हरियाणा सरकार का ऐतिहासिक फैसला: किसानों को 2266 करोड़ का ब्याज माफ, एकमुश्त निपटान योजना से मिलेगी बड़ी राहत हरियाणा के किसानों के लिए सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य की प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) से जुड़े किसानों के लिए अब तक की सबसे बड़ी राहत योजना की घोषणा की। सरकार ने किसानों और मजदूरों पर चढ़े कुल 2266 करोड़ रुपये के ब्याज को पूरी तरह माफ करने का फैसला लिया है। यह कदम न केवल वित्तीय दबाव को कम करेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान भी डालेगा। यह योजना 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी, जिससे लाखों किसान इसका लाभ उठा सकेंगे। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि वर्ष 2025-26 के बजट सत्र में PACS के माध्यम से लिए गए अतिदेय ऋणों के निपटान के लिए एक व्यापक योजना लाने की घोषणा की गई थी। अब उस घोषणा को अमल में लाते हुए प्रदेश के किसानों के लिए एकमुश्त निपटान योजना (OTS) को लॉन्च किया गया है, जिसमें किसान केवल अपनी मूल राशि जमा करेंगे और उन पर वर्षों से बढ़ता ब्याज पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। किसानों की भाषा में कहें तो कर्ज का मूल चुकाओ, बाकी सब माफ। इस योजना का दायरा बेहद बड़ा है। सरकार के अनुसार लगभग 6.81 लाख किसान और गरीब मजदूर इससे सीधे लाभान्वित होंगे। PACS के जरिए लिए गए विभिन्न प्रकार के ऋण—जैसे फसली ऋण, काश्तकार ऋण, दुकानदार ऋण—जो 30 सितंबर 2024 तक अतिदेय हो चुके थे, वे सभी किसान योजना के पात्र माने जाएंगे। इन किसानों पर वर्षों से ब्याज बढ़ता रहा, जिससे कर्ज का बोझ इतना भारी हो गया था कि कई परिवार आर्थिक रूप से टूटने लगे थे। सरकार का यह कदम उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है। इस योजना की सबसे मानवीय और संवेदनशील बात यह है कि इसमें मृत किसानों के परिवारों को भी शामिल किया गया है। हरियाणा के करीब 2.25 लाख मृत किसानों के परिवार ऐसे हैं जिन पर अब भी मूल ऋण और ब्याज का बोझ मौजूद है। सरकार ने इस श्रेणी के लिए विशेष रूप से 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यदि किसान के वारिस मूल राशि जमा कर देते हैं, तो पूरी ब्याज रकम माफ कर दी जाएगी। यह कदम उन परिवारों को सीधी राहत देगा जो अपने प्रियजन को खोने के बाद आर्थिक संघर्ष में फंसे हुए थे। किसानों को सिर्फ ब्याज माफी ही नहीं मिलेगी। सरकार ने साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि राहत के बाद किसान पुनः खेती में निवेश कर सकें। इसके तहत किसान जैसे ही PACS में मूल राशि जमा करेंगे, उसके एक महीने बाद उन्हें नई फसल के लिए तीन किस्तों में नया ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा किसानों के लिए बड़ी मदद साबित होगी क्योंकि कई किसान ब्याज के बोझ के कारण न तो पुराने कर्ज चुका पा रहे थे और न ही नई फसल के लिए निवेश कर पा रहे थे। अब ब्याज माफी के साथ-साथ उन्हें नई शुरुआत का अवसर भी मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। पिछले कुछ वर्षों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं के चलते किसानों की आय पर बड़ा असर पड़ा है। कई किसानों की फसलें बार-बार खराब हो गईं, जिससे वे ऋण चुकाने की स्थिति में ही नहीं थे। ऐसे समय में यह कदम किसानों को आर्थिक रूप से पुनर्गठित होने में मदद करेगा। इससे न केवल किसानों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि ग्रामीण बाजार में भी खरीदारी और निवेश बढ़ेगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। हरियाणा सरकार का दावा है कि यह योजना राज्य के अब तक के सबसे बड़े किसान-हितैषी निर्णयों में से एक है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि किसानों को कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर निकालना उनकी प्राथमिकता है, और एकमुश्त निपटान योजना इस दिशा में एक मजबूत कदम है। इस योजना को लागू करने के लिए सभी PACS को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, और किसानों के लिए सरल और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कई किसान संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से किसान ब्याज के बोझ से दबे हुए थे। कई किसानों का मूल ऋण तो 20-30 हजार रुपये था, लेकिन ब्याज लाखों में पहुंच चुका था। सरकार द्वारा ब्याज को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय किसानों के लिए एक बड़ा वित्तीय कंधा बनेगा। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ब्याज माफी के बाद किसानों को नई फसल के लिए ऋण मिलना खेती की निरंतरता सुनिश्चित करेगा और उत्पादन क्षमता भी बढ़ाएगा। इस योजना का एक बड़ा प्रभाव यह भी है कि इससे PACS की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। लंबे समय से अतिदेय ऋणों के चलते PACS की पूंजी बंद हो गई थी, जिससे किसानों को नए ऋण देने की क्षमता कम हो रही थी। मूल राशि जमा होने से PACS के खातों में नकदी बढ़ेगी और वे किसानों को और प्रभावी ढंग से सेवाएं दे सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे सहकारी ढांचे को भी नई मजबूती मिलेगी। कुछ किसान नेताओं ने हालांकि यह भी सुझाव दिया है कि सरकार को भविष्य में ऐसी स्थितियां दोबारा न बनें, इसके लिए ब्याज दरों तथा ऋण वितरण की नीतियों में सुधार करना चाहिए। हालांकि फिलहाल किसानों में इस राहत को लेकर खुशी का माहौल है और लोग इसे अपने लिए एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना 31 मार्च 2026 तक चलेगी, इसलिए किसानों को पर्याप्त समय मिलेगा कि वे अपनी मूल राशि PACS में जमा कर सकें। कई किसान अभी रबी सीजन की तैयारी में जुटे हुए हैं, ऐसे में ब्याज माफी और नए ऋण की सुविधा उनके लिए दोहरी राहत लेकर आई है। कुल मिलाकर हरियाणा सरकार का यह निर्णय किसानों की स्थिति में वास्तविक सुधार लाने वाला कदम है। 2266 करोड़ की ब्याज माफी, 6.81 लाख किसानों को सीधा लाभ, मृत किसानों के परिवारों के लिए विशेष प्रावधान, और नए ऋण की सुविधा—ये सभी बातें मिलकर इस योजना को किसानों के लिए बेहद प्रभावशाली और ऐतिहासिक बनाती हैं। आने वाले समय में इसका प्रभाव न केवल किसानों के जीवन पर बल्कि पूरे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा। Post navigation Bima Sakhi Yojana: महिलाओं को हर महीने ₹7000 वजीफा, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन PM Kusum Yojana 2025: किसानों को 40,521 सोलर पंप, 60% सब्सिडी के साथ आवेदन शुरू