रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग भारत के तकनीकी नेतृत्व का आधार बनेगा: पीयूष गोयल आईएमएफ द्वारा भारत की विकास दर में वृद्धि, मजबूत आर्थिक आधार का प्रमाण


भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग देश को तकनीकी नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग न केवल भारत की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, बल्कि यह राष्ट्र के औद्योगिक और सामाजिक विकास में भी व्यापक योगदान दे सकता है। श्री गोयल आज भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित 7वें भारतीय रासायनिक और पेट्रोकेमिकल सम्मेलन में बोल रहे थे।


भारत के आर्थिक सुदृढ़ता का प्रतीक: IMF की रिपोर्ट

अपने संबोधन में श्री गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा भारत की विकास दर के अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की आर्थिक लचीलापन, नीतिगत स्पष्टता और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य संतुलित, समावेशी और स्थायी विकास को प्रोत्साहित करना है, जिससे समाज के हर वर्ग को समान अवसर प्राप्त हो।


तकनीक और नवाचार: विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम

श्री गोयल ने कहा कि महान राष्ट्र वे ही बनते हैं जो तकनीक और नवाचार में निवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को भी यदि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को अपनी विकास नीति का केंद्र बनाना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आज जब तेल उत्पादक देश भी स्वच्छ ऊर्जा, वैल्यू-एडेड उत्पादों और जलवायु परिवर्तन तकनीकों में निवेश कर रहे हैं, तब भारत को भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि “वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन नवाचार और प्रौद्योगिकी का महत्व स्थायी रहता है।”


रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग: बहुआयामी विकास का स्तंभ

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत का रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग देश की औद्योगिक प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रमुख चालक है। उन्होंने बताया कि यह उद्योग कृषि, स्वास्थ्य, निर्माण, ऊर्जा, अवसंरचना, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता उत्पादों जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के उत्पाद और सेवाएं हर उद्योग और उपभोक्ता से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। इसलिए, इसका विस्तार और आधुनिकीकरण भारत के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
श्री गोयल ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन करें, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ वाले क्षेत्रों की पहचान करें और भारत की वैश्विक निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति अपनाएं


वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका

मंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में अपनी मजबूत और विश्वसनीय पहचान बनानी होगी। उन्होंने कहा कि एक या दो देशों पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक साबित हो सकती है, इसलिए भारत को अपने सप्लाई नेटवर्क का विविधीकरण (Diversification) करना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ उत्पादों में घरेलू उत्पादन और सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन समग्र रूप से भारत को वैश्विक बाजारों से जुड़ाव बनाए रखना चाहिए, ताकि देश प्रतिस्पर्धी, कुशल और आत्मनिर्भर बन सके।


मुक्त व्यापार समझौते और वैश्विक सहयोग

श्री गोयल ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में कई मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements – FTAs) किए हैं, जिनमें मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया, लिचेंस्टीन, नॉर्वे, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है, बल्कि तकनीकी सहयोग, निवेश आकर्षण और नवाचार साझेदारी को भी मजबूत बनाना है।
श्री गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य है कि वह वैश्विक व्यापार में सक्रिय भूमिका निभाते हुए घरेलू उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और 140 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करे।
उन्होंने कहा, “सरकार का उद्देश्य है कि हम ऐसे समझौते करें जो भारतीय उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करें, निर्यात को प्रोत्साहित करें और घरेलू उत्पादन को भी सुरक्षित रखें।”


उद्योग जगत से सहयोग और सुधार के लिए सुझाव

मंत्री ने कहा कि सरकार और उद्योग जगत को मिलकर काम करना चाहिए ताकि भारत को ‘मेक इन इंडिया’ से ‘इन्वेंट इन इंडिया’ की ओर बढ़ाया जा सके।
उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे प्रिडेटरी प्राइसिंग, डंपिंग और नॉन-टैरिफ बाधाओं से संबंधित समस्याओं को सरकार के साथ साझा करें।
उन्होंने आश्वासन दिया कि मंत्रालय उद्योग के हितों की रक्षा के लिए समय पर हस्तक्षेप और सुधारात्मक कार्रवाई करेगा।
श्री गोयल ने यह भी कहा कि उद्योगों को प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनुपालन भार में कमी और छोटे अपराधों के डी-क्रिमिनलाइजेशन के लिए सुझाव देने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) में कई सुधार किए हैं, जिनसे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता और दक्षता में वृद्धि हुई है।


सतत और समावेशी विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

अपने समापन संबोधन में श्री गोयल ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि भारत में सतत (Sustainable) और समावेशी (Inclusive) विकास की प्रक्रिया को निरंतर गति दी जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं है, बल्कि एक ऐसा राष्ट्र निर्माण करना है जो तकनीकी रूप से उन्नत, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण हो।”
उन्होंने उद्योग जगत को आश्वस्त किया कि सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि भारत आने वाले वर्षों में विश्व के अग्रणी औद्योगिक और नवाचार केंद्रों में शामिल हो सके।


निष्कर्ष

इस अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि भारत का रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग केवल उत्पादन का क्षेत्र नहीं, बल्कि तकनीकी क्रांति और वैश्विक नेतृत्व की कुंजी है।
सरकार और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयासों से भारत निकट भविष्य में नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी और औद्योगिक उत्कृष्टता का केंद्र बन सकता है।
श्री गोयल ने अपने संदेश में कहा कि यदि यह उद्योग अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़े, तो भारत न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित होगा।

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