Holi 2026: होली के त्योहार पर बाजार में तरह-तरह के केमिकल वाले रंगों की भरमार होती है जो त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन इस बार बिहार के भागलपुर से एक ऐसी खुशखबरी आई है जो होली के उत्साह को दोगुना कर देगी। यहां की एक उद्यमिता सह स्वयं सहायता समूह ने एक ऐसा अनोखा और खास गुलाल तैयार किया है जो न सिर्फ पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है बल्कि इसे त्वचा पर लगाने के साथ-साथ खाया भी जा सकता है। जी हां, यह कोई अफवाह नहीं है। इस गुलाल को हलवे में मिलाकर खाने का आनंद भी उठाया जा सकता है। इस समूह की संचालिका डॉ प्रिया सोनी के नेतृत्व में महिलाएं मिलकर यह खास अरोमाथेरेपी आधारित ऑर्गेनिक गुलाल बना रही हैं।
Holi 2026: क्या है इस गुलाल की खासियत?
इस ऑर्गेनिक गुलाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में किसी भी प्रकार के रासायनिक रंग या हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। गाजर, चुकंदर, गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसी पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्री से इस गुलाल को तैयार किया जाता है। इन सभी सामग्रियों को इस तरह से प्रोसेस किया जाता है कि इनका रंग और सुगंध दोनों बने रहें। गाजर और चुकंदर से लाल और गुलाबी रंग मिलता है, गुलाब की पंखुड़ियों से गुलाबी और हल्का लाल रंग आता है जबकि लैवेंडर और चंदन सुगंध और हल्के बैंगनी रंग में योगदान करते हैं। चूंकि ये सब खाने योग्य सामग्री से बना है इसलिए इसे हलवे जैसे पकवानों में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
Holi 2026: अरोमाथेरेपी का अनूठा मेल
डॉ प्रिया सोनी ने बताया कि इस गुलाल को सिर्फ होली खेलने के लिए नहीं बनाया गया है बल्कि यह लोगों को मानसिक सुकून भी देगा। इसे बनाने में अरोमाथेरेपी यानी सुगंध चिकित्सा के सिद्धांतों को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस गुलाल में मिलाई गई प्राकृतिक सुगंध सीधे मस्तिष्क के भावनात्मक केंद्र पर असर डालती है जिससे मूड बेहतर होता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लैवेंडर और गुलाब की खुशबू तनाव को कम करने और मन को शांत रखने के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। होली के रंग-बिरंगे माहौल में यह सुगंधित गुलाल उत्सव को और भी यादगार और आनंददायक बना देता है।
Holi 2026: बच्चों और बुजुर्गों के लिए है खास सुरक्षित
बाजार में मिलने वाले अधिकांश रासायनिक रंग बच्चों और बुजुर्गों की नाजुक त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इनसे एलर्जी, त्वचा में जलन और आंखों में समस्या हो सकती है। लेकिन भागलपुर का यह ऑर्गेनिक गुलाल पूरी तरह रसायन मुक्त और त्वचा के अनुकूल है। डॉ प्रिया सोनी ने बताया कि यह गुलाल खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें कोई भी ऐसा तत्व नहीं है जो त्वचा को नुकसान पहुंचाए। होली के भागदौड़ भरे माहौल में यह सुगंधित गुलाल लोगों को रिलैक्स और तरोताजा महसूस कराने में भी मदद करता है।
Holi 2026: होली के बाद भी करता है फायदा
इस ऑर्गेनिक गुलाल की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह होली के बाद भी फायदेमंद साबित होता है। होली के बाद जब मौसम और तापमान में बदलाव होता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। लेकिन हर्बल और ऑर्गेनिक सामग्री से बना यह गुलाल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देता है। गाजर में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट, चुकंदर में आयरन और फोलेट, गुलाब में विटामिन C और चंदन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये सब मिलकर शरीर को मौसम के बदलाव से बचाने में मदद करते हैं।
Holi 2026: महिलाओं को मिल रहा रोजगार
इस पूरी पहल का एक और सुंदर पहलू यह है कि इससे भागलपुर की महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मिलकर इस गुलाल को बना रही हैं। रंग-बिरंगा गुलाल सुखाती और तैयार करती इन महिलाओं की मेहनत और कौशल इस पूरी पहल को और भी खास बनाती है। यह पहल महिला सशक्कीकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है जहां पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक अरोमाथेरेपी के संगम से एक अनूठा उत्पाद तैयार हो रहा है जो बाजार में तेजी से लोकप्रिय भी हो रहा है।
Holi 2026: तेजी से बढ़ रही है मांग
इस साल हर्बल और अरोमा गुलाल की मांग तेजी से बढ़ रही है। रासायनिक रंगों के नुकसान के बारे में जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ लोग अब प्राकृतिक विकल्पों की तरफ मुड़ रहे हैं। भागलपुर का यह ऑर्गेनिक गुलाल न केवल बिहार में बल्कि आसपास के राज्यों में भी खूब पसंद किया जा रहा है। इस होली अगर आप भी अपने परिवार के साथ सुरक्षित, प्राकृतिक और सुगंधित रंगों से होली खेलना चाहते हैं तो यह ऑर्गेनिक गुलाल आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
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