यूपी के 17 जिलों में MSP पर उड़द की सरकारी खरीद, किसानों को मिलेंगे 7,800 रुपये प्रति क्विंटल, जानिए पूरी प्रक्रिया

UP में MSP पर उड़द की खरीद शुरू, 17 जिलों में खुलेंगे 50 केंद्र, ₹7800 रेट


उत्तर प्रदेश के उड़द उत्पादक किसानों के लिए राहत और भरोसे की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी NAFED द्वारा राज्य के 17 प्रमुख जिलों में MSP पर उड़द खरीद के लिए कुल 50 सरकारी खरीद केंद्र खोले जा रहे हैं। इस पहल का सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जो अब तक बाजार में कम दाम, बिचौलियों और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार किसानों से उड़द की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,800 रुपये प्रति क्विंटल पर की जाएगी, जिससे उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।

सरकारी जानकारी के मुताबिक, यह खरीद आत्मनिर्भर दाल योजना के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य देश में दालों के उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय को सुरक्षित करना है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग और नेफेड ने मिलकर इस योजना की तैयारियां पूरी कर ली हैं। किसानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बहुत जल्द सभी चिन्हित जिलों में खरीद कार्य भी प्रारंभ हो जाएगा। इस योजना से खासतौर पर छोटे और मध्यम किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान अपनी उपज सीधे नेफेड के केंद्रों पर बेच सकेंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म होगी और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। सरकार का मानना है कि जब किसान को सीधे MSP पर भुगतान मिलेगा, तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और खेती के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा। यही वजह है कि जिन जिलों में उड़द का उत्पादन अधिक होता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर खरीद केंद्र खोले जा रहे हैं।

नेफेड द्वारा जिन 17 जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें ललितपुर, झांसी, महोबा, जालौन, हमीरपुर, बदायूं, बरेली, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, मुरादाबाद, सोनभद्र, सीतापुर और शाहजहांपुर शामिल हैं। इन सभी जिलों में मिलाकर 50 खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने जिले के नजदीकी केंद्र की जानकारी पहले से जुटा लें, ताकि खरीद शुरू होते ही किसी तरह की परेशानी न हो।

MSP पर उड़द खरीद 2025-26 को लेकर किसानों में खासा उत्साह है, क्योंकि इस बार भुगतान व्यवस्था को भी काफी सरल और तेज बनाया गया है। नेफेड और कृषि विभाग के अनुसार, किसान द्वारा उड़द बेचने के बाद तीन कार्य दिवसों के भीतर भुगतान सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इससे किसानों को नकदी की समस्या से राहत मिलेगी और वे अगली फसल की तैयारी समय पर कर सकेंगे। यह व्यवस्था उन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी, जिन्हें अक्सर मंडियों में महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MSP पर उड़द बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण के कोई भी किसान सरकारी खरीद का लाभ नहीं उठा सकेगा। किसान ई-समृद्धि ऐप के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं या फिर अपने नजदीकी नेफेड खरीद केंद्र पर जाकर ऑफलाइन पंजीकरण भी करा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के समय किसान को अपनी जमीन के दस्तावेज, आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और फसल से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभ सही और वास्तविक किसानों तक पहुंचे।

उड़द दाल का महत्व केवल किसानों की आय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के भोजन का भी अहम हिस्सा है। उड़द से दाल, कचौड़ी, पापड़, बड़ी, इडली, डोसा, इमरती और कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल न केवल किसानों को आर्थिक मजबूती देगी, बल्कि देश में दालों की उपलब्धता और कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि MSP पर खरीद से बाजार में दालों की आपूर्ति संतुलित रहेगी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव भी कम होगा।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उड़द की यह सरकारी खरीद 29 जनवरी 2026 तक जारी रहेगी। यानी किसानों के पास अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय रहेगा। हालांकि, किसानों को यह सलाह दी जा रही है कि वे फसल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि खरीद केंद्रों पर मानकों के अनुसार ही उपज स्वीकार की जाएगी। साफ, सूखी और निर्धारित नमी स्तर वाली उड़द ही खरीदी जाएगी, ताकि बाद में किसी तरह का विवाद न हो।

ग्रामीण इलाकों में इस फैसले को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर MSP पर खरीद समय पर और पारदर्शी तरीके से होती है, तो उन्हें खुले बाजार में औने-पौने दाम पर फसल बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी। कई किसान संगठनों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और मांग की है कि भविष्य में अन्य दालों और फसलों को भी इसी तरह की योजनाओं में शामिल किया जाए।

कुल मिलाकर, यूपी में उड़द की सरकारी खरीद किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर सामने आई है। 7,800 रुपये प्रति क्विंटल का MSP, 50 खरीद केंद्र, 17 जिलों में सीधी खरीद, तीन दिन में भुगतान और आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया—ये सभी पहलू इस योजना को बेहद खास बनाते हैं। अगर यह योजना ज़मीनी स्तर पर सही तरीके से लागू होती है, तो न केवल उड़द किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य और देश की कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। किसानों के लिए यह मौका है कि वे समय पर पंजीकरण कराकर सरकार की इस योजना का पूरा लाभ उठाएं और अपनी मेहनत की फसल का सही दाम सुनिश्चित करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *