New Dairy Model: 22 राज्यों में दूध खरीद के लिए तैयार हो रहा नया मॉडल, SPCDF से जुड़ेंगे 5 लाख गांवों के असंगठित पशुपालक, 200 करोड़ से शुरुआत
New Dairy Model: देश के डेयरी सेक्टर में एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। गुजरात में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साल 2025 में सरदार पटेल सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (SPCDF) की स्थापना की घोषणा की थी, जो अब देश के 22 राज्यों में काम करने के लिए तैयार है। यह नई डेयरी फेडरेशन उन करोड़ों असंगठित पशुपालकों को संगठित करेगी जो अभी तक किसी भी सहकारी संस्था से नहीं जुड़े हुए हैं। अमूल का संचालन करने वाली गुजरात सहकारी दूध विपणन महासंघ (GCMMF) की इस नई संस्था में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी। 200 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ शुरू हुई यह पहल देश के डेयरी सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने वाली है।
New Dairy Model: पांच लाख गांवों के असंगठित पशुपालकों की समस्या
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन एक बड़ी समस्या यह है कि करोड़ों पशुपालक अभी भी किसी सहकारी संस्था से नहीं जुड़े हुए हैं। डेयरी विशेषज्ञों के अनुसार, देश के लगभग पांच लाख गांवों में ऐसे डेयरी किसान हैं जो किसी भी सहकारी संस्था का हिस्सा नहीं हैं।
असंगठित पशुपालकों की मुख्य समस्याएं:
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दूध की उचित कीमत नहीं मिलना
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सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना
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मध्यस्थों का शोषण
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तकनीकी मार्गदर्शन का अभाव
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वित्तीय सहायता की कमी
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पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच न होना
ये पशुपालक अपना दूध सीधे स्थानीय बाजार में या निजी व्यापारियों को बेचते हैं, जिससे उन्हें कई तरह के नुकसान उठाने पड़ते हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए SPCDF की स्थापना की गई है।
SPCDF क्या है और कैसे काम करेगी?
सरदार पटेल सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (SPCDF) को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 की धारा 7 के तहत गांधीनगर, गुजरात में पंजीकृत किया गया है।
SPCDF की विशेषताएं:
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22 राज्यों में संचालन (20 राज्य + 2 केंद्र शासित प्रदेश)
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200 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी
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लगभग 20,000 ग्राम-स्तरीय दूध सहकारी समितियों से जुड़ाव
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केवल असंगठित समितियों पर फोकस
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किसी मौजूदा संस्था से प्रतिस्पर्धा नहीं
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसकी शुरुआत करते हुए बताया कि यह संस्था कर्नाटक, तमिलनाडु समेत 20 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में दूध खरीदने का काम करेगी।
New Dairy Model: हिस्सेदारी का गणित
SPCDF में तीन प्रमुख हिस्सेदार होंगे:
1. GCMMF – 20% हिस्सेदारी:
अमूल ब्रांड चलाने वाली गुजरात सहकारी दूध विपणन महासंघ की एक-पांचवां हिस्सेदारी होगी।
2. गुजरात के जिला सहकारी दूध संघ – 60% हिस्सेदारी:
GCMMF से जुड़े गुजरात के विभिन्न जिला स्तरीय सहकारी दूध संघों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी।
3. अन्य राज्यों की ग्राम स्तरीय समितियों – 20% हिस्सेदारी:
19 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में काम करने वाली गांव स्तर की असंगठित दूध सहकारी समितियों की हिस्सेदारी होगी।
यह संरचना यह सुनिश्चित करती है कि गुजरात का अनुभव और विशेषज्ञता पूरे देश में फैले और स्थानीय समितियों को भी निर्णय लेने में भागीदारी मिले।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?

GCMMF के प्रबंध निदेशक जयन मेहता ने स्पष्ट किया कि SPCDF की कार्यप्रणाली (New Dairy Model) बहुत स्पष्ट होगी।
मेहता ने कहा, “हम केवल उन व्यक्तिगत गांव स्तर की सहकारी समितियों से जुड़ेंगे जो किसी भी राज्य स्तरीय दूध सहकारी निकायों से संबद्ध नहीं हैं। हम केवल उन लोगों को शामिल कर रहे हैं जो सहकारी क्षेत्र में शामिल नहीं हैं और जिनका प्रतिनिधित्व नहीं है।”
कार्यप्रणाली के मुख्य बिंदु:
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किसी मौजूदा डेयरी महासंघ से प्रतिस्पर्धा नहीं
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केवल असंगठित समितियों पर ध्यान
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दूध खरीद में उचित मूल्य निर्धारण
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अमूल मॉडल पर आधारित संचालन
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पारदर्शी भुगतान व्यवस्था
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तकनीकी और वित्तीय सहायता
New Dairy Model: किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
SPCDF से जुड़ने वाले पशुपालकों को कई फायदे मिलेंगे:
आर्थिक लाभ:
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दूध का उचित और गारंटीड मूल्य
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समय पर भुगतान
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मध्यस्थों से मुक्ति
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बोनस और अन्य प्रोत्साहन
तकनीकी सहायता:
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पशु स्वास्थ्य सेवाएं
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आधुनिक डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण
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गुणवत्ता नियंत्रण में मदद
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नस्ल सुधार कार्यक्रम
सामाजिक सुरक्षा:
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सहकारी सदस्यता के लाभ
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सरकारी योजनाओं तक पहुंच
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बीमा सुविधाएं
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ऋण की उपलब्धता
22 राज्यों में विस्तार की योजना
हालांकि अभी तक उन सभी 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं, लेकिन कर्नाटक और तमिलनाडु का नाम विशेष रूप से लिया गया है।
अनुमान है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े डेयरी उत्पादक राज्य इसमें शामिल होंगे जहां बड़ी संख्या में असंगठित पशुपालक हैं।
New Dairy Model: भारतीय डेयरी सेक्टर के लिए महत्व
यह पहल भारतीय डेयरी सेक्टर में एक नया अध्याय खोल सकती है। अमूल मॉडल की सफलता पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और अब उसी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि यह प्रयोग सफल रहा तो करोड़ों असंगठित पशुपालक संगठित होंगे, उन्हें उचित मूल्य मिलेगा और भारत का डेयरी सेक्टर और मजबूत होगा।
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