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विकसित कृषि संकल्प अभियान का दूसरा चरण, किसानों को रबी में बड़ा लाभ

विकसित कृषि संकल्प अभियान” का दूसरा चरण शुरू – किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भर कृषि की ओर एक बड़ा कद

खरीफ के बाद अब रबी की फसल पर फोकस

किसानों की आय को बढ़ाने और आधुनिक तकनीक को हर-खेत तक पहुँचाने की दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का दूसरा चरण 3 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा।

पहले चरण में यह अभियान खरीफ फसलों पर आयोजित था और देशभर में बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। हजारों किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधे संवाद कर लाभकारी जानकारी प्राप्त की। अब यही प्रयास रबी फसलों के लिए किया जाएगा ताकि किसान समय रहते बुवाई और उत्पादन की बेहतर तैयारी कर सकें।

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – रबी अभियान 2025

इस अभियान के तहत 15-16 सितम्बर को नई दिल्ली के पूसा परिसर में “राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – रबी अभियान 2025” का आयोजन होगा। यह सम्मेलन पहली बार दो दिनों तक चलेगा।

सम्मेलन में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सभी राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता, आईसीएआर (ICAR) के महानिदेशक, कृषि सचिव और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद होंगे। साथ ही, पहली बार देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) के वैज्ञानिक भी भाग लेंगे, जो क्षेत्रीय अनुभव साझा करेंगे और किसानों तक तकनीक पहुँचाने की रणनीतियों पर वार्तालाप करेंगे।

सम्मेलन में प्रमुख विषय

सम्मेलन में रबी 2025-26 सीजन की तैयारी, उत्पादन लक्ष्य और किसानों की चुनौतियों से जुड़ी कई जरूरी विषयों पर वार्तालाप होगी। प्रमुख विषय इस प्रकार हैं:

  1. जलवायु परिवर्तन और मृदा स्वास्थ्य – बदलते मौसम में चुनौतियों से निपटने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड और संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर दिया जाए।
  2. गुणवत्तापूर्ण बीज और कृषि इनपुट – उच्च क्वालिटी वाले बीज, खाद और कीटनाशक उपलब्ध कराने और डिजिटल मॉनिटरिंग पर चर्चा।
  3. फसल विविधिकरण और बागवानी – किसानों की आय बढ़ाने के लिए तिलहन, दलहन और बागवानी फसलों को बढ़ावा।
  4. प्राकृतिक खेती – कम लागत और पर्यावरण अनुकूल खेती पद्धतियों को अपनाने पर बल।
  5. कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका – किसानों तक नई तकनीक और ज्ञान पहुँचाने के प्रभावी तरीकों पर मंथन।
  6. केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं का समन्वय – राज्यों के अनुभव साझा कर योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन।
  7. खाद उपलब्धता की समीक्षा – रबी फसलों के लिए समय पर खाद और उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  8. पल्स और ऑयलसीड मिशन – आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा के लिए रबी सीजन में दालों और तिलहनों के क्षेत्र और उत्पादन में वृद्धि।

किसानों तक सीधे पहुँच

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कृषि वैज्ञानिक गाँव-गाँव जाकर किसानों से सीधा बातचीत करेंगे। वे किसानों को नई तकनीक, बीज, खाद और कीटनाशकों के सही तरह से उपयोग की जानकारी देंगे।

पिछले खरीफ अभियान के दौरान 2,170 टीमों ने गाँवों का दौरा किया और किसानों को उच्च कोटि की जानकारी दी। किसान भाई-बहनों ने भी उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। इस बार रबी अभियान में भी उसी उत्साह और बड़े स्तर पर किसानों तक पहुँचने की योजना बनाई गई है।

किसानों के लिए फायदे

इस अभियान का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसान समय रहते रबी फसलों के लिए बेहतर योजना बना पाएंगे। किसानों को लाभ इन बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • नए बीज और तकनीक की जानकारी: वैज्ञानिक किसानों को नवीनतम बीज और उन्नत तकनीक उपलब्ध कराएंगे।
  • खर्च में कमी: प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से किसानों की लागत घटेगी।
  • उत्पादन में वृद्धि: बेहतर बीज और सही समय पर खाद उपलब्ध होने से फसल उत्पादन बढ़ेगा।
  • आय में वृद्धि: फसल विविधिकरण और बागवानी के जरिए किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर पाएंगे।
  • पोषण सुरक्षा: दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ने से पोषण संबंधी जरूरतें पूरी होंगी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य साकार होगा।
  • मौसम से सुरक्षा: जलवायु अनुकूलन तकनीकों से किसान मौसम की मार से बच सकेंगे।
  • सरकारी योजनाओं की जानकारी: अभियान के दौरान किसानों को केंद्र की योजनाओं का सीधा लाभ लेने का अवसर मिलेगा।

प्रधानमंत्री का “लैब टू लैंड” मंत्र

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “लैब टू लैंड” मंत्र पर आधारित है। यानी जो तकनीक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों में विकसित की जाती है, उसे सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना।

इसी सोच के तहत कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले चरण में खुद गाँव-गाँव जाकर किसानों से मुलाकात की थी और उनकी समस्याएँ सुनी थीं। अब रबी अभियान में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

किसानों की उम्मीदें

देशभर के किसान इस अभियान को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह सिर्फ सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रहकर व्यावहारिक परिणाम देगा। पहले चरण की तरह इस बार भी वैज्ञानिकों और कृषि विभाग की टीमें किसानों से सीधा संपर्क करेंगी और उन्हें खेती के बेहतर उपाय बताएंगी।

अस्वीकरण: यह जानकारी द्वितीयक शोध के माध्यम से एकत्र की गई है और landlevellers इसमें किसी भी त्रुटि के लिए जिम्मेदार नहीं है।

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