इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सरकार का बड़ा फैसला: नए मानक लागू, किसानों को बड़ा फायदा

सरकार का बड़ा फैसला: इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर के मानक तय, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत


केंद्र सरकार ने भारतीय कृषि क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश में पहली बार इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए आधिकारिक भारतीय मानक लागू कर दिए गए हैं। इस फैसले से न सिर्फ किसानों को बेहतर और भरोसेमंद मशीनें मिलेंगी, बल्कि ग्रीन एग्रीकल्चर, कम लागत वाली खेती और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। लंबे समय से जिस तकनीक को लेकर किसानों और कंपनियों दोनों में असमंजस बना हुआ था, अब उस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो गए हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की पहल पर भारत में आईएस 19262:2025 नाम से पहला भारतीय मानक जारी किया गया है। यह मानक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रदर्शन और तकनीकी क्षमता को परखने का एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। अब बाजार में आने वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बिना जांच और प्रमाणन के नहीं बिक सकेंगे, जिससे किसानों को घटिया या अधूरी तकनीक से बचाया जा सकेगा।

अब तक देश में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का बाजार तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन किसी एक समान मानक के अभाव में किसानों के मन में कई सवाल थे। किसान यह तय नहीं कर पा रहे थे कि कौन सा ट्रैक्टर वास्तव में खेतों के लिए उपयुक्त है और कौन सिर्फ नाम के लिए इलेक्ट्रिक है। नए मानकों के लागू होने से यह भ्रम पूरी तरह खत्म होगा। अब हर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को तय परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा।

इस मानक के तहत ट्रैक्टर की पीटीओ पावर (PTO Power), ड्रॉबार पावर, बेल्ट, पुली और अन्य जरूरी तकनीकी हिस्सों की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही कंपन मापन, असेंबली निरीक्षण और तकनीकी विनिर्देशों का सत्यापन भी जरूरी किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि जो ट्रैक्टर बाजार में आएगा, वह ताकतवर, सुरक्षित और लंबे समय तक खेती के काम में भरोसेमंद साबित होगा। किसानों को अब यह चिंता नहीं रहेगी कि ट्रैक्टर कुछ महीनों में जवाब दे जाएगा या भारी काम में कमजोर पड़ जाएगा।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तैयार किए गए इन नियमों का मकसद सिर्फ तकनीकी जांच नहीं है, बल्कि किसानों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना है। खेतों में लंबे समय तक काम करने वाले किसानों के लिए मशीन का संतुलन, कंपन का स्तर और संचालन की सहजता बेहद अहम होती है। नए मानकों में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और काम करना ज्यादा आरामदायक बनेगा।

किसानों के लिए यह फैसला कई मायनों में फायदेमंद साबित होगा। सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदते समय क्वालिटी को लेकर संदेह नहीं रहेगा। तय मानकों के चलते कंपनियां मनमानी नहीं कर सकेंगी और हर मॉडल को एक तय स्तर पर खरा उतरना होगा। इससे किसानों का पैसा सुरक्षित रहेगा और उन्हें सही कीमत पर बेहतर उत्पाद मिलेगा।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में कम खर्चीले होते हैं। इनमें ईंधन की लागत बेहद कम होती है और रखरखाव पर भी कम पैसा खर्च होता है। डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह किसानों के लिए बड़ी राहत है। लंबे समय में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती की कुल लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी यह बदलाव बेहद अहम है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों से न तो धुआं निकलता है और न ही तेज शोर होता है। इससे खेतों में काम करने वाले किसानों को ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण से राहत मिलेगी। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक सुरक्षित और आरामदायक विकल्प बन सकता है। साथ ही गांवों और कृषि क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर कम होगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर स्वच्छ और टिकाऊ खेती की दिशा में एक मजबूत कदम हैं। डीजल पर निर्भरता कम होने से न सिर्फ आयात पर दबाव घटेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह पहल डिजिटल और ग्रीन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कृषि उपकरणों को लेकर सब्सिडी, प्रोत्साहन योजनाएं और नई नीतियां भी लाई जा सकती हैं, जिससे किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।

इस मानक को तैयार करने में सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों की भी अहम भूमिका रही है। सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल कर यह सुनिश्चित किया गया है कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी किसानों के काम आएं। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे एक व्यावहारिक और किसान हितैषी कदम मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आईएस 19262:2025 के लागू होने से भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अपनाने की रफ्तार तेज होगी। जब किसानों का भरोसा नई तकनीक पर मजबूत होगा, तो मांग भी बढ़ेगी। इससे कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को बेहतर तकनीक और किफायती दाम के रूप में मिलेगा। भविष्य में यह कदम भारतीय कृषि यंत्रीकरण को वैश्विक स्तर पर भी मजबूत पहचान दिला सकता है।

कुल मिलाकर, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए भारतीय मानक तय किया जाना किसानों के हित में एक निर्णायक और दूरदर्शी फैसला माना जा रहा है। इससे न केवल खेती की लागत घटेगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और आधुनिक कृषि व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इस कदम से साफ है कि आने वाले वर्षों में भारतीय खेती तेजी से तकनीक आधारित, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनने की ओर बढ़ रही है।

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