्च 2026 में मात्र 460 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। यह करीब 79 फीसदी की गिरावट है जो किसी भी किसान की कमर तोड़ने के लिए काफी है। उत्तर प्रदेश में भी लगभग 51 फीसदी की गिरावट (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) आई है। उत्तर भारत के ये राज्य देश के सबसे बड़े आलू उत्पादक हैं और यहां के किसानों की तकलीफ सबसे ज्यादा है।
दक्षिण भारत की तस्वीर उलट है। केरल में मार्च 2026 में आलू का औसत भाव (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) करीब 3979 रुपये प्रति क्विंटल है और तमिलनाडु में यह 3066 रुपये के आसपास है। इन राज्यों में आलू का स्थानीय उत्पादन बहुत कम होता है इसलिए दूसरे राज्यों से आने वाली आपूर्ति पर निर्भरता रहती है और भाव ऊंचे बने रहते हैं।
Potato Mandi Bhav 10 March 2026: क्यों गिर रहे हैं आलू के दाम?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण है नई फसल की बढ़ती आवक। फरवरी और मार्च में उत्तर भारत की मंडियों में आलू की भारी मात्रा में आवक होती है। जब एक साथ इतना माल मंडी में आता है तो मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है और कीमतें गिरती हैं।
दूसरा कारण है इस बार उत्पादन में अनुमानित बढ़ोतरी। आलू की फसल इस साल पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है जिससे बाजार में अतिरिक्त दबाव बन गया है। तीसरा कारण है ईरान युद्ध के कारण निर्यात में आई कमी। भारत के आलू का एक हिस्सा खाड़ी देशों को निर्यात होता था लेकिन मध्य-पूर्व संकट के कारण वह भी बाधित हुआ है। मुंबई के बंदरगाह पर 1250 से अधिक कृषि निर्यात कंटेनर अटके हुए हैं।
Potato Mandi Bhav 10 March 2026: अखिलेश यादव का BJP पर हमला
आलू के दाम गिरने पर सियासत भी गर्म हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आलू के दाम (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) गिरने से किसान बर्बाद हो रहे हैं लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा को किसानों की परेशानी से ज्यादा अपनी राजनीतिक सत्ता की चिंता है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता चुनाव प्रचार के लिए तो हमेशा उपलब्ध रहते हैं लेकिन किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए उनके पास वक्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ऐसी हैं जिनसे फसलों के दाम इतने कम हो जाते हैं कि किसानों की लागत भी नहीं निकलती।
सपा प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही तो किसान खेती छोड़ने पर मजबूर होंगे और अपनी जमीन बेचने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वह दिन दूर नहीं जब किसान खुद अपने ही खेत की पैदावार बाजार से खरीदने पर मजबूर हो जाएं।
Potato Mandi Bhav 10 March 2026: किसानों की मांग – आलू पर भी हो MSP
लगातार गिरते दामों के बीच किसान संगठनों ने आलू पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (Potato Mandi Bhav 10 March 2026) तय करने की मांग तेज कर दी है। किसानों का कहना है कि जब तक आलू पर MSP नहीं आता तब तक उन्हें उनकी लागत के बराबर भी दाम नहीं मिलेगा। आलू की खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और भंडारण मिलाकर काफी लागत आती है। जब बाजार भाव इस लागत से नीचे चला जाता है तो किसान को घाटे में फसल बेचनी पड़ती है।
फिलहाल सरकार गेहूं, धान, सरसों जैसी फसलों पर MSP देती है लेकिन आलू, प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों पर कोई MSP नहीं है। इन सब्जियों के दाम पूरी तरह बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। जब उत्पादन ज्यादा हो तो दाम धड़ाम होते हैं और किसान को नुकसान होता है। जब उत्पादन कम हो तो दाम आसमान पर चढ़ जाते हैं और उपभोक्ता परेशान होता है।
Potato Mandi Bhav 10 March 2026: विशेषज्ञों का सुझाव – निर्यात और कोल्ड स्टोरेज ही समाधान
कृषि अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आलू के दाम स्थिर रखने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं। पहली है निर्यात बढ़ाना। भारत दुनिया के सबसे बड़े आलू उत्पादक देशों में से एक है लेकिन निर्यात में हमारी हिस्सेदारी बहुत कम है। अगर निर्यात बढ़े तो घरेलू बाजार पर आपूर्ति का दबाव कम होगा और दाम स्थिर रहेंगे। दूसरी जरूरत है कोल्ड स्टोरेज क्षमता में सुधार की। अभी बहुत से किसानों के पास फसल रोककर रखने की सुविधा नहीं है इसलिए वे कम दाम पर भी माल बेचने को मजबूर होते हैं। तीसरी जरूरत है आलू प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देने की। चिप्स, फ्रोजन आलू और अन्य प्रोसेस्ड उत्पाद बनाने वाले उद्योग अगर किसानों से सीधे खरीद करें तो उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं।
अगर सरकार इन तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करे तो आलू किसानों की स्थिति सुधर सकती है। लेकिन फिलहाल जब तक ये उपाय नहीं होते तब तक उत्तर भारत के लाखों आलू किसान इसी तरह घाटे में फसल बेचने को मजबूर रहेंगे।
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