खेत तालाब योजना 2025: किसानों को 90% सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन

किसानों के लिए बड़ी राहत: खेत-तालाब योजना में 90% तक सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन


मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा संचालित खेत-तालाब योजना किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और खेती के साथ अतिरिक्त आय के नए रास्ते खोलने में अहम भूमिका निभा रही है। खासतौर पर मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है, क्योंकि इसके तहत खेत में तालाब निर्माण पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि किसान सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित न रहें, बल्कि जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से अपनी आमदनी बढ़ा सकें।

राज्य सरकार लगातार किसानों और ग्रामीण हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई-नई जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत मत्स्य विभाग द्वारा खेत-तालाब योजना को लागू किया गया है। यह योजना इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे एक ही समय में कई फायदे मिलते हैं। खेत में बना तालाब वर्षा जल के संरक्षण में मदद करता है, सूखे के समय सिंचाई का विकल्प देता है और मत्स्य पालन के जरिए नियमित आमदनी का साधन भी बनता है। आज के समय में जब खेती लागत बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह योजना किसानों के लिए आर्थिक संबल साबित हो रही है।

सरकार ने इस योजना की शुरुआत किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बहुआयामी कृषि गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से की है। योजना के तहत किसानों को लगभग एक हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में तालाब निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। तालाब बनने के बाद किसान इसमें बारिश का पानी इकट्ठा कर सकते हैं, जिससे सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो जाती है। इसके साथ ही तालाब में मछली पालन कर किसान साल भर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के प्रति किसानों की रुचि तेजी से बढ़ रही है।

खेत-तालाब योजना का एक अहम पहलू यह भी है कि इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। बारिश के पानी को तालाब में संग्रहित करने से भूजल स्तर में सुधार होता है और आसपास के खेतों को भी लाभ मिलता है। सरकार का मानना है कि यह योजना खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। साथ ही इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं, क्योंकि तालाब निर्माण और मत्स्य पालन से जुड़े कामों में स्थानीय लोगों को काम मिलता है।

इस योजना के तहत अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के किसानों को विशेष लाभ दिया जा रहा है। राज्य सरकार का फोकस आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर है। इसी कारण एसटी वर्ग के किसानों को अधिकतम सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, ताकि वे कम लागत में तालाब बनवाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें। सरकार का मानना है कि इससे आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन की समस्या भी कम होगी।

सब्सिडी की बात करें तो खेत-तालाब योजना के तहत तालाब निर्माण की कुल लागत का 90 प्रतिशत तक अनुदान सरकार द्वारा दिया जाता है। शेष 10 प्रतिशत राशि किसान को स्वयं वहन करनी होती है, जिसे वह अपनी बचत या फिर बैंक ऋण के माध्यम से पूरा कर सकता है। इस व्यवस्था से किसानों पर आर्थिक बोझ बहुत कम पड़ता है और वे आसानी से अपने खेत में तालाब बनवा पाते हैं। यही वजह है कि यह योजना छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं। सबसे पहले आवेदक का मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है। इसके अलावा किसान के पास लगभग एक हेक्टेयर कृषि भूमि होनी चाहिए। यह भूमि आवेदक के नाम पर दर्ज हो या वैध रूप से उसके उपयोग में होनी चाहिए। सरकार द्वारा तय की गई इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही और पात्र किसानों तक ही पहुंचे। पात्रता पूरी होने के बाद ही आवेदन को स्वीकृति दी जाती है।

अगर दस्तावेजों की बात करें तो आवेदन के समय किसानों को कुछ जरूरी कागजात जमा करने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, समग्र आईडी, भूमि से जुड़े दस्तावेज और एसटी वर्ग के किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र शामिल हैं। सभी दस्तावेजों का सही और अद्यतन होना आवश्यक है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो। विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद ही योजना का लाभ दिया जाता है।

खेत-तालाब योजना में आवेदन की प्रक्रिया फिलहाल ऑफलाइन रखी गई है। इच्छुक किसानों को अपने जिले के मत्स्य विभाग कार्यालय में जाकर संपर्क करना होता है। वहां से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर किसान को सभी जरूरी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होती हैं। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म को कार्यालय में जमा करना होता है। आवेदन जमा होने के बाद विभाग द्वारा जांच की जाती है और यदि किसान पात्र पाया जाता है, तो उसे योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। इसके बाद तालाब निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

किसानों के लिए यह योजना इसलिए भी फायदेमंद मानी जा रही है क्योंकि इससे सिर्फ सिंचाई की समस्या का समाधान ही नहीं होता, बल्कि मत्स्य पालन से स्थायी आय का स्रोत भी तैयार होता है। एक बार तालाब बन जाने के बाद किसान हर साल मछली उत्पादन से अच्छी कमाई कर सकते हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और वे खेती में नई तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित होते हैं।

कुल मिलाकर, खेत-तालाब योजना मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बहुउद्देश्यीय योजना है, जो जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा, मत्स्य पालन और रोजगार सृजन जैसे कई लक्ष्यों को एक साथ पूरा करती है। सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। अगर आप भी मध्यप्रदेश के किसान हैं और खेती के साथ अतिरिक्त आय का जरिया तलाश रहे हैं, तो खेत-तालाब योजना आपके लिए एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है।

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