राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत: रबी सीजन में समय पर पहुंचेगी यूरिया की नई खेप, कई जिलों में तेज सप्लाई से खाद की कमी नहीं होगी

यूरिया संकट खत्म? राजस्थान में 34,000 MT यूरिया जल्द पहुंचेगा, जिलों की लिस्ट देखें


राजस्थान में रबी सीजन की बुवाई चरम पर है, ऐसे में किसानों को समय पर यूरिया खाद उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बन चुका है। राज्य सरकार ने केंद्र से लगातार समन्वय करते हुए दिसंबर के पहले सप्ताह के लिए 40 रैक यूरिया की मांग भेजी थी। इसी क्रम में 1 और 2 दिसंबर को 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया राज्य में पहुंच चुका है। साथ ही 13 रैक अभी परिवहन में हैं, जिनसे जल्द ही करीब 34 हजार मीट्रिक टन यूरिया अतिरिक्त उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे राज्यभर में खाद की कोई कमी नहीं रहने वाली है।

राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार नई प्राप्त खेप को प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचाया जा रहा है। जिनमें प्रमुख रूप से कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, सलूंबर, उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, जयपुर, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, कोटपुतली, खैरथल–तिजारा, सीकर, चुरू, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, राजसमंद और सिरोही शामिल हैं। विभाग के मुताबिक ब्लॉक स्तर पर उन इलाकों की पहचान कर ली गई है, जहां स्टॉक की कमी है और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है।

दिसंबर के पहले सप्ताह में प्रदेश में 1 लाख 8 हजार मीट्रिक टन यूरिया की सप्लाई का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रतिदिन औसतन 6 रैक यूरिया की आपूर्ति की जा रही है। इसके अतिरिक्त 2,500 मीट्रिक टन यूरिया प्रतिदिन सड़क मार्ग से भी भेजा जा रहा है, ताकि अधिक मांग वाले क्षेत्रों में किसान बिना रुकावट खाद प्राप्त कर सकें। कृषि विभाग का दावा है कि इस त्वरित सप्लाई प्रणाली से फसल वृद्धि प्रभावित नहीं होगी।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में खाद की उपलब्धता पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उन्होंने साफ कहा कि कम उपलब्धता वाले जिलों को विशेष प्राथमिकता के साथ सप्लाई दी जा रही है। इसके साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और यूरिया डाइवर्जन रोकने के लिए जिले स्तर पर टीमें गठित की गई हैं, जो किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई करेंगी। मंत्री ने बताया कि वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर जिले में सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है।

राज्य में वर्तमान उर्वरक स्टॉक भी संतोषजनक स्थिति में है। रबी 2025 के लिए केंद्र से आवंटित 7.55 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले अब तक 8.99 लाख मीट्रिक टन यूरिया राज्य में पहुंच चुका है। साथ ही 35 हजार मीट्रिक टन यूरिया रास्ते में है, जो जल्द जिलों में उपलब्ध होगा। वर्तमान स्टॉक में यूरिया 1.84 लाख एमटी, डीएपी 65 हजार एमटी, एनपीके 64 हजार एमटी और एसएसपी 1.53 लाख एमटी शामिल है। विभाग का कहना है कि इस वर्ष फॉस्फेटिक उर्वरक पिछले वर्ष की तुलना में 69 हजार एमटी अधिक उपलब्ध है, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बारां, बूंदी, झालावाड़, सवाईमाधोपुर, अलवर और भीलवाड़ा जैसे जिलों में अक्टूबर–नवंबर के दौरान उनकी कुल मांग से अधिक यूरिया भेजा गया है। वहीं प्रतापगढ़ जिले के धरियावद क्षेत्र में 2,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया भेजने की प्रक्रिया जारी है। इससे उन क्षेत्रों के किसानों को राहत मिलेगी, जहां पिछले दिनों मांग अधिक दर्ज हुई थी।

मुख्य शासन सचिव (कृषि) मंजू राजपाल ने भी जिलाधिकारियों को उर्वरक वितरण की सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खाद के वैज्ञानिक उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्यभर में प्रत्येक उर्वरक विक्रेता पर विभागीय कार्मिक तैनात किए गए हैं, ताकि सही वितरण प्रणाली का पालन हो सके। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों में 61 चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उर्वरकों की अवैध निकासी को रोकना है।

राज्य सरकार का दावा है कि विशेष अभियान चलाकर जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की गई है और आगामी दिनों में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी, ताकि हर किसान को समय पर यूरिया खाद उपलब्ध हो सके और रबी फसलों की पैदावार प्रभावित न हो।

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