डोर-टू-डोर सर्वे के लिए गठित हुई जांच कमेटी, जल्द पूरा किया जाएगा सर्वे कार्य प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पक्का मकान पहुंचाने के उद्देश्य से बिहार के रोहतास जिले के डेहरी प्रखंड में प्रशासन ने सख्त और पारदर्शी कदम उठाए हैं। आवास प्लस-2024 के अंतर्गत किए गए सर्वे के बाद अब भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसके लिए विशेष जांच कमेटियों का गठन किया गया है। यह जांच पूरी तरह डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से होगी, ताकि कोई भी अपात्र व्यक्ति योजना का अनुचित लाभ न ले सके और सही पात्र परिवारों को उनका हक मिल सके। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का लाभ केवल उन्हीं परिवारों तक पहुंचे, जो वास्तव में बेघर हैं या कच्चे मकानों में जीवन यापन कर रहे हैं। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए डेहरी प्रखंड क्षेत्र की सभी पंचायतों में घर-घर जाकर सत्यापन कराया जाएगा। इस दौरान लाभुकों के दस्तावेज, वर्तमान आवास की स्थिति, आय के स्रोत, संपत्ति और अन्य निर्धारित मानकों की गहन जांच की जाएगी। यदि कोई परिवार पात्रता की शर्तों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसका नाम आवास प्लस-2024 की सूची से हटाया जाएगा। डेहरी प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास प्लस-2024 के लिए पहले ही व्यापक सर्वे कराया जा चुका है। इस सर्वे में दो तरीकों से डेटा एकत्र किया गया। एक ओर सर्वेयरों ने पंचायतों में घर-घर जाकर जानकारी जुटाई, वहीं दूसरी ओर कई परिवारों ने मोबाइल ऐप के माध्यम से सेल्फ सर्वे भी पूरा किया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 6850 परिवारों का सर्वे सर्वेयरों द्वारा किया गया, जबकि 2548 परिवारों ने मोबाइल ऐप से स्वयं सर्वे किया। यह पूरा डेटा आवास प्लस ऐप 2024 पर अपलोड किया गया है, जिसके आधार पर अब भौतिक सत्यापन की कार्रवाई की जा रही है। इस सत्यापन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने तीन स्तरों पर जांच प्रणाली लागू की है। पंचायत स्तर पर गठित टीम घर-घर जाकर जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रखंड कार्यालय को सौंपेगी। खास बात यह है कि जिस कर्मी ने सर्वे किया है, वही उस पंचायत में सत्यापन नहीं करेगा, ताकि किसी भी प्रकार की पक्षपात या अनियमितता की गुंजाइश न रहे। प्रखंड स्तर पर बीडीओ की अध्यक्षता में गठित समिति पंचायत से प्राप्त सूचियों का कम से कम 10 प्रतिशत डेटा स्वयं जाकर सत्यापित करेगी। वहीं जिला स्तर पर डीडीसी की अध्यक्षता में गठित टीम प्रखंडों से आई रिपोर्ट का 2 प्रतिशत रैंडम सत्यापन करेगी। इस बहुस्तरीय व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय रहे। प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत किसी भी अपात्र व्यक्ति को लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सत्यापन पूरी तरह विभागीय गाइडलाइन के अनुसार होगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का सख्त संदेश है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र जरूरतमंदों को ही मिलेगा। इस बार आवास प्लस-2024 सर्वे का एक बड़ा उद्देश्य उन परिवारों को भी शामिल करना है, जो पिछले सर्वे में छूट गए थे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अंतिम बड़ा सर्वे वर्ष 2018-19 में कराया गया था। उसी समय तैयार की गई प्रतीक्षा सूची के आधार पर पिछले कई वर्षों से आवास स्वीकृत किए जाते रहे। लेकिन बीते छह वर्षों में कई नए परिवार बने, कई परिवार अलग हुए और कई जरूरतमंद लोग सूची से बाहर रह गए। ऐसे में छह साल बाद दोबारा सर्वे कराकर वास्तविक जरूरतमंदों को योजना में शामिल करने की पहल की गई है। आवास प्लस-2024 के तहत हो रहे इस नए सर्वे और सत्यापन से ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों को बड़ी उम्मीद जगी है। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद एक नई और अपडेटेड प्रतीक्षा सूची तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आने वाले समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्के मकानों की स्वीकृति दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जिनके पास आज भी सिर छुपाने के लिए पक्का मकान नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लाभ मिल सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पात्रता शर्तों को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह स्पष्ट है। योजना के तहत वही परिवार पात्र माने जाएंगे, जिनके पास रहने योग्य पक्का मकान नहीं है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिन्होंने पहले किसी भी सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं लिया है। इसके अलावा जिन परिवारों के पास मोटर वाहन, ट्रैक्टर या महंगी मशीनरी नहीं है, उन्हें भी पात्र श्रेणी में रखा गया है। वहीं दूसरी ओर जिनके पास पहले से पक्का मकान है, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक है, जिनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी करता है, जो आयकर या व्यवसाय कर देते हैं, या जिनके पास 2.5 एकड़ से अधिक सिंचित या 5 एकड़ से अधिक असिंचित भूमि है, उन्हें योजना के लिए अपात्र माना जाएगा। सत्यापन के दौरान इन सभी मानकों की जांच दस्तावेजों के साथ-साथ पड़ोसियों से प्राप्त जानकारी और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी हकीकत को परखा जाएगा। यदि किसी स्तर पर गलत जानकारी देने या फर्जी तरीके से लाभ लेने की कोशिश सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। कुल मिलाकर, डेहरी प्रखंड में शुरू की गई यह डोर-टू-डोर जांच प्रक्रिया प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ किए जा रहे इस सत्यापन से यह उम्मीद की जा रही है कि योजना का असली उद्देश्य पूरा होगा और ग्रामीण क्षेत्रों के वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक पक्का आवास मिल सकेगा। Post navigation कृषक मित्र सूर्य योजना 2025: 90% सब्सिडी पर 7.5 HP सोलर पंप, आवेदन प्रक्रिया और पात्रता जानें राष्ट्रीय पशुधन मिशन 2025: भेड़ पालन पर 50% सब्सिडी, 50 लाख तक अनुदान