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Kisan Mahapanchayat: SKM का बड़ा ऐलान, 10 मार्च से 13 अप्रैल तक देशभर में महापंचायतें, 9 मार्च को जंतर-मंतर पर किसान-मजदूर संसद, MSP गारंटी और भारत-अमेरिका ट्रेड डील विरोध प्रमुख मुद्दे

Kisan Mahapanchayat
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Kisan Mahapanchayat: देश के किसान आंदोलन ने एक बार फिर से नई गति और नई दिशा पकड़ ली है। संयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि जब तक किसानों की प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बार आंदोलन में केवल किसान नहीं बल्कि देशभर के मजदूर संगठन भी कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। SKM ने देशव्यापी कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला की घोषणा की है जिसमें 9 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान-मजदूर संसद का आयोजन और 10 मार्च से 13 अप्रैल तक पूरे देश में महापंचायतें (Kisan Mahapanchayat) शामिल हैं। महापंचायतों की शुरुआत पंजाब के बरनाला से होगी। 23 मार्च यानी शहीद दिवस को साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाने का भी फैसला किया गया है। SKM की मांगों में MSP की कानूनी गारंटी, संपूर्ण कर्जमाफी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कड़ा विरोध प्रमुख रूप से शामिल हैं।

Kisan Mahapanchayat: SKM की प्रमुख मांगें क्या हैं

संयुक्त किसान मोर्चा ने जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज (Kisan Mahapanchayat) करने का फैसला किया है उनमें सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है MSP@C2+50% की कानूनी गारंटी। इसका मतलब है कि सभी फसलों के लिए उत्पादन की पूरी लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक कीमत सुनिश्चित करने का कानून बनाया जाए। दूसरी प्रमुख मांग है किसानों के कर्जे की संपूर्ण माफी। तीसरी और इस समय सबसे अधिक चर्चित मांग है भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न किया जाए क्योंकि SKM का मानना है कि यह समझौता भारतीय किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद नुकसानदेह है। इसके अलावा 2013 के भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम का पूर्ण क्रियान्वयन, बिजली बिल, बीज विधेयक और चार श्रम संहिताओं का विरोध भी SKM के एजेंडे में शामिल है।

Kisan Mahapanchayat: 9 मार्च तक गांवों में जनसभाएं और राष्ट्रपति को खुले पत्र

SKM ने अपने आंदोलन (Kisan Mahapanchayat) की शुरुआत जमीनी स्तर से करने का फैसला किया है। 9 मार्च तक पूरे देश के गांव-गांव में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी ताकि किसानों को आंदोलन के मुद्दों से परिचित कराया जा सके और उन्हें संगठित किया जा सके। इन जनसभाओं में किसान डाकघरों तक जुलूस निकालेंगे और राष्ट्रपति को खुले पत्र भेजेंगे। इन पत्रों में तीन प्रमुख मांगें होंगी। पहली मांग है कि राष्ट्रपति वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने का आदेश दें। दूसरी मांग है कि प्रधानमंत्री को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश दिया जाए। तीसरी मांग है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गेहूं और धान किसानों का बोनस समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लें। SKM ने यह भी तय किया है कि सेब, सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी प्रभावित फसलों की खेती करने वाले गांवों में विशेष अभियान चलाए जाएंगे।

Kisan Mahapanchayat: 9 मार्च को जंतर-मंतर पर किसान-मजदूर संसद

संसद के अगले सत्र की शुरुआत के पहले दिन यानी 9 मार्च 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर (Kisan Mahapanchayat) पर एक ऐतिहासिक किसान-मजदूर संसद का आयोजन होगा। SKM इस आयोजन में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के साथ मिलकर एक संयुक्त मंच बनाएगा। यह आयोजन इस बात का प्रतीक होगा कि देश के किसान और मजदूर अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। जंतर-मंतर का यह कार्यक्रम संसद के सामने एक समानांतर आवाज उठाने का प्रयास होगा।

Kisan Mahapanchayat: 10 मार्च से 13 अप्रैल तक महापंचायतों का दौर

SKM की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है देशव्यापी महापंचायतों का आयोजन। 10 मार्च से लेकर 13 अप्रैल यानी जलियांवाला बाग दिवस तक पूरे देश में महापंचायतें होंगी। इन महापंचायतों की शुरुआत पंजाब के बरनाला जिले से होगी। इन महाआयोजनों में हजारों किसान और मजदूर भाग लेंगे। महापंचायतों के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला उद्देश्य है भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संभावित खतरों को आम किसानों तक पहुंचाना। दूसरा उद्देश्य है मोदी सरकार की उन नीतियों के बारे में जागरूकता फैलाना जिन्हें SKM कॉरपोरेट समर्थक मानता है। तीसरा उद्देश्य है आने वाले लंबे संघर्ष के लिए किसानों को तैयार करना और संगठित करना।

Kisan Mahapanchayat: 27 फरवरी से मुख्यमंत्रियों से मिलेंगे SKM प्रतिनिधि

SKM ने 27 फरवरी या उसके बाद से अलग-अलग राज्यों में SKM के प्रतिनिधिमंडल संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी दलों के नेताओं (Kisan Mahapanchayat) से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में राज्यों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे उठाए जाएंगे। SKM केंद्र सरकार पर सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण का आरोप लगाते हुए मांग करेगा कि जीएसटी अधिनियम में संशोधन करके राज्यों की कराधान शक्ति बहाल की जाए। इसके अलावा विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग भी की जाएगी।

Kisan Mahapanchayat: 23 मार्च को साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस

शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान दिवस 23 मार्च को SKM देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस (Kisan Mahapanchayat) के रूप में मनाएगा। इस दिन अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में विशेष कार्यक्रम होंगे। SKM का मानना है कि यह समझौता देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरनाक है। इस दिन के विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर अलग-अलग तय किए जाएंगे।

कुल मिलाकर SKM का यह कार्यक्रम देश के किसान आंदोलन (Kisan Mahapanchayat) को एक नई और व्यापक दिशा देने का प्रयास है। आने वाले डेढ़ महीने देश की कृषि राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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