राष्ट्रीय पशुधन मिशन 2025: भेड़ पालन पर 50% सब्सिडी, 50 लाख तक अनुदान

राष्ट्रीय पशुधन मिशन: भेड़ पालन पर 50% तक सब्सिडी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत


भारत सरकार ग्रामीण भारत में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत भेड़ पालन और बकरी पालन को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है। यह पहल खासतौर पर किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण युवाओं और उद्यमियों के लिए एक सुनहरा अवसर बनकर उभरी है, जहां कम निवेश में टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। सरकार द्वारा दी जा रही 50 प्रतिशत तक की पूंजीगत सब्सिडी ने इस क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं और देशभर में इसे लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना, पशुधन की उत्पादकता में सुधार करना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में केंद्र सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) भेड़ और बकरी पालन को विशेष प्राथमिकता दे रहा है। योजना के तहत बड़े पैमाने पर व्यवस्थित और वैज्ञानिक ढंग से भेड़ पालन इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के अंतर्गत 500 भेड़ या बकरियों की क्षमता वाली इकाइयों के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। यह सब्सिडी सीधे उन लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जाती है, जो योजना के मानकों के अनुसार परियोजना रिपोर्ट तैयार कर उसे सफलतापूर्वक लागू करते हैं। इस आर्थिक सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में भेड़ पालन व्यवसाय को संगठित रूप देने में मदद मिल रही है।

भेड़ और बकरी पालन को लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार माना जाता रहा है। इसे अक्सर “गरीबों का एटीएम” भी कहा जाता है, क्योंकि यह सीमांत और छोटे किसानों के लिए नियमित और भरोसेमंद आय का साधन है। खास बात यह है कि भेड़ पालन को कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है और यह सूखा प्रभावित, पहाड़ी या कम संसाधन वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है। यही कारण है कि सरकार इसे ग्रामीण आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मान रही है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि नस्ल सुधार और उत्पादकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बेहतर और उन्नत नस्लों के माध्यम से मटन और ऊन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों के जरिए भेड़ों की उत्पादकता, वृद्धि दर और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाया जा रहा है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि पशुपालकों की लागत भी कम होती है और मुनाफा बढ़ता है, जिससे किसानों की आय में दीर्घकालिक सुधार संभव हो पाता है।

इसके साथ ही सरकार पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के माध्यम से भी भेड़ पालन से जुड़ी गतिविधियों को मजबूती दे रही है। इस योजना के अंतर्गत अपशिष्ट से धन सृजन, वैक्सीन निर्माण इकाइयों, प्राथमिक ऊन प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य संबंधित परियोजनाओं के लिए 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। यह पहल पशुपालन से जुड़ी पूरी मूल्य शृंखला (Value Chain) को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

सरकार का मानना है कि यदि भेड़ पालन को केवल कच्चे उत्पादन तक सीमित न रखकर प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन से जोड़ा जाए, तो किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकता है। इसी उद्देश्य से एक एकीकृत मूल्य शृंखला विकसित करने पर काम किया जा रहा है, ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो और लाभ सीधे पशुपालकों तक पहुंचे। इससे ग्रामीण आय में वृद्धि के साथ-साथ देश में मटन और ऊन क्षेत्र की अप्रयुक्त क्षमता का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।

भेड़ पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कौशल विकास और क्षमता निर्माण पर भी खास ध्यान दे रही है। किसानों और उद्यमियों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, पोषण, प्रजनन और विपणन से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन पद्धतियां ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सकें। मोबाइल पशु चिकित्सा वैन के जरिए टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और पशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है, जिससे पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो रहा है।

सरकार की यह पहल ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए भी नए अवसर खोल रही है। भेड़ पालन न केवल स्वरोजगार का साधन बन रहा है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रहा है। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिल रहा है। वहीं युवा वर्ग इसे एक आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाकर गांवों में ही रोजगार सृजन कर रहा है।

कुल मिलाकर, राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़ और बकरी पालन को दिया जा रहा प्रोत्साहन ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो रहा है। 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी, ब्याज सहायता, नस्ल सुधार, अवसंरचना विकास और कौशल प्रशिक्षण जैसे कदम इस क्षेत्र को व्यावसायिक रूप से मजबूत बना रहे हैं। यदि किसान, पशुपालक और उद्यमी इस योजना का सही तरीके से लाभ उठाएं, तो भेड़ पालन न केवल उनकी आय बढ़ा सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और मजबूती भी दे सकता है

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