Jute MSP Price: देश के जूट उत्पादक किसानों के लिए एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गठित आर्थिक कार्य मंत्रिमंडलीय समिति ने मंगलवार को मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी। नई घोषणा के अनुसार कच्चे जूट का MSP अब 5,925 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जो पिछले सीजन 2025-26 की तुलना में 275 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। इस फैसले से देश के लाखों जूट उत्पादक किसानों की आमदनी में सुधार होगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि आज कुल 12,236 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण फैसले और दो बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए जिनमें जूट MSP का यह फैसला भी शामिल है। आइए जानते हैं इस फैसले की पूरी जानकारी और इससे किसानों को होने वाले फायदे।
Jute MSP Price: नया MSP क्या है और पिछले सीजन से कितना अधिक
केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट के टीडी-3 ग्रेड का MSP 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले सीजन 2025-26 में यही MSP 5,650 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह एक साल में 275 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। सरकार के अनुसार यह नया MSP जूट के अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित करता है। यानी किसान को अपनी लागत से 61.8 प्रतिशत अधिक कीमत मिलेगी जो उनके लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच है।
Jute MSP Price: 2014 से अब तक ढाई गुना बढ़ा जूट का MSP
इस फैसले को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो एक दशक में हुई प्रगति और भी प्रभावशाली नजर आती है। साल 2014-15 में जूट का MSP महज 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था। अब 2026-27 में यह बढ़कर 5,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इस तरह 12 साल की अवधि में जूट के MSP में 3,525 रुपये प्रति क्विंटल यानी लगभग ढाई गुना की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि स्पष्ट रूप से दिखाती है कि सरकार जूट किसानों की आय बढ़ाने के प्रति कितनी गंभीर है।
Jute MSP Price: सरकारी भुगतान में तीन गुना बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो किसानों को मिले MSP भुगतान में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। वर्ष 2004-05 से 2013-14 तक की पूरी दस साल की अवधि में जूट किसानों को MSP के रूप में कुल 441 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था। इसके बाद 2014-15 से 2025-26 की अवधि में यह राशि तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 1,342 करोड़ रुपये हो गई। यह तुलना बताती है कि पिछले 12 सालों में जूट किसानों के लिए की गई आर्थिक प्रतिबद्धता पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत रही है।
Jute MSP Price: JCI करेगी मूल्य समर्थन का काम, नुकसान उठाएगी सरकार
जूट MSP की घोषणा के साथ ही सरकार ने किसानों के लिए एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की है। भारतीय जूट निगम यानी JCI केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में मूल्य समर्थन संचालन जारी रखेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर बाजार में जूट की कीमत MSP से नीचे गिरती है तो JCI सीधे किसानों से MSP पर जूट खरीदेगी। इससे किसानों को यह भरोसा रहेगा कि उनकी फसल का एक निश्चित न्यूनतम दाम मिलेगा और वे बाजार की अस्थिरता के शिकार नहीं होंगे। यदि इस खरीद में JCI को किसी प्रकार का नुकसान होता है तो उसकी पूरी भरपाई केंद्र सरकार करेगी। यह प्रावधान किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का काम करेगा।
Jute MSP Price: उत्पादन लागत से डेढ़ गुना MSP की नीति पर अमल
सरकार ने बजट 2018-19 में यह नीति घोषित की थी कि सभी फसलों का MSP उनकी अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना होगा। जूट का नया MSP भी इसी नीति के अनुरूप तय किया गया है। 61.8 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित करने का मतलब है कि किसान को उत्पादन लागत पर डेढ़ गुना से भी अधिक कीमत मिलेगी। यह नीति किसानों को खेती में लगाई गई लागत वसूलने के साथ-साथ उचित मुनाफा भी दिलाती है।
Jute MSP Price: जूट की खेती और इसका महत्व
जूट भारत की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पर्यावरण अनुकूल नकद फसल है। इसे सोने का रेशा भी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर जूट की खेती होती है और लाखों परिवारों की आजीविका इस फसल पर निर्भर है। जूट से बोरे, थैले, दरियां, रस्सियां और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ती जागरूकता के कारण प्लास्टिक के विकल्प के रूप में जूट की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे आने वाले समय में जूट किसानों की आमदनी में और अधिक सुधार की उम्मीद है। सरकार का यह MSP बढ़ोतरी का फैसला इस पर्यावरण अनुकूल फसल की खेती को और अधिक प्रोत्साहित करेगा और किसानों को इसकी खेती जारी रखने के लिए आर्थिक प्रेरणा देगा।
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