परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY): जैविक खेती को नई दिशा, किसानों को सशक्त बनाने की पहल

जैविक खेती योजना 2025: किसानों को ₹31,500 प्रति हेक्टेयर मिलेंगे, जानिए आवेदन प्रक्रिया

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2025

भारत की कृषि परंपरा सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक रही है। किन्तु रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता ने मिट्टी की गुणवत्ता, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने वर्ष 2015 में परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) की शुरुआत की — जिसका उद्देश्य है जैविक खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आमदनी में वृद्धि करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना।


योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

PKVY को राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के तहत प्रारंभ किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक, कम लागत वाली, रसायन मुक्त खेती की ओर प्रेरित करना है, ताकि कृषि उत्पाद सुरक्षित हों, भूमि की उर्वरता बनी रहे और किसान सामूहिक रूप से आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना और मिट्टी की सेहत सुधारना।
  • रासायनिक इनपुट पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
  • उत्पादन लागत में कमी और किसानों की आय में वृद्धि।
  • उपभोक्ताओं को सुरक्षित, स्वास्थ्यवर्धक और जैविक खाद्य उपलब्ध कराना।
  • किसान समूहों को संगठित कर प्रमाणन, प्रसंस्करण और विपणन में सहयोग देना।
  • ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन और बाजार से सीधा जुड़ाव स्थापित करना।

क्लस्टर आधारित जैविक खेती मॉडल

PKVY का आधार है क्लस्टर मॉडल, जिसमें किसानों को 20 हेक्टेयर के समूहों में संगठित किया जाता है। ये क्लस्टर सामूहिक रूप से जैविक खेती अपनाते हैं, जिससे प्रशिक्षण, प्रमाणन और विपणन जैसे कार्य अधिक प्रभावी ढंग से हो पाते हैं।

अब तक देशभर में 52,289 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं, जिससे 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के अंतर्गत आ चुका है और 25.30 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं (फरवरी 2025 तक)।


वित्तीय सहायता और लाभ

योजना के तहत किसानों को ₹31,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता तीन वर्षों की अवधि में दी जाती है। यह राशि विभिन्न घटकों में वितरित होती है:

  • जैविक इनपुट के लिए ₹15,000 (DBT के माध्यम से)
  • विपणन, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग के लिए ₹4,500
  • प्रमाणन और अवशेष विश्लेषण के लिए ₹3,000
  • प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण हेतु ₹9,000

यह व्यापक सहायता न केवल किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है, बल्कि उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने में भी मदद करती है।


प्रवर्तन एवं क्रियान्वयन ढांचा

योजना का क्रियान्वयन किसान-केंद्रित दृष्टिकोण से किया जाता है। किसान रीजनल काउंसिल (Regional Council) के माध्यम से आवेदन करते हैं, जो उन्हें प्रशिक्षण, प्रमाणन और योजनागत सहायता प्रदान करती हैं।

केंद्रीय सरकार से राज्य सरकारों को और वहाँ से रीजनल काउंसिलों को फंड हस्तांतरित किए जाते हैं। किसानों को सहायता राशि Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सीधे उनके खातों में दी जाती है, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होती है।


जैविक प्रमाणन प्रणाली

पूर्व में जैविक किसानों के लिए विश्वसनीय प्रमाणन प्रणाली की कमी थी। PKVY ने इसे दो प्रमुख प्रणालियों के माध्यम से दूर किया:

  1. थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन (NPOP):
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत लागू। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और किसानों को निर्यात बाजारों तक पहुँचने का अवसर प्रदान करता है।

  2. पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (PGS-India):
    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन सामुदायिक, किसान-आधारित प्रणाली है। इसमें किसान आपसी निरीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया में भाग लेते हैं, जिससे यह सस्ती और सुलभ बनती है।

वर्ष 2020-21 में सरकार ने लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन (LAC) कार्यक्रम भी शुरू किया, जिससे उन क्षेत्रों को त्वरित प्रमाणन मिल सके जहाँ रासायनिक खेती कभी नहीं की गई। जैसे — जनजातीय क्षेत्र, द्वीप समूह और पर्यावरणीय रूप से संरक्षित जोन


उपलब्धियां (2015–2025)

  • वर्ष 2015 से 2025 तक ₹2,265.86 करोड़ PKVY के तहत जारी किए गए।
  • वर्ष 2024–25 में RKVY के अंतर्गत ₹205.46 करोड़ का आवंटन।
  • 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के अंतर्गत, 52,289 क्लस्टर बने, 25.30 लाख किसान लाभान्वित।
  • वर्ष 2023–24 में 1.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य जारी और 1.98 लाख हेक्टेयर नया क्षेत्र शामिल।
  • दंतेवाड़ा (छ.ग.) में 50,279 हेक्टेयर और पश्चिम बंगाल में 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र LAC के तहत प्रमाणित।
  • लक्षद्वीप के 2,700 हेक्टेयर, कार निकोबार एवं नैनकोरी द्वीपों के 14,491 हेक्टेयर क्षेत्र प्रमाणित जैविक घोषित।
  • सिक्किम को ₹96.39 लाख की सहायता से विश्व का पहला 100% जैविक राज्य घोषित किया गया।
  • लद्दाख में 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए ₹11.475 लाख का समर्थन।
  • दिसंबर 2024 तक 6.23 लाख किसान, 19,016 स्थानीय समूह, 89 इनपुट आपूर्तिकर्ता और 8,676 खरीदार जैविक खेती पोर्टल (Jaivik Kheti) पर पंजीकृत।

डिजिटल और बाजार नवाचार

जैविक खेती पोर्टल (www.jaivikkheti.in) किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसान अपने जैविक उत्पाद सीधे बेच सकते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका घटती है और आय में वृद्धि होती है।


आगे की दिशा

सरकार ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) के साथ PKVY के एकीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसका उद्देश्य है — प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना।


निष्कर्ष

परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) ने बीते एक दशक में भारत में जैविक खेती को जनआंदोलन में परिवर्तित कर दिया है। यह योजना न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार की दिशा में ठोस कदम है।

सरकार का यह प्रयास ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उस परिकल्पना को साकार कर रहा है, जहाँ परंपरा और तकनीक का संगम एक हरित, स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण कर रहा है।

अस्वीकरण: यह जानकारी द्वितीयक शोध के माध्यम से एकत्र की गई है और landlevellers इसमें किसी भी त्रुटि के लिए जिम्मेदार नहीं है।

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