मध्य प्रदेश 13 नवंबर को किसानों के खाते में आएंगे रुपए: सीएम डॉ. मोहन यादव करेंगे ‘भावांतर भुगतान योजना’ का लाभ ट्रांसफर, सोयाबीन पर मिलेगा 1300 रुपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त

मध्य प्रदेश: 13 नवंबर को किसानों के खाते में आएंगे पैसे, जानें पूरी योजना



मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार 13 नवंबर को प्रदेशभर के सोयाबीन उत्पादक किसानों के खातों में ‘मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना’ के तहत राशि ट्रांसफर करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि इस योजना के तहत सोयाबीन का मॉडल रेट 4,000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक तय किया गया है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह किसान हितैषी है और हर संभव प्रयास कर रही है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल सके। उन्होंने बताया कि इस बार सोयाबीन की फसल के लिए किसानों को बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बीच का अंतर पूरा करने के लिए अतिरिक्त 1300 रुपए प्रति क्विंटल की सहायता दी जाएगी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिल सके।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य सशक्त भारत-सशक्त मध्यप्रदेश के विज़न को साकार करना है, जिसमें किसान सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं।”

क्या है मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना?

‘मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना’ मध्य प्रदेश सरकार की एक किसान कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के तहत यदि किसी फसल का बाजार भाव सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम रहता है, तो सरकार उस अंतर की राशि सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर करती है।
इससे किसानों को नुकसान से बचाने और उनकी आय को स्थिर रखने में मदद मिलती है। यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें अपनी उपज बाजार में बेचने के बाद भी एमएसपी से कम मूल्य मिलता है।

कैसे मिलेगा किसानों को लाभ?

इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने ई-उपार्जन पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। किसान को अपनी भूमि और फसल का विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद कृषि विभाग और राजस्व विभाग द्वारा रकबे और फसल की पुष्टि की जाती है।
इसके बाद, पंजीकृत किसानों के बैंक खातों में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से राशि भेजी जाती है। इस प्रक्रिया से पारदर्शिता बनी रहती है और किसानों को बिना किसी देरी के योजना का लाभ सीधे उनके खातों में प्राप्त होता है।

सोयाबीन किसानों को बड़ी राहत

इस बार राज्य सरकार ने सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए विशेष राहत का ऐलान किया है। हाल के दिनों में बाजार में सोयाबीन की कीमतों में गिरावट आई थी, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ा था। इसे देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया कि किसानों को प्रति क्विंटल 1300 रुपए का भावांतर भुगतान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह राशि 13 नवंबर को सभी पात्र किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम न केवल किसानों को वित्तीय सहायता देगा, बल्कि उन्हें भविष्य में अधिक उत्पादन और गुणवत्ता सुधार के लिए प्रोत्साहित भी करेगा।

किसान कल्याण की दिशा में एक और कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही राज्य के विकास की नींव है। सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाएं लागू कर रही है। चाहे वह फसल बीमा योजना हो, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी या सिंचाई सुविधाओं का विस्तार — हर कदम का उद्देश्य किसान को आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों की मेहनत का पूरा मूल्य उन्हें मिले और वे आर्थिक रूप से सशक्त बनें। भावांतर योजना इसी दिशा में एक सशक्त पहल है।”

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश सरकार की ‘भावांतर भुगतान योजना’ किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है। 13 नवंबर को जब सोयाबीन किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर होगी, तो यह न केवल आर्थिक राहत प्रदान करेगी बल्कि किसानों के मनोबल को भी बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि की ओर प्रेरित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
राज्य सरकार का यह कदम निश्चित रूप से प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए एक बड़ा उत्साहवर्धक संदेश है — कि उनकी मेहनत और फसल का सही मूल्य अब सुरक्षित हाथों में है।

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