Sugar Production: देश के चीनी उद्योग के लिए 2025-26 का सीजन उम्मीद से कहीं कमजोर साबित होता दिख रहा है। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन यानी AISTA ने इस चीनी सीजन के लिए अपने उत्पादन अनुमान में बड़ी कटौती कर दी है। जनवरी में जब पहला अनुमान जारी किया गया था तब उत्पादन 296 लाख टन रहने की बात कही गई थी। लेकिन अब महज एक महीने के भीतर यह अनुमान घटाकर 283 लाख टन कर दिया गया है। यह कटौती 13 लाख टन की है जो एक बहुत बड़ा फर्क है। इस संशोधन ने उन वैश्विक बाजार की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है जो भारत से रिकॉर्ड चीनी उत्पादन (Sugar Production) की आस लगाए बैठे थे। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने भी अपना अनुमान घटाकर 292.9 लाख टन कर दिया है। आखिर क्यों घटा यह उत्पादन अनुमान और किन राज्यों में कितनी कमी आई, आइए विस्तार से समझते हैं।
Sugar Production: कुल उत्पादन 315 लाख टन लेकिन उपलब्ध चीनी केवल 283 लाख टन
AISTA के ताजा अनुमान को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि कुल उत्पादन और उपलब्ध चीनी में फर्क होता है। एसोसिएशन का कहना है कि 2025-26 सीजन में देश में कुल चीनी उत्पादन (Sugar Production) लगभग 315 लाख टन रहने का अनुमान है। लेकिन इसमें से करीब 32 लाख टन गन्ना इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा जाएगा। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार गन्ने के रस और बी-हेवी मोलासेस से इथेनॉल बनाने को प्रोत्साहित कर रही है। इस डायवर्जन के बाद वास्तव में बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा घटकर 283 लाख टन पर आ जाती है। यही वह आंकड़ा है जो बाजार और किसानों दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
Sugar Production: महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे ज्यादा प्रभावित
उत्पादन (Sugar Production) में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण मौसम की अनिश्चितता रही है। AISTA की क्रॉप कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस सीजन में देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों को असामान्य मौसम की मार झेलनी पड़ी। महाराष्ट्र और कर्नाटक में लगातार बारिश और लंबे समय तक आसमान में छाए बादलों ने गन्ने की बढ़वार और पकने की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया। जब गन्ने को पकने के लिए धूप चाहिए होती है तब बादल छाए रहने से उसमें शर्करा की मात्रा ठीक से नहीं बढ़ पाती।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में तो स्थिति और भी गंभीर रही। अक्टूबर के महीने में हुई भारी बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई। इससे न केवल गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा बल्कि खेत प्रबंधन और कटाई से जुड़े काम भी बुरी तरह प्रभावित हुए। खेत में पानी भरा होने की वजह से ट्रैक्टर और हार्वेस्टर मशीनें नहीं चल सकीं जिससे कटाई में देरी हुई और फसल को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ा।
Sugar Production: रैटून फसल में समय से पहले फूल – बड़ी समस्या
इस सीजन में एक और असामान्य समस्या सामने आई जिसने उत्पादन (Sugar Production) को प्रभावित किया। कई इलाकों में रैटून फसल यानी कटाई के बाद जड़ से दोबारा उगने वाले गन्ने में समय से पहले फूल आने की समस्या देखी गई। जब गन्ने में समय से पहले फूल आ जाते हैं तो पौधे की ऊर्जा चीनी बनाने की बजाय फूल और बीज बनाने में खर्च होने लगती है। इससे गन्ने में शर्करा की मात्रा घट जाती है और उत्पादकता में भारी कमी आती है। यह समस्या खासतौर पर मौसम में असामान्य बदलाव आने पर होती है।
Sugar Production: राज्यवार उत्पादन अनुमान में कितनी कमी
देश के तीन सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देते हैं। तीनों राज्यों में इस बार उत्पादन (Sugar Production) अनुमान में कटौती की गई है।
महाराष्ट्र में पहले उत्पादन 108.1 लाख टन रहने का अनुमान था जो अब घटाकर 99.7 लाख टन कर दिया गया है। यानी करीब 8.4 लाख टन की कमी। हालांकि राहत की बात यह है कि यह आंकड़ा पिछले सीजन के 81 लाख टन से अभी भी काफी बेहतर है।
उत्तर प्रदेश में उत्पादन अनुमान 94.1 लाख टन से घटाकर 91 लाख टन कर दिया गया है। यूपी का यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 93 लाख टन से भी थोड़ा कम है जो चिंता की बात है। गन्ना उत्पादन में यूपी का प्रभुत्व होने के बावजूद इस बार मौसम और अन्य कारणों से उत्पादन में गिरावट आई है।
कर्नाटक में भी उत्पादन अनुमान 49.1 लाख टन से मामूली घटकर 48 लाख टन रह गया है। यहां गिरावट कम है और यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 43 लाख टन से बेहतर है जो थोड़ी राहत देता है।
Sugar Production: घरेलू बाजार पर क्या होगा असर
उत्पादन अनुमान में इस कटौती का असर घरेलू चीनी बाजार पर भी पड़ सकता है। जब उपलब्ध चीनी की मात्रा कम होती है तो बाजार में कीमतें बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक है और निर्यात पर पहले से ही नियंत्रण है। ऐसे में घरेलू बाजार में चीनी की कमी होने की संभावना कम है लेकिन कीमतों में हल्की तेजी देखी जा सकती है। गन्ना किसानों के लिए यह खबर मिश्रित है क्योंकि कम उत्पादन से कीमतें तो बढ़ सकती हैं लेकिन अगर मिलों की आय घटती है तो गन्ने का भुगतान प्रभावित होने का जोखिम भी रहता है।
कुल मिलाकर 2025-26 का चीनी सीजन उम्मीदों से कमजोर रहने वाला है और इसका मुख्य कारण मौसम की अनिश्चितता और इथेनॉल डायवर्जन है।
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