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Feed-Water in Poultry: पोल्ट्री फार्म में फीड और पानी की लापरवाही बन सकती है मुर्गियों की जान की दुश्मन, जानें सही प्रबंधन के तरीके और बचाव के उपाय

Feed-Water in Poultry
Feed-Water in Poultry

Feed-Water in Poultry: मुर्गी पालन यानी पोल्ट्री फार्मिंग आज भारत के लाखों किसानों और पशुपालकों की आजीविका का एक अहम जरिया बन चुका है। अंडे देने वाली मुर्गियां हों या चिकन के लिए तैयार किए जाने वाले मुर्गे, दोनों के सही स्वास्थ्य प्रबंधन पर ही पूरे कारोबार की सफलता टिकी होती है। लेकिन एक चौंकाने वाली बात यह है कि मुर्गे-मुर्गियों में सबसे ज्यादा जो बीमारियां होती हैं वे पेट से जुड़ी होती हैं और इन बीमारियों का सबसे बड़ा कारण वह फीड और पानी होता है जो उन्हें रोजाना दिया जाता है। यह सुनने में जरूर अजीब लगता है क्योंकि जो चीज जीवन और विकास का आधार होती है वही जानलेवा कैसे हो सकती है। लेकिन पोल्ट्री विशेषज्ञों की मानें तो फीड और पानी के गलत प्रबंधन और साफ-सफाई में लापरवाही के चलते ही अधिकांश बीमारियां पोल्ट्री फार्म में फैलती हैं। इससे उत्पादन घटता है, अंडे और चिकन की गुणवत्ता खराब होती है और अंततः पोल्ट्री पालक (Feed-Water in Poultry) को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस समस्या की जड़ (Feed-Water in Poultry) क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

Feed-Water in Poultry: फीड और पानी कैसे बन जाते हैं बीमारी का कारण

पोल्ट्री फार्म में रोजाना मुर्गियों को फीड खिलाया जाता है और पानी पिलाया जाता है। लेकिन हर बार मुर्गियां सारा फीड (Feed-Water in Poultry) नहीं खातीं और सारा पानी नहीं पीतीं। बचा हुआ फीड और पानी अगर फार्म में ही पड़ा रहे तो धीरे-धीरे उसमें नमी जमा होने लगती है। नमी के साथ ही फफूंद और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। जब मुर्गियां इस बचे हुए और दूषित फीड को खाती हैं या इस गंदे पानी को पीती हैं तो उनके पेट में संक्रमण हो जाता है।

इसके अलावा मुर्गियों के मल के संपर्क में आया फीड भी बेहद खतरनाक होता है। पोल्ट्री फार्म में मुर्गियां जहां खाती-पीती हैं वहीं उनका मल भी गिरता रहता है। अगर फार्म की नियमित सफाई नहीं होती तो मल फीड और पानी में मिल जाता है। इससे साल्मोनेला, ई-कोलाई और अन्य हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इन बैक्टीरिया से होने वाली पेट की बीमारियां मुर्गियों में बहुत तेजी से फैलती हैं और एक बार फैलने के बाद पूरे फार्म को अपनी चपेट में ले लेती हैं।

पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या न केवल मुर्गियों की सेहत को बर्बाद करती है बल्कि फार्म में काम करने वाले कर्मचारियों की सेहत पर भी बुरा असर डालती है। उत्पादित अंडे और चिकन की गुणवत्ता खराब हो जाती है जिसके कारण बाजार में उचित दाम नहीं मिलते। इस सब का अंतिम परिणाम यह होता है कि पोल्ट्री फार्म की लागत बढ़ जाती है और मुनाफा घट जाता है।

Feed-Water in Poultry: बचे हुए पोल्ट्री फीड का सही तरीके से करें निपटान

फीड प्रबंधन में सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि मुर्गियों को कभी भी खराब, बासी या फफूंद लगा फीड न खिलाएं। ताजा और साफ फीड ही मुर्गियों को दें। जो फीड नमी के संपर्क में आ गया हो या जिस पर फफूंद दिख रही हो उसे तुरंत फेंक दें। इस तरह का फीड खाने से मुर्गियों में माइकोटॉक्सिन पॉइजनिंग हो सकती है जो बेहद घातक होती है।

मुर्गियों के मल के संपर्क में आए फीड को भी तत्काल हटा देना चाहिए। ऐसे फीड को फार्म में पड़ा रहने देना किसी बड़ी बीमारी को खुला निमंत्रण देने जैसा है। फार्म से निकले खराब फीड को इधर-उधर न फेंकें बल्कि उसे मिट्टी में गड्ढा खोदकर दबा दें या उसकी जैविक खाद बना लें। इससे न केवल बीमारियों का खतरा कम होगा बल्कि एक उपयोगी उत्पाद भी तैयार होगा।

फीड को हमेशा सूखी और हवादार जगह पर बंद कंटेनर में रखें। नमी से बचाना सबसे जरूरी है। फीड स्टोरेज एरिया को चूहों और कीड़ों से भी बचाना चाहिए क्योंकि ये भी फीड को दूषित कर देते हैं।

Feed-Water in Poultry: पोल्ट्री फार्म में पानी प्रबंधन के जरूरी उपाय

पानी के गलत प्रबंधन से भी पोल्ट्री फार्म में बीमारियां तेजी से फैलती हैं। फार्म के आसपास कभी भी गंदा पानी जमा न होने दें। रुका हुआ पानी मक्खियों, मच्छरों और अन्य कीड़ों का घर बन जाता है जो बीमारियां फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। फार्म से निकलने वाले गंदे पानी को उचित नाली या गड्ढे में बहाने की व्यवस्था पहले से करें।

फार्म के अंदर भी पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसके लिए फर्श की ढलान सही दिशा में होनी चाहिए ताकि पानी अपने आप बाहर निकल जाए। जल प्रदूषण से बचाव के लिए पोल्ट्री फार्म को ऊंचे चबूतरे पर या कंक्रीट के मजबूत फर्श पर बनाना चाहिए। कच्चे फर्श पर पानी और मल मिलकर कीचड़ बनाते हैं जो संक्रमण का बड़ा स्रोत होता है।

जहां पानी जमा किया जाता है या पानी की टंकी होती है उसके आसपास गोबर और खाद कभी न जमा करें। इससे पानी का प्रदूषण हो सकता है। पीने के पानी की टंकी और नाद को नियमित रूप से साफ करें और उनमें क्लोरीन या अन्य जल शोधक मिलाएं। मुर्गियों को हमेशा साफ और ताजा पानी ही पीने को दें।

Feed-Water in Poultry: फार्म में साफ-सफाई के अनिवार्य नियम

पोल्ट्री फार्म (Feed-Water in Poultry) की नियमित और सही तरीके से सफाई करना बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। फार्म से निकले कचरे का निपटान करते समय हमेशा दस्ताने और जूते पहनें। यह न केवल कर्मचारी की सेहत की रक्षा करता है बल्कि बाहर से संक्रमण फार्म में आने से भी रोकता है।

खाद और मरी हुई मुर्गियों का निपटान करने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं और उसके बाद ही दूसरे काम हाथ में लें। यह एक बुनियादी लेकिन बेहद जरूरी बात है जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

मरी हुई मुर्गियों के निपटान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। मरी हुई मुर्गी को फार्म के अंदर या उसके पास कभी न रखें। उसे फार्म से दूर ले जाकर जमीन में गहरा गड्ढा करके दबा दें। अगर संभव हो तो जला देना और भी बेहतर उपाय है। मरी हुई मुर्गियों को कभी भी खुले मैदान, तालाब या नदी में नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि इससे बीमारी और भी तेजी से फैल सकती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।

मरी हुई मुर्गियों के निपटान में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों को कीटाणुनाशक से अच्छी तरह साफ करें। फार्म में जहां कचरा और खाद जमा होती है वहां हर किसी का आना-जाना बंद करें। केवल जिम्मेदार और प्रशिक्षित कर्मचारी ही उस जगह जाएं।

Feed-Water in Poultry: बीमारी फैलने पर होता है बड़ा नुकसान

अगर पोल्ट्री फार्म (Feed-Water in Poultry) में एक बार बीमारी फैल जाए तो उसका नुकसान बहुत बड़ा होता है। मुर्गियों की उत्पादन क्षमता घट जाती है। अंडे कम मिलते हैं और उनकी गुणवत्ता भी खराब होती है। मुर्गियों का वजन नहीं बढ़ता जिससे चिकन उत्पादन प्रभावित होता है। इलाज पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है और कभी-कभी बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत भी हो जाती है। इन सब कारणों से पोल्ट्री पालक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है

इसलिए बेहतर है कि बीमारी आने का इंतजार करने की बजाय फीड, पानी और साफ-सफाई के सही प्रबंधन से उसे आने से ही रोका जाए। थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से पोल्ट्री फार्म को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रखा जा सकता है

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