खरीफ फसलों की बुवाई 1121 लाख हेक्टेयर से अधिक — मक्का और उड़द उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद

खरीफ फसलों की बुवाई 2025: मक्का और उड़द ने बढ़ाया उत्पादन, कुल क्षेत्र 1121 लाख हेक्टेयर पार


तिथि: 06 अक्टूबर 2025, 

भारत के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 3 अक्टूबर 2025 तक खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति जारी की है। इस वर्ष देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल क्षेत्रफल 1121.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष (2024-25) के 1114.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 6.51 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि देश का कृषि क्षेत्र मजबूत मानसूनी परिस्थितियों और किसानों के बढ़ते उत्साह के चलते एक नई ऊंचाई छू रहा है।


धान की बुवाई में स्थिर वृद्धि — खाद्यान्न सुरक्षा को मजबूती

धान भारत की प्रमुख खरीफ फसल है और खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2025-26 में धान की बुवाई 441.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जबकि पिछले वर्ष यह क्षेत्रफल 435.68 लाख हेक्टेयर था। यानी 5.90 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है।

यह वृद्धि न केवल धान उत्पादक राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना में बेहतर मानसून के कारण हुई है, बल्कि सरकार द्वारा समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई सहायता उपलब्ध कराने से भी किसानों को लाभ मिला है। इस स्थिर वृद्धि से उम्मीद है कि चावल उत्पादन में निरंतरता बनी रहेगी और देश की खाद्यान्न आवश्यकताएं पूरी होंगी।


दलहनों में मजबूती — उड़द और तुअर में वृद्धि का रुझान

दलहन फसलें भारत के पोषण और खाद्य संतुलन के लिए अहम भूमिका निभाती हैं। इस वर्ष दलहन फसलों की कुल बुवाई 120.41 लाख हेक्टेयर में की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.37 लाख हेक्टेयर अधिक है।

दलहनों की प्रमुख फसलों में –

  • तुअर (अरहर) की बुवाई 46.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले वर्ष के 46.45 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ी वृद्धि दर्शाती है।
  • उड़द (Urad) ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पिछले वर्ष 22.87 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, जो अब बढ़कर 24.37 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है — यानी लगभग 6.5% की वृद्धि। यह वृद्धि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
  • कुल्थी (Horse Gram), मूंग और अन्य दालों में भी मामूली सुधार दर्ज किया गया है।

दलहन उत्पादन में यह सकारात्मक रुझान किसानों के लिए भी लाभकारी साबित होगा क्योंकि दालों की मांग देश में लगातार बढ़ रही है।


मोटे अनाजों की बुवाई में उछाल — ‘श्री अन्न’ मिशन की सफलता

भारत सरकार के ‘श्री अन्न’ (Millets) अभियान के चलते मोटे अनाजों की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष मोटे अनाजों (Coarse Cereals) का कुल क्षेत्रफल 194.67 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 183.54 लाख हेक्टेयर की तुलना में 11.13 लाख हेक्टेयर अधिक है।

इस वृद्धि का सबसे बड़ा कारण मक्का (Maize) की बुवाई में आई छलांग है। पिछले वर्ष जहां मक्का की बुवाई 84.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 94.95 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई — यानी 12% से अधिक की वृद्धि

मक्का के साथ-साथ छोटे बाजरा (Small Millets) की बुवाई में भी 0.97 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि ज्वार, बाजरा और रागी जैसी पारंपरिक मोटे अनाज फसलों में मामूली कमी देखी गई है, पर कुल मिलाकर क्षेत्रीय विविधता और जलवायु अनुकूल खेती ने ‘मोटे अनाजों’ के क्षेत्र को फिर से सशक्त किया है।

यह वृद्धि न केवल देश की पोषण सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि जलवायु परिवर्तन के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा देगी।


तेलहन फसलों में मामूली गिरावट — सोयाबीन और मूंगफली में कमी

तेलहन फसलें जैसे सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी, सरसों आदि किसानों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस वर्ष तेलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 190.13 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 200.75 लाख हेक्टेयर से लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर कम है।

  • सोयाबीन की बुवाई 120.45 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 129.55 लाख हेक्टेयर की तुलना में घट गई है।
  • मूंगफली (Groundnut) में भी 1.60 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।
  • हालांकि, अरंडी (Castor Seed) और नाइजर सीड जैसी फसलों में मामूली वृद्धि हुई है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी है और आने वाले रबी सीजन में इसकी भरपाई संभव है। सरकार द्वारा जारी विभिन्न राष्ट्रीय तेल बीज मिशन कार्यक्रमों से दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहेगी।


गन्ना, जूट और कपास की स्थिति

गन्ना (Sugarcane) की बुवाई में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इस वर्ष कुल क्षेत्रफल 59.07 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 57.22 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.86 लाख हेक्टेयर अधिक है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में बुवाई की स्थिति बेहतर रही है।

जूट एवं मेस्टा (Jute & Mesta) की बुवाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जो 5.75 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.56 लाख हेक्टेयर पर आ गई है।

वहीं कपास (Cotton) की बुवाई में भी मामूली कमी देखी गई है। पिछले वर्ष इसका क्षेत्रफल 112.97 लाख हेक्टेयर था, जो इस वर्ष 110.03 लाख हेक्टेयर रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार कपास उत्पादन में यह कमी मानसूनी असमानता और क्षेत्रीय फसल परिवर्तन के कारण आई है।


कुल कृषि परिदृश्य — संतुलित वृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति

खरीफ 2025-26 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत का कृषि क्षेत्र संतुलित और स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर —

  • धान, दलहन और मोटे अनाजों में उल्लेखनीय वृद्धि
  • मक्का और उड़द जैसी फसलों में दोगुनी रफ्तार से वृद्धि
  • तेलहन और कपास में मामूली गिरावट
  • गन्ना उत्पादन में निरंतर मजबूती

इन सभी आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को प्रोत्साहन मिल रहा है और किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहकर पोषक अनाज, दलहन और नकदी फसलों की ओर भी अग्रसर हैं।

सरकार द्वारा शुरू की गई पहलें जैसे —

  • मिलेट्स मिशन,
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन,
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना,
  • और बीज एवं उर्वरक सहायता योजनाएं
    इन सबने खरीफ सीजन को उत्पादक और स्थिर बनाया है।

कृषि क्षेत्र की मजबूती — आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

खरीफ बुवाई के आंकड़े न केवल देश की कृषि शक्ति को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि किसान अब आधुनिक तकनीक, समय पर बीज वितरण, और सरकारी सहायता योजनाओं का पूरा लाभ उठा रहे हैं।

इस वर्ष का खरीफ सीजन यह संदेश देता है कि भारत पोषण, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है।
मक्का और उड़द जैसी फसलों में आई उल्लेखनीय वृद्धि देश की पोषण क्षमता और कृषि निर्यात संभावनाओं को और मजबूत करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *